सलमान खान केस में न्याय की विफलता

Apr 13th, 2018 12:08 am

प्रो. एनके सिंह

लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं

सलमान पर अपराध सिद्ध हुआ है, इसके बावजूद लोगों ने उनका स्वागत इस तरह किया मानो वे उनके कारनामे का अभिनंदन कर रहे हों। यह एक महत्त्वपूर्ण मामला है, न केवल इसलिए कि इसमें मुंबई का एक नायक संलिप्त है, बल्कि इसलिए भी कि इसमें एक प्रवृत्ति देखी गई जिसका मकसद न्याय के नजरिए से समाज के अन्य तबकों को एक सीख देना रहा है। इस केस ने दिखा दिया कि किस तरह अमीर व शक्तिशाली लोग कानून को अपराध करने और दोष सिद्ध हो जाने के बावजूद खिलौने की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं…

फिल्म स्टार सलमान खान पर 20 वर्ष पहले काले हिरन का शिकार करने का आरोप लगा था। इस मामले में अब दो दशक बाद कोर्ट का फैसला आया है और अपराध सिद्ध हुआ है। इस फैसले पर सत्ता के गलियारों में चर्चा हो रही है। यह खबर देशभर में हेडलाइन बनी क्योंकि किसी ने भी यह नहीं सोचा था कि सलमान को इतने गंभीर ढंग से सजा दी जाएगी। यह न्यायिक विवेक का हल्का अभ्यास था क्योंकि अपराध, चाहे इसके सामाजिक व राजनीतिक निहितार्थ कुछ भी हों, इतना घृणित नहीं था कि इस तरह का दंड दिया जाना जरूरी हो। यह सर्वाधिक छिछला केस था जिसने देशभर का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया। आम तौर पर शिकार के ऐसे मामले इतना ध्यान आकर्षित नहीं करते हैं, लेकिन यह केस इतना ध्यान आकर्षित इसलिए कर पाया क्योंकि बिश्नोई समुदाय, जो इस जानवर की हत्या की इजाजत नहीं देता है, ने इसे धार्मिक व राजनीतिक मामला बना दिया। इसके बावजूद सलमान खान को बिना समय गंवाए जमानत मिल गई और वह अपनी फिल्मों की शूटिंग के लिए मुंबई वापस लौट गए। एक बड़ी भीड़ ने उनकी रिहाई के लिए प्रार्थना की थी और जब वह जमानत होने के बाद वापस लौटे तो भी भीड़ ने उनका जोरदार स्वागत किया। स्वागत को देखकर यह नहीं कहा जा सकता कि यह कोई बड़ी जीत अथवा उपलब्धि है।

सलमान पर अपराध सिद्ध हुआ है, इसके बावजूद लोगों ने उनका स्वागत इस तरह किया मानो वे उनके कारनामे का अभिनंदन कर रहे हों। यह एक महत्त्वपूर्ण मामला है, न केवल इसलिए कि इसमें मुंबई का एक नायक संलिप्त है, बल्कि इसलिए भी कि इसमें एक प्रवृत्ति देखी गई जिसका मकसद न्याय के नजरिए से समाज के अन्य तबकों को एक सीख देना रहा है। इस केस ने दिखा दिया कि किस तरह अमीर व शक्तिशाली लोग कानून को अपराध करने और दोष सिद्ध हो जाने के बावजूद खिलौने की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। सलमान का इतिहास अपराधों से भरा पड़ा है। इससे पहले वह वर्ष 2002 के गंभीर सड़क हादसे में शामिल रहे हैं। वास्तव में सबसे गंभीर अपराध, जिसमें कड़ी सजा का प्रावधान भी है, वह था लोगों को मार देना। हिट एंड रन के इस मामले में आरोप है कि उन्होंने पांच गरीब मजदूरों, जो सड़क की पटरी पर सोए थे, को कुचल डाला था। सलमान रात के समय में शराब पीकर अपनी लैंड क्रूजर कार चला रहे थे। मेडिकल टेस्ट के अनुसार जिस समय सलमान कार चला रहे थे, उस समय उनके रक्त में अल्कोहल की मात्रा 62 मिलीग्राम पाई गई थी। जब यह मामला कोर्ट में पहुंचा तो उनके बचाव के लिए वकीलों की फौज लगा दी गई। वकील ने तर्क दिया कि सलमान खान ने शराब नहीं पी रखी थी तथा रिपोर्ट झूठी है।  इसी बीच वह डाक्टर, जिसने सलमान का मेडिकल टेस्ट किया था, मर गया। इसके अलावा जांच करने वाली पुलिस की केस डायरी भी कहीं खो गई। उनके चालक अशोक सिंह ने बयान दिया कि कार सलमान नहीं, बल्कि वह चला रहा था।

