वाराणसी में चंदन की खुशबू

प्रो. एनके सिंह

अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन सलाहकार

कुछ ऐसे भी आलोचक हैं जो कहते हैं कि गंगा अभी भी साफ नहीं है तथा न ही वह गंदगी से मुक्त है। यह सत्य है कि गंगा का पानी धीरे-धीरे साफ हो रहा है, किंतु यह पूरी तरह साफ नहीं है क्योंकि अभी इस दिशा में बहुत कुछ किया जाना शेष है। गंगा को दूषित किए जाने का काम बहुत वर्षों से चल रहा है तथा इसे रोकने के लिए मोदी से पहले किसी ने कोई प्रयास नहीं किया। गंगा को जो स्रोत गंदा कर रहे हैं, उन्हें रोकने का काम धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। जब आप स्थानीय अखबारों पर नजर डालते हैं तो पहले पृष्ठ पर रोचक समाचार देखने को मिलते हैं, जैसे बाहुबली इन दिनों नाखुश हैं क्योंकि उन्हें किसी भी राजनीतिक दल ने घास नहीं डाली। योगी सरकार के कड़े रुख के कारण अब स्थिति बदल गई है, गुंडाराज फैलाने वालों को निशाना बनाया जा रहा है, कानून व व्यवस्था की स्थिति सुधर गई है तथा भाड़े के बदमाशों के पास अब कोई काम शेष नहीं रहा है…

दिल्ली से वाराणसी की यात्रा करना धर्मनिरपेक्ष राजधानी से भारत की आध्यात्मिक राजधानी में बदलाव जैसा है। गंगा नगरी की एक घंटे की उड़ान न केवल आध्यात्मिक राजधानी की यात्रा जैसी है, बल्कि यह शहर आजकल राजनीति का केंद्र भी बना हुआ है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहीं से आगामी लोकसभा चुनाव की लड़ाई में हिस्सेदारी कर रहे हैं। राजनेताओं के पुरोधा तथा एक ऐसे राजनेता जिन्होंने भारत में कई युगांतरकारी बदलाव किए हैं, उनके खिलाफ अभी तक किसी ने चुनाव मैदान में आने की घोषणा करने का साहस नहीं जुटाया है। मैं गंगा की यात्रा बार-बार करना पसंद करता हूं क्योंकि मेरा इससे पहले से संबंध रहा है। पिछली शताब्दी के आठवें दशक में मैंने गंगोत्री से गोमुख की यात्रा की थी। इससे पहले मैंने देहरादून से यात्रा की थी जहां से भारतीय सैन्य अकादमी से मेरे बेटे ने ग्रेजुएशन की थी। इससे मुझमें जीवन के एक दायित्व की पूर्णता का भाव पैदा हुआ। आज काशी में सन्नाटा नहीं है, बल्कि यह श्रद्धालुओं से सराबोर है तथा साथ ही राजनीतिक कार्यकर्ताओं का जमावड़ा भी यहां देखा जा सकता है क्योंकि इसी महान नगरी से मोदी चुनाव लड़ने जा रहे हैं। वह यहां से चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं। आज काशी में चारों ओर चंदन की खुशबू महसूस की जा सकती है।

