राहुल गांधी और दिल्ली का नरसंहारक

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री

लेखक, वरिष्ठ स्तंभकार हैं

दिल्ली में यह नरसंहार कांग्रेस पार्टी द्वारा बाबर से लाए गए अपराधियों एवं बदमाशों ने किया, जिनका नेतृत्व कांग्रेस के उस समय के कुछ जाने-माने नेता कर रहे थे। उन पर अभी भी न्यायालयों में मुकद्दमे चल रहे हैं। जनता के भारी दबाव के चलते सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनमोहन सिंह ने प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से इसके लिए क्षमा याचना भी की। यदि कांग्रेस की इस नरसंहार में कोई भूमिका थी ही नहीं, तो आखिर ये दोनों किस काम के लिए देश से क्षमा याचना की मुद्रा में खड़े थे…

पिछले दिनों सोनिया कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी अपने विदेश दौरे पर थे। वे कई देशों में गए और वहां अनेक स्थानों पर उन्होंने भाषण इत्यादि भी दिए और कुछ समूहों से गपशप भी की। ज्यादातर भाषण वह भारत की स्थानीय राजनीति को लेकर ही करते रहे। इसलिए वहां के मीडिया ने इसका बहुत ज्यादा नोटिस नहीं लिया, लेकिन क्योंकि उनके भाषण हिंदुस्तान की आंतरिक राजनीति को लेकर थे, इसलिए यहां के मीडिया ने उसका नोटिस लेना ही था। जर्मनी में उन्होंने कहा कि 1984 में इंदिरा गांधी की जघन्य हत्या के बाद दिल्ली में जो अमानवीय नरसंहार हुआ था, उसमें कांग्रेस का कोई हाथ नहीं था। 1984 के इस सुनियोजित नरसंहार में हजारों लोगों की नृशंस हत्या कर दी गई थी। 1947 के भारत विभाजन के बाद बहुत से पंजाबी पाकिस्तान के पास चले गए पश्चिमी पंजाब से उजड़ कर दिल्ली में आ बसे थे। उस समय दिल्ली से मुसलमान पाकिस्तान जा रहे थे, इसलिए उनके घरों में ये पंजाबी आश्रय ले रहे थे। तब कांग्रेस के ही पंडित जवाहर लाल नेहरू देश के प्रधानमंत्री बने थे। तब उन्होंने पूरा प्रयास किया था कि पंजाबियों को इन मकानों में बसने न दिया जाए।

वह मुसलमानों को पाकिस्तान जाने से रोक ही नहीं रहे थे, बल्कि जो चले गए थे, उनको भी वापस बुलाने के प्रयास कर रहे थे। दिल्ली के उस समय के उपायुक्त मोहिंदर सिंह रंधावा और गृहमंत्री सरदार पटेल पर नेहरू यही आरोप लगाते थे कि वे दिल्ली से मुसलमानों को निकालकर पश्चिमी पंजाब से आए पंजाबियों को बसा रहे हैं। लेकिन इन पंजाबियों की दाद देनी पड़ेगी कि उन्होंने इन विपरीत परिस्थितियों में भी जीवट और अपने परिश्रम के बलबूते अपने आप को दिल्ली में स्थापित किया। 1947 की उस त्रासदी के सत्ताईस साल बाद 1984 में इनको एक बार फिर उसी त्रासदी का सामना करना पड़ा। इंदिरा गांधी की हत्या का बदला आम आदमी से लेने की कांग्रेस की इस घटिया मानसिकता ने हजारों हत्याएं करवा दीं। इतना ही नहीं, इस पर शर्मिंदा होने की बजाय उसका तार्किक आधार प्रस्तुत करना शुरू कर दिया। इंदिरा जी के सुपुत्र राजीव गांधी ने उस समय यह कहकर सब को चौंका दिया था कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है, तो धरती हिलती ही है। कांग्रेस ने उस समय जो धरती हिलाई उसमें हजारों लोग समा गए। अब राहुल गांधी कह रहे हैं कि इस धरती हिलाने में पार्टी का कुछ लेना-देना नहीं था। यदि कुछ लेना-देना नहीं था, तो आखिर दिल्ली में इन लोगों को कौन मार गया? मारने वाले हिंदू तो हो नहीं सकते, क्योंकि यदि यह हिंदू-सिख विवाद होता, तो पंजाब में जब आतंकवाद चरम सीमा पर था, तब हिंदू-सिख दंगे होने चाहिए थे। लेकिन आतंकवाद के इतने लंबे दौर में पंजाब में एक बार भी हिंदू-सिख दंगा नहीं हुआ। पंजाबियों में तमाम प्रकार की देशी-विदेशी राजनीतिक साजिशों के बावजूद कोई हिंदू-सिख विवाद नहीं है। दिल्ली में यह नरसंहार कांग्रेस पार्टी द्वारा बाबर से लाए गए अपराधियों एवं बदमाशों ने किया, जिनका नेतृत्व कांग्रेस के उस समय के कुछ जाने-माने नेता कर रहे थे। उन पर अभी भी न्यायालयों में मुकद्दमे चल रहे हैं। जनता के भारी दबाव के चलते सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनमोहन सिंह ने प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से इसके लिए क्षमा याचना भी की। यदि कांग्रेस की इस नरसंहार में कोई भूमिका थी ही नहीं, तो आखिर ये दोनों किस काम के लिए देश से क्षमा याचना की मुद्रा में खड़े थे? यह देश का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि कांग्रेस लंबे अरसे से केवल सत्ता में बने रहने की खातिर विभिन्न वर्गों को एक-दूसरे से लड़ाने की भूमिका में उतर आई है।

इंदिरा गांधी की नृशंस हत्या के बाद राजनीतिक फायदे के लिए सहानुभूति की लहर पैदा करने के लिए हजारों लोगों को देश की राजधानी दिल्ली में मरवा देना राक्षसीय मानसिकता ही कही जा सकती है। यदि कांग्रेस का सचमुच इस नरसंहार में हिस्सा नहीं था, तो पार्टी सज्जन सिंह और जगदीश टाइटलर जैसे वरिष्ठ कांग्रेसियों को बाहर का रास्ता क्यों नहीं दिखाती, जिन पर इस नरसंहार में सक्रिय भागीदारी के आरोप लगे हैं। दिल्ली का नरसंहार भी देश के टुकड़े करने की गहरी साजिश का एक हिस्सा था, जिसमें बहुत साल बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में भारत तेरे टुकड़े होंगे हजार,  इंशा अल्लाह, इंशा अल्लाह वाले अभियान के समर्थन में हाजिर होकर राहुल गांधी ने कांग्रेस और अपनी भूमिका अदा की।

ई-मेलः kuldeepagnihotri@gmail.com

You might also like