अपेक्षाओं का बही-खाता

डा. भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक वित्त मंत्री को चाहिए था कि देश में बढ़ते जल संकट को देखते हुए रिचार्ज वेल, जिसमें बरसात के पानी को सीधे भूगर्भीय जलाशयों में डाला जाता है, उसके लिए विशाल रकम उपलब्ध कराती। सेंट्रल ग्राउंड…

कल्याणकारी योजनाओं का पुनर्गठन

डा. भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक जीएसटी की प्राप्तियां वर्तमान में 12 लाख करोड़ रुपए प्रतिवर्ष हैं। सुझाव है कि इन पर 50 प्रतिशत का सेस लगाया जा सकता है। बताते चलें कि जीएसटी पर लगाए गए सेस से प्राप्ति पूर्णतया केंद्र…

आर्थिकी को ले डूबेगा वायु प्रदूषण

डा. भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक सरकार की जिम्मेदारी है कि जनता के हित में जो कार्य हो, उसके अनुसार कानून बनाए और उसे लागू करे। सरकार के सामने प्रश्न यह रहता है कि प्रदूषण नियंत्रण उपकरण लगाने का सीधा बोझ व्यवसायी के ऊपर पड़ता है।…

नौकरशाह डुबो रहे अर्थव्यवस्था

डा. भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक मेरा मानना है कि भारत सरकार में विश्व बैंक, अंतराष्ट्रीय मुद्राकोष और बहुराष्ट्रीय कंपनियों की अप्रत्यक्ष घुसपैठ इन रास्तों से हो रही है, जिसके कारण भारत सरकार अपने खर्चों को कम करने और…

सिंधु जल समझौता रद्द हो

डा. भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक यदि हम समझौते को तत्काल रद्द न करना चाहें, तो भी पाकिस्तान को नोटिस देकर विश्व बैंक की मध्यस्तता तो मांग ही सकते हैं। हम कह सकते हैं कि हम इस समझौते को रद्द करना चाहते हैं, क्योंकि इससे आपसी सौहार्द…

वित्तीय घाटे पर पुनर्विचार करें

डा. भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक वित्तीय घाटे के निर्धारण में यह नहीं देखा जाता कि सरकार द्वारा इन दोनों में से कौन से खर्च किए जा रहे हैं। सरकार यदि अपने कर्मियों को बढ़ाकर वेतन दे और इसके लिए ऋण ले अथवा सरकार हाई-वे…

चुनाव को सरकारी अनुदान

डा. भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक इन सरकारी अनुदानों के सकारात्मक प्रभाव सामने आए हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कानसिन द्वारा किए गए एक शोध में पाया गया कि सरकारी अनुदान से प्रत्याशियों की संख्या में वृद्धि हुई है। साथ-साथ…

व्हिप को सीमित किया जाए

डा. भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक अब सांसद केवल चपरासी हो गए हैं, जिनका कार्य है कि उपस्थित होकर पार्टी के आदेशानुसार बटन दबा दें। यह व्यवस्था गांधी जी की कल्पना के पूर्ण विपरीत है। गांधी जी ने सोचा था कि बिना पार्टी की…

सरकार की आर्थिक चुनौतियां

डा. भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक सार्वजनिक इकाइयों के घाटे का मूल कारण यह है कि उनके कार्यों में राजनीतिक दखल होता है और उनके अधिकारियों को कंपनी के लाभ से सरोकार कम ही होता है। अधिकारी के लिए यह पूरी तरह संभव होता है कि…

अर्थव्यवस्था की कमजोर स्थिति

डा. भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक यह भी सही है कि कभी-कभी मरीज की बीमारी को दूर करने के लिए सर्जरी करनी पड़ती है और इस दौरान मरीज का कष्ट बढ़ता है, लेकिन इस आकलन में संकट यह है कि कष्ट सुधार की ओर ले जा रहा है…

सबसे तेज अर्थव्यवस्था का सच

डा. भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक भाजपा का कहना था कि कांग्रेस में निर्णय लेने की क्षमता नहीं रह गई थी। भाजपा अर्थव्यवस्था को तेजी से आगे बढ़ाएगी जिससे कि तमाम रोजगार उत्पन्न होंगे। बीते समय में तमाम अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं…

सार्वभौमिक आय योजना

डा. भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक देश की सरकार यदि चाहे तो यूबीआईएस के लिए धन जुटा सकती है। गणित इस प्रकार है। केंद्र सरकार द्वारा कल्याणकारी योजनाओं पर निम्न प्रकार के खर्च किए जा रहे हैं - खाद्य सबसिडी पर 140000 करोड़ रुपए प्रति…

जीएसटी पर पुनर्विचार करें

डा. भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक जीएसटी के कारण अर्थव्यवस्था की कुशलता का लाभ नहीं मिल रहा है। जीएसटी लागू होने के कारण साइकिल की उत्पादन लागत कम हुई है, लेकिन आम आदमी के पास साइकिल खरीदने के लिए क्रय शक्ति ही नहीं रही है। यह ऐसे…

 विकास दर के लक्ष्य का रास्ता

डा. भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक सरकारी बैंकों को बेचकर उस रकम का सरकार के अधीन ही दूसरे कार्यों में निवेश करने से सरकार की भूमिका छोटी नहीं होती है, बल्कि सरकार की भूमिका में गहराई आएगी। मेरा तर्क अर्थव्यवस्था में सरकार की…

सरकारी बैंकों की सर्जरी

डा. भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक कुल आकलन इस प्रकार बैठता है। सरकारी बैंक अकुशल हैं, जबकि प्राइवेट बैंक इनकी तुलना में कुशल हैं। सरकारी बैंक की जवाबदेही आधी है, जबकि प्राइवेट बैंक में इसकी कोई आवश्यकता नहीं होती है। सामाजिक दायित्व…