वाराणसी शहर पांच साल के निरंतर विकास तथा प्रधानमंत्री द्वारा लाए गए बदलावों के बाद कैसा लगता है? सात साल पहले जब मोदी ने बदलाव की प्रक्रिया शुरू नहीं की थी, मैं सैकड़ों छात्रों को अस्सी घाट लेकर गया था। हमने इसके किनारों को स्वयंसेवी के रूप में साफ किया था। हम केवल यह दिखाना चाहते थे कि नदी को साफ रखने का दायित्व नागरिकों का भी है। आज ये घाट दिखने में पहले से ज्यादा साफ व सुंदर हैं। रोड भी पहले से ज्यादा हैं तथा अच्छी स्थिति में हैं और फ्लाईओवर के साथ रिंग रोड ने नागरिकों को पहले से ज्यादा राहत दी है। काशी विश्वनाथ मंदिर के लिए एक कॉरिडोर बनाया जा रहा है जिससे इस प्रसिद्ध मंदिर को पहुंच और आसान हो जाएगी। पूरा शहर, एयरपोर्ट तथा सार्वजनिक स्थलों में अब बेहतर प्रबंधन है तथा ये पहले से ज्यादा साफ हैं। कुछ ऐसे भी आलोचक हैं जो कहते हैं कि गंगा अभी भी साफ नहीं है तथा न ही वह गंदगी से मुक्त है। यह सत्य है कि गंगा का पानी धीरे-धीरे साफ हो रहा है, किंतु यह पूरी तरह साफ नहीं है क्योंकि अभी इस दिशा में बहुत कुछ किया जाना शेष है। गंगा को दूषित किए जाने का काम बहुत वर्षों से चल रहा है तथा इसे रोकने के लिए मोदी से पहले किसी ने कोई प्रयास नहीं किया। गंगा को जो स्रोत गंदा कर रहे हैं, उन्हें रोकने का काम धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। जब आप स्थानीय अखबारों पर नजर डालते हैं तो पहले पृष्ठ पर रोचक समाचार देखने को मिलते हैं, जैसे बाहुबली इन दिनों नाखुश हैं क्योंकि उन्हें किसी भी राजनीतिक दल ने घास नहीं डाली। वाराणसी और राज्य के कई अन्य शहर अब तक भाड़े के बदमाशों से संचालित होते रहे हैं। चुनावों में खड़े प्रत्याशी भी उनकी सहायता लिया करते थे। योगी सरकार के कड़े रुख के कारण अब स्थिति बदल गई है, गुंडाराज फैलाने वालों को निशाना बनाया जा रहा है, कानून व व्यवस्था की स्थिति सुधर गई है तथा भाड़े के बदमाशों के पास अब कोई काम शेष नहीं रहा है। वाराणसी में वर्तमान चुनाव में मोदी की संभावनाओं पर चर्चा करने का कोई भी इच्छुक नहीं लगा क्योंकि अधिकतर लोग मोदी की जीत को लेकर विश्वस्त लगते हैं। उनके खिलाफ विपक्ष के किसी साझा प्रत्याशी की घोषणा भी अभी तक नहीं हुई है। किंतु अधिकतर लोग राज्य के अंतिम चुनाव परिणाम को लेकर उत्सुक नजर आए। भाजपा के प्रति पूरी तरह कटिबद्ध लोग भी निजी रूप से यह स्वीकार कर रहे हैं कि बसपा व सपा के साथ आने के कारण भाजपा को कुछ सीटों का नुकसान जरूर होगा।

लोग अनुमान लगा रहे हैं कि अंतिम चुनाव परिणाम में भाजपा को 10 से 15 सीटों का नुकसान होगा। ये सीटें इस संयुक्त विपक्ष को मिलने जा रही हैं। इसका मतलब यह है कि भाजपा तथा उसके सहयोगी दलों को राज्य में 55 से 60 सीटें मिलने की संभावना है। इसके बावजूद इस राज्य में एनडीए को सर्वाधिक सीटें अभी भी मिल सकती हैं। राज्य में कांग्रेस ने हालांकि अपने दो बड़े नेताओं को चुनाव प्रचार में जोर-शोर से लगा दिया है, किंतु उसकी संभावनाएं ज्यादा नहीं लगती हैं और पार्टी को महज दो से तीन सीटें मिल सकती हैं। वाराणसी से जब कोई दिल्ली लौटता है तो वहां के विविध क्लबों में चुनाव के बाद की देश की अंतिम तस्वीर पर चर्चा मुख्य रूप से होती है। लोग अनुमान लगा रहे हैं कि एनडीए को 200 से 300 सीटें मिल सकती हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के एक प्रवक्ता त्रिपाठी जी ने जोर देकर यह बात कही है कि भाजपा को 200 से ज्यादा सीटें मिलने वाली नहीं हैं। मेरे विचार में यह मूल्यांकन पार्टी के नजरिए से किया गया है और एनडीए को वर्तमान में जितनी सीटें मिली हुई हैं, उससे कुछ कम सीटें इस बार मिल सकती हैं।

वैसे अंतिम मूल्यांकन मैं शीघ्र ही आगामी विश्लेषण करके आपके सामने रखूंगा। वाराणसी और दिल्ली में मैं जितने भी विश्लेषकों से मिला, उनका मत यह था कि चुनाव परिणाम में चाहे कुल सीटों का अंतिम परिणाम कुछ भी रहे, किंतु यह जरूर लगता है कि एनडीए ही केंद्र में सरकार बनाएगा। इस अनुमान के बाद अंतिम परिणाम क्या रहता है, इसके लिए हमें अभी और एक पखवाड़े का इंतजार करना होगा।

ई-मेल ः singhnk7@gmail.com

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