खेल मिटा सकता है नशे की आदत

Feb 8th, 2019 12:07 am

भूपिंदर सिंह

राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक

हमें अपने बच्चों को नशेड़ी बनाना है या भविष्य के अच्छे नागरिक,  इसके लिए हमें आज ऐसे स्कूलों की जरूरत है जहां अच्छी पढ़ाई के साथ विद्यार्थी के स्वास्थ्य के लिए फिटनेस कार्यक्रम भी हो। विकसित देशों के स्कूलों में स्वास्थ्य शिक्षा के शिक्षक हर विद्यार्थी तक पहुंच कर उसकी सामान्य फिटनेस सुनिश्चित करते हैं। हर मां-बाप व स्कूल को अपने यहां सामान्य फिटनेस के लिए वातावरण तैयार करना होगा। विद्यार्थी की रुचि के अनुसार स्कूल में शारीरिक क्रियाओं को करवाकर भविष्य के फिट नागरिक देश को देने होंगे…

हिमाचल प्रदेश वर्षों से काले सोने के लिए बदनाम रहा है। मगर अब तो सफेद हीरे ने हिमाचल प्रदेश के युवाओं के साथ-साथ किशोरों को भी अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। इसके भयंकर परिणाम भी सामने आने शुरू हो गए हैं। आज के समय में जब घर गांव में खेती खत्म हो चुकी है, विद्यार्थी घर से लेकर स्कूल तक वाहन से आ-जा रहा है, ऐसे में उसकी शारीरिक क्रिया नहीं हो पा रही है व उसका शारीरिक विकास बाधित हो रहा है, ऊपर से नशे के सौदागर घात लगाए बैठे हैं। आज प्रदेश के कुछ अंगुलियों पर गिनने वाले स्कूलों को छोड़कर कहीं भी विद्यार्थी की सामान्य फिटनेस का कोई भी लगातार कार्यक्रम नहीं है। जैसे जीवन में भाषा, अंक व सामान्य ज्ञान सीखने की एक निश्चित उम्र होती है, उसी तरह हमारे शारीरिक विकास की भी जीवन में तय अवधि होती है।

प्राचीनकाल में भारत के गुरुकुलों में शारीरिक व मानसिक दोनों तरह की शिक्षाओं पर बराबर जोर दिया जाता था और सच भी यही है कि शिक्षा का अर्थ मानव का शारीरिक व मानसिक विकास है, जिसके बल पर वह जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सफलतापूर्वक मुकाबला कर जीवन को खुशी व सम्मान से जीता है। हिमाचल प्रदेश में पहाड़ी इलाका होने के कारण यहां पर विभिन्न खेलों के लिए प्ले फील्ड भी उपलब्ध नहीं है। स्कूलों के पास सवेरे की प्रार्थना सभा करने के लिए भी पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है। स्कूलों के पास जब शारीरिक क्रियाओं के लिए स्थान नहीं होगा तो फिर फिटनेस के लिए अलग तरह से भी सोचना पड़ेगा, नहीं तो नशे के सौदागर आसानी से विद्यार्थियों तक पहुंच जाएंगे।

