पर्यटन अवसर खो रहा हिमाचल

प्रो. एनके सिंह

अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन सलाहकार

हिमाचल में इस समय प्रति वर्ष पर्यटन से पांच हजार करोड़ रुपए की आय हो रही है। इसे दुगना किया जा सकता है। इसी तरह प्रति वर्ष हिमाचल आने वाले यात्रियों का आंकड़ा अभी 151 लाख है, इसे भी दोगुना किया जा सकता है। हिमाचल के सकल घरेलू उत्पाद में पर्यटन का योगदान मात्र 10 फीसदी है जो व्यापक पर्यटन संभावना वाले राज्य के लिए एक छोटी सी बात है। हिमाचल में चूंकि कई पर्यटक आकर्षण हैं, इसलिए भविष्य के लिए यह टारगेट 20 फीसदी होना चाहिए। प्रदेश के लिए जब भी हम पर्यटन का नया प्लान बनाएंगे तो हमारा फोकस व चिंता का केंद्र राज्य की प्रकृति का संरक्षण होना चाहिए। हमें राज्य में पर्यटन गतिविधियों के स्वागत के लिए पर्यावरण मित्र रास्तों पर निर्भर होना चाहिए…

हिमाचल के पास एक सफल व आकर्षक पर्यटन गंतव्य के सभी उपादान मौजूद हैं, लेकिन एक के बाद एक, सभी सरकारें इसकी सामर्थ्य को भुनाने में विफल रही हैं। सुगम्यता में व्यापक अवरोध, पर्याप्त रेल पटरियों की गैरमौजूदगी, कमजोर नागरिक उड्डयन विकास तथा खस्ताहाल सड़कों ने राज्य में पर्यटन विकास की गति को मंद करने में योगदान दिया है। इसके कारण राज्य स्थायी रूप से फंड के लिए केंद्र व अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों पर निर्भर बना हुआ है। हम बार-बार ऋण तथा अनुदान के लिए भीख का कटोरा लिए केंद्र के दरवाजे पर दौड़े रहते हैं। हिमाचल सरकार के पास साफ तौर पर सृजनात्मकता तथा कल्पनाशीलता का अभाव है। अगर हम इंडियन रेलवे टूरिज्म कारपोरेशन की ओर से आफर किए जा रहे पैकेज को देखते हैं तो न केवल रेल से, बल्कि बसों का प्रयोग करके भी इस तरह का आतिथ्य हो सकता है क्योंकि कारपोरेशन भारत में सैर-सपाटे का आनंद लेने के लिए बहुत ही आकर्षक पेशकश उपलब्ध करवा रही है। यहां तक कि कारपोरेशन हिमाचल को भी कवर कर रही है जहां वह न्यूनतम रेल सेवाएं दे रही है। हाल में मैं अपने एक भतीजे से मिला जिसने रेलवे के ऐसे पैकेज के तहत एक टूर पूरा किया। इसके तहत दक्षिण के अधिकतर मंदिरों को कवर किया गया। वह यह देखकर काफी खुश हुआ कि रेलवे द्वारा इस तरह के कम खर्चीले टूर पैकेज उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।

