कश्मीर को लेकर कांग्रेस में एकता

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री

लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं

अलबत्ता सोज ने यह नहीं कहा कि कांग्रेस में छोटे लोग कौन थे, जिन्होंने कश्मीर के मसले पर नेहरू को आगे नहीं बढ़ने दिया। सोज को पूरा यकीन है कि यदि तुच्छ मन वाले कांग्रेसी नेहरू को न रोकते, तो नेहरू कश्मीर को परवेज मुशर्रफ वाली स्वायत्तता दे देते। वह शायद आज की आजादी से भी बड़ी होती, क्योंकि भारत वाली स्वायत्तता और परवेज मुशर्रफ वाली स्वायत्तता बराबर तो हो नहीं सकती। सोज की बात में दम है-नेहरू की चलती, तो कश्मीर घाटी को परवेज मुशर्रफ वाली स्वायत्तता मिल जाती और यदि पटेल की चलती, तो कश्मीर को पाकिस्तान वाली आजादी मिल जाती…

जम्मू-कश्मीर में भाजपा-पीडीपी की सरकार का अंत हो गया है। इसके अंत के साथ ही पीडीपी के भीतर की दरारें उभरने लगीं और कांग्रेस में कश्मीर के मुद्दे को लेकर एकता दिखाई देने लगी है। इसकी शुरुआत कश्मीर घाटी में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सैफुद्दीन सोज ने की। उन्होंने कहा कश्मीर को आजादी चाहिए, उससे कम कश्मीर में शांति नहीं हो सकती। उसके बाद उन्होंने अपनी मंशा को और स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि मैं कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ से सहमत हूं। जनरल परवेज का मानना है कि जम्मू-कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा है और भारत को इससे कुछ लेना-देना नहीं है। उसके बाद प्रो. सोज ने एक और जानकारी सांझा की। उन्होंने बताया कि सरदार पटेल नहीं चाहते थे कि नए बने पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ युद्ध हो, इसलिए वे जम्मू-कश्मीर पाकिस्तान को देने के लिए तैयार थे। इसके बाद उन्होंने एक और बात कही। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान को इस प्रकार का होना चाहिए कि वह कश्मीर को एडाप्ट कर सके।

भाव यह था कि भारत का वर्तमान संविधान कश्मीर को एडजस्ट नहीं कर पा रहा है। यानी कश्मीर को जितनी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए, उतनी भारतीय संविधान उसे देने के लिए तैयार नहीं है। उसके बाद सोज ने भारतीय सेना पर हल्ला बोला। उन्होंने कहा कश्मीरियों को मार रहे हो, मारते जाइए, लेकिन आप लोग समस्या को सुलझा नहीं सकेंगे। सोज ने कहा कश्मीर को छोटे लोगों के शासन ने तबाह कर दिया। यही छोटे लोग थे जिन्होंने कश्मीर को लेकर नेहरू को आगे नहीं बढ़ने दिया। दिल्ली ने कश्मीर की स्वायत्तता को खा लिया। दिल्ली से सोज साहिब का अर्थ भारत सरकार ही होगा। भारत सरकार पर कांग्रेस ही नहीं, बल्कि नेहरू परिवार का ही कब्जा रहा ।

इसका मतलब नेहरू परिवार ने कश्मीर की स्वायत्तता खा ली। इसके कारण सोज साहिब का दर्द जा नहीं रहा, बल्कि बढ़ता ही जा रहा है,  क्योंकि वह तो कश्मीर की आजादी चाहते हैं या फिर परवेज मुशर्रफ वाली स्वायत्तता। प्रश्न है कि इसके बावजूद वे कांग्रेस में क्या कर रहे हैं? या फिर सभी कांग्रेसियों को बेपर्दा कर देने वाले सैफुद्दीन सोज को, पार्टी ने अभी तक भी क्यों सहेज कर रखा हुआ है? अलबत्ता सोज ने यह नहीं कहा कि कांग्रेस में छोटे लोग कौन थे, जिन्होंने कश्मीर के मसले पर नेहरू को आगे नहीं बढ़ने दिया। सोज साहिब को पूरा यकीन है कि यदि छोटे और तुच्छ मन वाले कांग्रेसी नेहरू को न रोकते, तो नेहरू कश्मीर को परवेज मुशर्रफ वाली स्वायत्तता जरूर दे देते। वह शायद आज की आजादी से भी बड़ी होती, क्योंकि भारत वाली स्वायत्तता और परवेज मुशर्रफ वाली स्वायत्तता बराबर तो हो नहीं सकती। सोज की बात में दम है नेहरू की चलती, तो कश्मीर घाटी को परवेज मुशर्रफ वाली स्वायत्तता मिल जाती और यदि पटेल की चलती, तो कश्मीर को पाकिस्तान वाली आजादी मिल जाती। सोज दोनों विकल्पों से प्रसन्न थे, लेकिन खुदा गारत करें उन छोटे मन के कांग्रेसियों को जिन्होंने कश्मीर को लेकर पाकिस्तान की ओर जाता हुआ नेहरू का रथ रोक लिया और उस मुए लियाकत अली खां का क्या, जिसने कश्मीर पाकिस्तान को देने का पटेल का प्रस्ताव ठुकरा दिया। सोज ने बस इतना नहीं कहा कि लियाकत अली खां की उसके कुछ अरसा बाद ही किसी ने गोली मार कर हत्या कर दी।

यह प्रस्ताव ठुकरा देने का ही खुदाई दंड था, लेकिन कश्मीर की जो वर्तमान हालत बनी हुई है, वह नेहरू की कश्मीर नीति के कारण ही तो बनी हुई है। यदि नेहरू को अपनी कश्मीर नीति को आगे बढ़ाने का अवसर मिल जाता, तब तो वह शायद उसे पाकिस्तान के दरवाजे पर छोड़ ही आते। कश्मीर को लेकर सही नीति क्या हो सकती थी, कश्मीर को भारत में रहने देना या उसे पाकिस्तान की कलगी में लगा देना? शायद सोज 2018 में खुलकर दूसरे विकल्प के पक्ष में खड़े नहीं हो सकते थे। इसलिए उन्होंने सरदार पटेल का सहारा लिया।

उन्होंने कहा सरदार पटेल व्यावहारिक और अकलमंद आदमी थे। उन्होंने लियाकत अली खान को कहा था कि आप कश्मीर ले लो। सोज साहिब की दाद देनी पड़ेगी कि उन्होंने कांग्रेस में रहते हुए भी नेहरू और पटेल दोनों को ही बेपर्दा कर दिया। सोज खुद भी अकलमंद हैं। इसलिए अपनी पुस्तक-‘कश्मीर ग्लिम्पसेज ऑफ हिस्ट्री एंड दि स्टोरी ऑफ स्ट्रगल’ के विमोचन के अवसर पर अपने साथ गवाह भी ले गए थे। यह गवाह थे बुजुर्गवार कुलदीप नैयर। नैयर साहिब ने सोज के इस बयान के पक्ष में खड़े होकर गवाही दी कि उन्हें लाल बहादुर शास्त्री ने बताया था कि सरदार पटेल कश्मीर पाकिस्तान को देना चाहते थे। कश्मीर को लेकर यह कांग्रेस का नया विजन है जिसे उनके वरिष्ठ नेता प्रो. सैफुद्दीन सोज ने अपनी नई किताब में प्रस्तुत किया है। कांग्रेसियों की एकता की दाद देनी पड़ेगी कि किसी एक कांग्रेसी ने भी यह मांग नहीं की कि सोज को कांग्रेस से निकाल देना चाहिए ।

ई-मेलः kuldeepagnihotri@gmail.com

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