मंदी को तोड़ने के उपाय

भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक यदि बाजार में मांग होती है तो उद्यमी येन केन प्रकारेण पूंजी एकत्रित कर फैक्टरी लगाकर माल बना कर उसे बेच ही लेता है। बाजार में मांग होती है तो उसे उत्पादित माल के दाम ऊंचे मिलते हैं और वह लाभ कमाता है।…

वित्तीय घाटे का भ्रम जाल

भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक वित्तीय घाटे को नियंत्रण करने की नीति मूलतः भ्रष्ट सरकारों पर अंकुश लगाने के लिए बनाई गई थी। सत्तर के दशक में दक्षिण अमरीका के देशों के नेता अति भ्रष्ट थे। वे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक से ऋण…

शिक्षा बजट का सदुपयोग कैसे हो?

भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक विद्यार्थियों की रुचि पढ़ने की नहीं है क्योंकि उनकी दृष्टि केवल हाई स्कूल का सर्टिफिकेट हासिल करने की होती है जिससे वे सरकारी नौकरी का आवेदन भर सकें। अध्यापकों की भी पढ़ाने की रुचि नहीं होती है क्योंकि…

मंदी तोड़ने के उपाय

भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक सरकार ने हाल में कुछ छोटे सरकारी बैंकों का बड़े बैंकों में विलय किया है। साथ-साथ सरकार ने पिछले तीन वर्षों में सरकारी बैंकों की पूंजी में 250 हजार करोड़ रुपए का निवेश किया है। इस निवेश के बावजूद समस्त…

बढ़ती जनसंख्या का सुनहरा अवसर 

भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक स्वतंत्रता के बाद मेडिकल साइंस में सुधार हुआ। अपने देश में बाल मृत्यु दर में भारी गिरावट आई। मलेरिया जैसी बीमारियों पर हमने नियंत्रण पाया। इस कारण बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ी। उस समय परिवार में चार या छह…

भारत में जनमत संग्रह हो 

भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक इंग्लैंड में तीन वर्ष पहले सवाल उठा था कि इंग्लैंड को यूरोपियन यूनियन का हिस्सा बना रहना चाहिए या उससे बाहर आ जाना चाहिए। उस समय सत्तारूढ़ कंजरवेटिव पार्टी ने इस विवाद को समाप्त करने की दृष्टि से जनमत…

नदी संरक्षण के अधूरे कदम 

भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक उद्योगों और नगरपालिकाओं से गंदा पानी गंगा में अभी भी छोड़ा ही जा रहा है। यद्यपि मात्रा में कुछ कमी आई हो सकती है। देश की नदियों को स्थायी रूप से साफ करने के लिए हमें दूसरी रणनीति अपनानी पड़ेगी। पर्यावरण…

विकसित देशों का मोह 

भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक उद्यमी के लिए पहला विषय होता है कि बाजार में माल की मांग है या नहीं। यदि बाजार में माल की मांग होती है तो वह येन-केन प्रकारेण पूंजी की व्यवस्था कर फैक्टरी लगाता ही है। इसके विपरीत यदि बाजार में मांग नहीं…

टैक्स कटौती से नहीं होगा विकास 

भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक कंपनियों द्वारा अदा किए जाने वाले आयकर को घटाकर लगभग 33 प्रतिशत कर दिया है। इस उलटफेर से स्पष्ट होता है कि आयकर की दर का आर्थिक विकास पर प्रभाव असमंजस में है। यदि आय कर बढ़ाया जाता है तो इसका प्रभाव…

फरक्का का तांडव 

भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक फरक्का बराज के माध्यम से सरकार ने गंगा के आधे पानी को हुगली में डालने का कार्य किया और आधा पानी बांग्लादेश को पद्मा के माध्यम से जाता रहा। एक विशाल नहर से पानी को फरक्का से ले जाकर हुगली में डाला गया। यह…

स्वयं बुला रहे बाढ़ की तबाही 

भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में बाढ़ देखी जा रही है। इस परिस्थिति का एक प्रमुख कारण ग्लोबल वार्मिंग है। धरती का ताप बढ़ रहा है जिससे हमारे मानसून के पेटर्न में बदलाव आ रहा है। पहले वर्षा…

जल विद्युत का सूर्यास्त 

भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक सौर ऊर्जा जल विद्युत की तुलना में बहुत ही सस्ती पड़ती है। लेकिन समस्या यह है कि सौर ऊर्जा का उत्पादन दिन के समय होता है जबकि बिजली की अधिक जरूरत सुबह, शाम एवं रात में होती है, जिसे पीकिंग पावर कहा जाता है।…

रिजर्व बैंक ने डाला संकट में 

भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक रिजर्व बैंक अपनी आय में से कुछ रकम हर वर्ष रिजर्व में डाल देता है जिसे सुरक्षित रखा जाता है कि किसी संकट के समय उसका उपयोग किया जा सके। वर्ष 2012 में रिजर्व बैंक ने 27 हजार करोड़ रुपए अपनी आय में से रिजर्व…

महिलाओं का घटता श्रम 

. भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक 2012 में 31 प्रतिशत एवं 2005 में 43 प्रतिशत महिलाएं कार्यरत थीं। स्पष्ट है कि बीते पंद्रह साल में कार्यरत महिलाओं की संख्या में भारी गिरावट आई है, इस विषय के दो पक्ष हैं। एक पक्ष यह है कि नई…

क्यों गिर रहा है रुपया?

डा. भरत झुनझुनवाला आर्थिक विश्लेषक वर्तमान समय में जो रुपए में गिरावट आ रही है इसका एक प्रमुख कारण तेल के बढ़ते आयात हैं। हमारी ऊर्जा की जरूरतें बढ़ रही हैं और तदानुसार हमें तेल के आयात अधिक करने पड़ रहे हैं। इस समस्या को और…