फरक्का का तांडव 

भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक फरक्का बराज के माध्यम से सरकार ने गंगा के आधे पानी को हुगली में डालने का कार्य किया और आधा पानी बांग्लादेश को पद्मा के माध्यम से जाता रहा। एक विशाल नहर से पानी को फरक्का से ले जाकर हुगली में डाला गया। यह…

स्वयं बुला रहे बाढ़ की तबाही 

भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में बाढ़ देखी जा रही है। इस परिस्थिति का एक प्रमुख कारण ग्लोबल वार्मिंग है। धरती का ताप बढ़ रहा है जिससे हमारे मानसून के पेटर्न में बदलाव आ रहा है। पहले वर्षा…

जल विद्युत का सूर्यास्त 

भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक सौर ऊर्जा जल विद्युत की तुलना में बहुत ही सस्ती पड़ती है। लेकिन समस्या यह है कि सौर ऊर्जा का उत्पादन दिन के समय होता है जबकि बिजली की अधिक जरूरत सुबह, शाम एवं रात में होती है, जिसे पीकिंग पावर कहा जाता है।…

रिजर्व बैंक ने डाला संकट में 

भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक रिजर्व बैंक अपनी आय में से कुछ रकम हर वर्ष रिजर्व में डाल देता है जिसे सुरक्षित रखा जाता है कि किसी संकट के समय उसका उपयोग किया जा सके। वर्ष 2012 में रिजर्व बैंक ने 27 हजार करोड़ रुपए अपनी आय में से रिजर्व…

महिलाओं का घटता श्रम 

. भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक 2012 में 31 प्रतिशत एवं 2005 में 43 प्रतिशत महिलाएं कार्यरत थीं। स्पष्ट है कि बीते पंद्रह साल में कार्यरत महिलाओं की संख्या में भारी गिरावट आई है, इस विषय के दो पक्ष हैं। एक पक्ष यह है कि नई…

क्यों गिर रहा है रुपया?

डा. भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक वर्तमान समय में जो रुपए में गिरावट आ रही है इसका एक प्रमुख कारण तेल के बढ़ते आयात हैं। हमारी ऊर्जा की जरूरतें बढ़ रही हैं और तदानुसार हमें तेल के आयात अधिक करने पड़ रहे हैं। इस समस्या को और…

गहराती मंदी की चुनौती

डा. भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक इस नीति का मूल आधार यह है कि यदि भारत का वित्तीय घाटा नियंत्रण में रहेगा तो विदेशी निवेशकों को हमारी अर्थव्यवस्था पर भरोसा बनेगा, वे हमारे देश में उसी प्रकार निवेश करेंगे जिस प्रकार उन्होंने 80 और 90…

नदियां जोड़ने के विकल्प

डा. भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक अधिकाधिक एक ही राज्य में बहने वाली दो नदियों को जोड़ने का छोटा मोटा प्रयास किया जा सकता है, लेकिन यह भी सही है कि यदि पंजाब में जल भराव हो रहा है और राजस्थान में सूखा आ रहा है तो देश के लिए यह लाभप्रद…

ब्याज दर में कटौती निष्प्रभावी

डा. भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक अर्थव्यवस्था के संकट में आने का पहला कारण सरकारी खपत में पर्याप्त कटौती का न होना है। सरकार द्वारा दो प्रकार के खर्च किए जाते हैं- चालू खर्च एवं पूंजी खर्च। इन दोनों का योग वित्तीय खर्च होता है। दोनों…

ढांचागत सुधार हटाएंगे भ्रष्टाचार

डा. भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक सुझाव है कि जवाबदेही बढ़ाई जाए। वर्तमान में सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही या तो मंत्रियों के प्रति होती है या सीएजी (कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल) के प्रति। यह जवाबदेही ठोस नहीं रहती है। अकसर मंत्री और…

वर्तमान में कांग्रेस का संकट

डा. भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक कांग्रेस की पालिसी का दूसरा हिस्सा उसी गरीब को रोटी बांटने का था, जिस रोटी को आर्थिक नीतियां छीन रही थीं। मनरेगा, खाद्य सुरक्षा एवं किसानों को ऋण माफी द्वारा किसान को राहत पहुंचाई जा रही थी, उसी तरह…

चीन से क्यों पिछड़ गए हम

डा. भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक चीन द्वारा 80 के दशक में लागू की गई आर्थिक विकास नीति को आज हम लागू नहीं कर पाएंगे। यही कारण है कि पिछले पांच सालों में मेक इन इंडिया सफल नहीं हुआ है और वर्तमान बजट में भी वित्त मंत्री…

ग्लोबल वार्मिंग में नया अर्थशास्त्र

डा. भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक मनोविज्ञान में मनुष्य की चेतना के दो स्तर- चेतन एवं अचेतन बताए गए हैं। मनोविज्ञान के अनुसार यदि चेतन और अचेतन में सामंजस्य होता है, तो व्यक्ति सुखी होता है। उसे रोग इत्यादि कम पकड़ते हैं,…

अपेक्षाओं का बही-खाता

डा. भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक वित्त मंत्री को चाहिए था कि देश में बढ़ते जल संकट को देखते हुए रिचार्ज वेल, जिसमें बरसात के पानी को सीधे भूगर्भीय जलाशयों में डाला जाता है, उसके लिए विशाल रकम उपलब्ध कराती। सेंट्रल ग्राउंड…

कल्याणकारी योजनाओं का पुनर्गठन

डा. भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक जीएसटी की प्राप्तियां वर्तमान में 12 लाख करोड़ रुपए प्रतिवर्ष हैं। सुझाव है कि इन पर 50 प्रतिशत का सेस लगाया जा सकता है। बताते चलें कि जीएसटी पर लगाए गए सेस से प्राप्ति पूर्णतया केंद्र…