मैंने कारपोरेशन की वेबसाइट देखी तथा वहां कई ऐसे टूरिज्म पैकेज मुझे मिले जो रेलगाड़ी का सबसे बेहतर सदुपयोग सुनिश्चित बनाते हैं तथा साथ ही देश के मल्टीपल डेस्टीनेशन तक पहुंच बनाते हैं। उसे इस बात पर हैरानी हुई कि हिमाचल पथ परिवहन निगम इस तरह के टूरिज्म पैकेज की पेशकश क्यों नहीं करता है? वास्तव में यहां छात्रावासों व अतिथि गृहों समेत इतनी अधिक सुविधाएं हैं कि इनका बेहतर सदुपयोग किया जा सकता है तथा राजस्व कमाया जा सकता है। हिमाचल में पर्यटन पैकेज के नाम पर क्या हो रहा है, यहां केवल सैर-सपाटे व होटल की व्यवस्था है, रेलवे की तरह उसने वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रबंध नहीं किए हैं जो सो सकते हैं तथा शौचालयों का प्रयोग कर सकते हैं और कम खर्च पर धार्मिक यात्राएं  कर सकते हैं तथा दृश्यावलियों को देखने का भी प्रबंध है। रेलवे पूरी तरह से धार्मिक यात्रियों की देखभाल करता है तथा गाइड व अच्छे सेवा प्रदाताओं की भी व्यवस्था है। करीब छह वर्ष पहले मसरूर मंदिर को रीडिस्कवर करती मेरी पुस्तक ‘कोरोनेशन आफ शिवा’ का तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने विमोचन किया था। पत्थरों की नक्काशी करके बनाया गया मसरूर का यह मंदिर देश के चार ऐसे मंदिरों में से एक है तथा विश्व विरासत का दर्जा हासिल करने के लिए दावेदार है। मैंने नूरपुर-मसरूर-ज्वालामुखी-चिंतपूर्णी तथा शिव मंदिर को जोड़ते हुए इस पुरातात्त्विक महत्त्व के क्षेत्र को विकसित करने के लिए एक योजना का सुझाव दिया था। यह कलस्टर एक आकर्षक पैकेज हो सकता है बशर्ते हम पौंग झील में नौकायन व पक्षी देखने की व्यवस्था को जुटा कर एक कल्पनात्मक योजना बना लें। इस परियोजना को एशियाई विकास बैंक तथा सरकार का समर्थन भी मिला था। लेकिन दुर्भाग्य से इस दिशा में कुछ भी सकारात्मक नहीं हुआ तथा इतने वर्षों में मसरूर में एक कैफेटेरिया तथा वाशरूम सुविधा, जैसी कि मैंने सलाह दी थी, को भी उपलब्ध नहीं कराया गया। पौंग झील में जल क्रीड़ाएं, फिशिंग तथा नौकायन शुरू करने की व्यापक संभावनाएं हैं। लेकिन यह सब कुछ भी धुंधली स्थिति में है क्योंकि यहां पर कोई वाशरूम भी बढि़या स्थिति में नहीं है। हिमाचल सरकार मसरूर मंदिर को विकसित कर इसे विश्व धरोहर बनाने के प्रति गंभीर नहीं है।

वास्तव में मेरी किताब के प्रकाशन व अनुसंधान से पहले थोड़े लोग ही मंदिर के बारे में तथ्यों को लेकर जागरूक थे। वास्तव में मंदिर को समूह कार्यक्रमों की जरूरत है, न कि अप्रशिक्षित गाइडों की। मैंने सरकार को पेशकश की थी कि वह मसरूर मंदिर के विकास के लिए मेरी किताब को प्रोमोशन के रूप में प्रयोग करे, किंतु इस दिशा में कुछ भी नहीं हुआ। मैं हिमाचल के नए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का ध्यान इस ओर दिलाना चाहता हूं तथा उनसे आग्रह करता हूं कि वह पर्यटन योजना के विकास का मसला रेलवे के समक्ष रखें तथा हिमाचल सरकार की ओर से इसका संचालन करें। हिमाचल में इस समय प्रति वर्ष पर्यटन से पांच हजार करोड़ रुपए की आय हो रही है। इसे दुगना किया जा सकता है। इसी तरह प्रति वर्ष हिमाचल आने वाले यात्रियों का आंकड़ा अभी 151 लाख है, इसे भी दोगुना किया जा सकता है। हिमाचल के सकल घरेलू उत्पाद में पर्यटन का योगदान मात्र 10 फीसदी है जो व्यापक पर्यटन संभावना वाले राज्य के लिए एक छोटी सी बात है।

हिमाचल में चूंकि कई पर्यटक आकर्षण हैं, इसलिए भविष्य के लिए यह टारगेट 20 फीसदी होना चाहिए। प्रदेश के लिए जब भी हम पर्यटन का नया प्लान बनाएंगे तो हमारा फोकस व चिंता का केंद्र राज्य की प्रकृति का संरक्षण होना चाहिए। हमें राज्य में पर्यटन गतिविधियों के स्वागत के लिए पर्यावरण मित्र रास्तों पर निर्भर होना चाहिए।

ई-मेल : singhnk7@gmail.com

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