दस्तावेजों के अभाव, विविध पक्षों के वर्जन के अभाव और सलमान द्वारा किए गए चैरिटी के बहुत सारे कामों के दृष्टिगत संभवतः केस को गंभीरता से नहीं लिया गया। न्यायाधीश ने संदेह का लाभ देते हुए उन्हें बरी कर दिया। इस केस के निपटारे में 13 साल लग गए। यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि अगर इन पांच लोगों को सलमान ने नहीं कुचला, तो वे मारे कैसे गए? कोर्ट को इस मामले को अनसुलझा छोड़ने के बजाय अपने निर्देशन में जांच करवानी चाहिए थी।  ये पांच लोग भले ही गरीब थे, फिर भी यह मामला पांच लोगों की जिंदगी से जुड़ा है। उनके आश्रितों की दृष्टि से इस मामले को देखा जाना चाहिए था तथा न्याय मिलना चाहिए था। काला हिरन शिकार मामले के निपटारे में बीस साल लग गए।

सलमान से जुड़ा यह दूसरा मामला है। इसमें कानूनी समुदाय का तर्क यह है कि अगर बिश्नोई समाज ने विरोध न किया होता तथा मामले में हस्तक्षेप न किया होता तो सलमान अपनी निर्दोषता सिद्ध कर देते। जमानत मिलने के बाद भी इस मामले में समुदाय का दबाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। इस समुदाय ने संकेत दे दिया है कि वह मामले में बड़ी अदालत में अपील करेंगे और केस को जारी रखेंगे। इससे जाहिर है कि इस समुदाय के लोगों में रोष व्याप्त है और वे केस को जारी रखना चाहते हैं। अदालतों में कई केस आते रहे हैं जिनमें यह प्रमाणित हुआ है कि अमीर व शक्तिशाली लोग वैधानिक प्रणाली का लाभ उठाने में सफल होते रहे हैं। अपराध छुपाने के दो महत्त्वपूर्ण कारक हैं। पहला, विविध उपाय करके मामले में देरी कर देना। दूसरा, यह महत्त्वपूर्ण रणनीति कि गलत जांच करो तथा प्रमाण एकत्रीकरण में लूपहोल्स छोड़ दो। शिमला के कोटखाई छात्रा बलात्कार और हत्याकांड का मामला देखें तो जाहिर है कि अगर इस केस में हाई कोर्ट ने प्रभावी हस्तक्षेप न किया होता तो मामले में संलिप्त पुलिस के बड़े अधिकारियों के चेहरे जनता के सामने न आ पाते।

कोर्ट की सतत निगरानी के बावजूद अब भी, यहां तक कि सीबीआई को भी सबूत जुटाने लगभग असंभव से हो रहे हैं। जरूरत इस बात की है कि हमारी न्यायिक प्रणाली में केसों के निपटारे में जो ज्यादा समय लगता है, उस पर अंकुश लगाया जाए तथा सही जांच सुनिश्चित की जाए। सलमान का केस भी यह साबित करता है कि न्यायिक प्रणाली में इस तरह के प्रावधान करने की जरूरत है कि आम आदमी अथवा जानवर तक को न्याय मिल सके। वास्तव में हमें न्यायिक प्रणाली में व्यापक स्तर पर सुधार करने की जरूरत है।

बस स्टाप

पहला यात्री : हिमाचल सरकार ने शराब के दाम घटाकर बढि़या काम किया है, किंतु पेट्रोल के दाम क्यों बढ़ा दिए गए हैं?

दूसरा यात्री : सरकार नहीं चाहती कि लोग शराब पीकर इधर-उधर गाडि़यां दौड़ाएं।

ई-मेल : singhnk7@gmail.com

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