बढ़ती उम्र में हर किशोर से लेकर युवा तक अपने शरीर को सुंदर व सुडौल बनाने का शौक होता है, मगर जब उसे उसका संपूर्ण ज्ञान ही नहीं होगा तो वह फिर भटक कर बुरी आदतों की तरफ झुकता चला जाता है। इसलिए हर अभिभावक के साथ-साथ हर स्कूल का भी दायित्व बनता है कि वह हर एक बढ़ती उम्र के बच्चों को शारीरिक फिटनेस के लिए उचित वातावरण दे। फिटनेस केवल सेना व सुरक्षा बलों में जाने वाले युवाओं के लिए ही जरूरी है यह सोच भी हमें हर उस किशोर व युवा के साथ अन्याय करने को बढ़ावा देती है जो अपना संपूर्ण शारीरिक विकास नहीं कर पाता है। आज जब हमारे आसपास विभिन्न प्रकार के नशे आसानी से उपलब्ध हैं, ऐसे में अपने विद्यार्थी बच्चों की चिंता हर अभिभावक को सता रही है। खेल मैदान एक ऐसा माध्यम है जहां हर बच्चे को उसके स्वास्थ्य के बारे में जागरूक कर उसे सामान्य फिटनेस भी प्रदान करते हैं। आज जब पूरी तरह भागदौड़ का युग है अधिकतर नौकरियां निजी क्षेत्र में जा रही हैं। सरकारी क्षेत्र में नौकरियां दिन-प्रतिदिन घट रही हैं। अधिक युवा तकनीकी, चिकित्सा, प्रबंधन व अन्य क्षेत्रों में पढ़ाई कर जब शिक्षा संस्थान से बाहर निकलते हैं तो उन्हें जहां भी नौकरी मिले वहां अपना अधिक से अधिक समय देकर स्वयं को सिद्ध करना होता है। सरकारी क्षेत्र में तो एक बार नौकरी मिल जाती है तो पूरी उम्र को आर्थिक सुरक्षा मिल जाती है, मगर निजी क्षेत्र में नौकरी बनाए रखने के लिए लगातार फिटनेस की बेहद जरूरत होती है। हम फिट तभी रह सकते हैं, जब बचपन से किशोर अवस्था में सामान्य फिटनेस के लिए जरूरी घटकों स्पीड, स्ट्रैंथ व इंडोरेंस को प्रारंभिक स्तर पर विभिन्न शारीरिक क्रियाओं द्वारा विकसित किया हो। दशकों पूर्व यह सारा कार्यक्रम स्वयं ही हो जाता था। घर में बच्चा अपने मां-बाप के साथ काम में हाथ बंटाता था, पैदल स्कूल जाता और घर आता था। हिमाचल में सड़कों की कमी होने के कारण अधिकतर इधर-उधर आना-जाना पैदल ही होता था। हर स्कूल में हर कक्षा के ड्रील का पीरियड होता था, उसमें हर विद्यार्थी को अनिवार्य रूप से शारीरिक क्रियाएं करनी होती थीं। आज यह सब नहीं है। इसलिए हमें अपने बच्चों की फिटनेस के बारे में चिंतित होना आवश्यक हो जाता है।

ऊपर से हर शिक्षा संस्थान के बाहर नशे की दुकान मौजूद है। हमें अपने बच्चों को नशेड़ी बनाना है या भविष्य के अच्छे नागरिक,  इसके लिए हमें आज ऐसे स्कूलों की जरूरत है जहां अच्छी पढ़ाई के साथ विद्यार्थी के स्वास्थ्य के लिए फिटनेस कार्यक्रम भी हो। विकसित देशों के स्कूलों में स्वास्थ्य शिक्षा के शिक्षक हर विद्यार्थी तक पहुंच कर उसकी सामान्य फिटनेस सुनिश्चित करते हैं। हर मां-बाप व स्कूल को अपने यहां सामान्य फिटनेस के लिए वातावरण तैयार करना होगा। विद्यार्थी की रुचि के अनुसार स्कूल में शारीरिक क्रियाओं को करवाकर भविष्य के फिट नागरिक देश को देने होंगे, साथ ही साथ शारीरिक  प्रतिभा के अति धनी विद्यार्थियों को भविष्य के स्टार राष्ट्रीय  व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी भी बनाना होगा। तीसरा विश्व युद्ध अब हथियारों से नहीं फिटनेस से लड़ा जाएगा, जो प्रौद्योगिकी से लेकर खेल के मैदान तक नजर आएगी। अगर बच्चों को आज नशे से बचाकर फिट बनाना है तो उन्हें खेल मैदान भेजना होगा।

ई-मेल : bhupindersinghhmr@gmail.com

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-संपादक

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