कालेज स्तर पर खिलाडि़यों को सहयोग

Jun 28th, 2019 12:06 am

भूपिंदर सिंह

राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक

 

 

प्रदेश में इस समय काफी निजी कालेज हैं, उन्हें भी हिमाचल के विद्यार्थी खिलाडि़यों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाना चाहिए। प्रदेश के सरकारी कालेजों के प्राचार्यों व शारीरिक शिक्षा के प्राध्यापकों को चाहिए कि वे अपने-अपने कालेजों में खेल प्रशिक्षण सुविधा के अनुसार उस खेल को विकसित करें। कालेज के अन्य प्राध्यापकों को भी चाहिए कि वे खिलाडि़यों को प्रोत्साहित करें। अधिकतर देखा गया है कि अन्य विषयों के प्राध्यापक खिलाड़ी विद्यार्थियों को प्रताडि़त करते हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग भी कालेज प्राध्यापकों को किसी एक खेल या युवा गतिविधि को बढ़ावा देने की बात करता है। प्राचार्य व शारीरिक शिक्षा के प्राध्यापक को चाहिए कि वे स्थानीय प्रशिक्षकों या पूर्व राष्ट्रीय खिलाडि़यों को अपने यहां बुलाकर खेलों को बढ़ावा दें, क्योंकि कालेज स्तर से ही पूरे विश्व में खिलाड़ी प्रशिक्षण प्राप्त कर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करता है..

खेलें शिक्षा से जुड़ा हुआ विषय है। खेलें सामान्य फिटनेस के लिए सबसे रोचक व आसान माध्यम हैं। शिक्षा का अर्थ जब मानव का संपूर्ण मानसिक व शारीरिक विकास है, तो फिर इस शारीरिक विकास के लिए खेलें हर एक विद्यार्थी के लिए जरूरी हो जाती हैं। जब हर विद्यार्थी फिट होगा, तो उनमें से शारीरिक प्रतिभा के धनी खिलाड़ी भी आसानी से मिल जाएंगे। स्कूली स्तर पर खिलाड़ी विद्यार्थियों के लिए स्कूली खेल छात्रावासों के साथ-साथ राज्य व भारतीय खेल प्राधिकरण के प्रशिक्षण केंद्र भी राज्य में कई खेलों के लिए दो-तीन जगह उपलब्ध हैं। जब विद्यार्थी स्कूली पढ़ाई कर कालेज में पहुंचता है, तो उस समय उसे और अधिक खेल सुविधाओं की जरूरत होती है। हिमाचल प्रदेश में खेलों के लिए कालेज स्तर पर जो कुछ भी हो पाया है, उसमें उन कालेजों के तत्कालीन प्राचार्य व शारीरिक शिक्षकों का बहुत योगदान रहा है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले महाविद्यालयों में खेल छात्रावासों के कारण धर्मशाला, बिलासपुर, ऊना के सरकारी कालेजों में कई खेलों का दबदबा कायम है। एथलेटिक्स सभी खेल छात्रावासों में हैं, मगर हमीरपुर के सरकारी कालेज का दबदबा सब पर भारी है।

तीन दशक पहले तक यह कालेज कभी भी हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय एथलेटिक्स प्रतियोगिता नहीं जीत पाया था, मगर 1988 में पहली बार निजी प्रयासों से यहां प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ और बाद में डाक्टर ओपी शर्मा जो तत्कालीन प्राचार्य थे, उनके सहयोग से जूडो सहित और अन्य खेलों के निजी प्रशिक्षकों को कालेज बुलाकर प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करवाया। उसी के कारण यह कालेज कई बार आगे चलकर प्रदेश विश्वविद्यालय की ऑल ओवर ट्रॉफी का विजेता भी बना।

इसी तरह सुंदरनगर के एमएलएसएम कालेज में प्राचार्य डाक्टर सूरज पाठक तथा शारीरिक शिक्षक डाक्टर पद्म सिंह गुलेरिया के प्रयत्नों से मुक्केबाजी सहित अन्य खेलों में प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ, जो आगे चलकर प्रदेश व देश को मिले कई बेहतरीन मुक्केबाजों की नर्सरी बना। मुक्केबाजी प्रशिक्षक नरेश कुमार के कई शिष्य आज राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता हैं। निजी महाविद्यालयों में डीएवी कांगड़ा ने तीन दशक पूर्व कई खेलों के खिलाडि़यों को गोद लिया, बाद में जहां केवल बास्केटबाल पर काफी काम हुआ। स्वर्गीय मनोज ‘मनू’ की टीम दशक से अधिक वर्षों तक विजेता रही। भटोली कालेज ने भी कई खिलाडि़यों को सुविधा दी, मगर आज वहां पर भी सरकारी तंत्र के बाद सब खत्म हो चुका है। प्रशिक्षकों व खेल मौहल के कारण मंडी व नाहन में भी खेलों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलता रहा है। आज प्रदेश में शिमला विश्वविद्यालय के अंतर्गत सौ से भी अधिक कालेज संबद्ध हैं, मगर अंतर महाविद्यालय खेलों में एक-चौथाई ही हिस्सा ले पाते हैं। इस समय निजी कालेजों में हमीरपुर का गौतम कालेज समूह हिमाचल के खिलाडि़यों के लिए अच्छी सुविधा देकर स्तरीय मंच उपलब्ध करवा रहा है। इस कालेज समूह के प्राचार्य डाक्टर रजनीश गौतम उभरते हुए खिलाड़ी विद्यार्थियों की फीस माफी से लेकर प्रशिक्षण सुविधा देकर हिमाचल की खेलों को गति दे रहे हैं। प्रदेश में इस समय काफी निजी कालेज हैं, उन्हें भी हिमाचल के विद्यार्थी खिलाडि़यों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाना चाहिए। प्रदेश के सरकारी कालेजों के प्राचार्यों व शारीरिक शिक्षा के प्राध्यापकों को चाहिए कि वे अपने-अपने कालेजों में खेल प्रशिक्षण सुविधा के अनुसार उस खेल को विकसित करें।

कालेज के अन्य प्राध्यापकों को भी चाहिए कि वे खिलाडि़यों को प्रोत्साहित करें। अधिकतर देखा गया है कि अन्य विषयों के प्राध्यापक खिलाड़ी विद्यार्थियों को प्रताडि़त करते हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग भी कालेज प्राध्यापकों को किसी एक खेल या युवा गतिविधि को बढ़ावा देने की बात करता है। प्राचार्य व शारीरिक शिक्षा के प्राध्यापक को चाहिए कि वे स्थानीय प्रशिक्षकों या पूर्व राष्ट्रीय खिलाडि़यों को अपने यहां बुलाकर खेलों को बढ़ावा दें, क्योंकि कालेज स्तर से ही पूरे विश्व में खिलाड़ी प्रशिक्षण प्राप्त कर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करता है। देखते हैं हिमाचल प्रदेश के कालेजों के प्राचार्य व प्राध्यापक, शारीरिक शिक्षक अपने-अपने यहां खिलाड़ी विद्यार्थियों के लिए कैसा खेल वातावरण प्रदान करते हैं, जिससे हिमाचल प्रदेश की संतानें भी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश व देश को गौरव प्रदान करें।

हिमाचली लेखकों के लिए

लेखकों से आग्रह है कि इस स्तंभ के लिए सीमित आकार के लेख अपने परिचय तथा चित्र सहित भेजें। हिमाचल से संबंधित उन्हीं विषयों पर गौर होगा, जो तथ्यपुष्ट, अनुसंधान व अनुभव के आधार पर लिखे गए होंगे।                  -संपादक

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