धर्मशाला में खेलो इंडिया अकादमी

भूपिंदर सिंह

राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक

 

हिमाचल प्रदेश में कई खेलों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधा कई जिलों में बनी हुई है। हमीरपुर तथा बिलासपुर में दो एथलेटिक्स के लिए सिंथेटिक ट्रैक है। ऊना में हाकी के लिए एस्ट्रोटर्फ बिछा है। वहां पर राज्य सरकार स्वयं या फिर केंद्र सरकार के साथ मिलकर उन खेलों को शुरू किया जाता। बिलासपुर में पहले साई के प्रशिक्षण केंद्र में एथलेटिक्स के  लड़के व लड़कियां थे, बाद में यह छात्रावास लड़कों के लिए हो गया। आज से पहले यहां एथलेटिक्स के लिए प्रशिक्षण सुविधा नहीं थी। एथलेटिक्स बंद कर दी थी। अब यहां सिंथेटिक ट्रैक बिछाया जा चुका है, साई के प्रशिक्षण केंद्र में एथलेटिक के लड़के रख लेने चाहिएं…

भारत में शिक्षा की तरह खेल भी राज्य सूची का विषय है, मगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलों का प्रतिनिधित्व प्रदेश नहीं, देश करता है। राज्य सरकार धन की कमी के कारण खेलों पर वह राशि खर्च नहीं कर पाती, जो प्रारंभिक स्तर पर जरूरी है। राज्य सरकारों के पास आज खेलों व युवा गतिविधियों के लिए अलग मंत्रालय है, मगर इस विभाग में नाममात्र के कर्मचारी हैं। भारत सरकार के पास भी आज खेलों के लिए अलग मंत्रालय है। वर्षों पहले खेल मानव संसाधन मंत्रालय के अंतर्गत आते थे। देश की खेलों के लिए उस समय राष्ट्रीय क्रीड़ा संस्थान पटियाला के माध्यम से गति दी जाती थी। राष्ट्रीय स्तर पर हुई प्रतियोगिताओं से चुने गए खिलाडि़यों की टीमों का प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय क्रीड़ा संस्थान के प्रशिक्षकों द्वारा करवाया जाता था। बाद में खेल प्रशिक्षण केंद्र योजना के अंतर्गत कनिष्ठ खिलाडि़यों के लिए अलग-अलग राज्यों में विभिन्न खेलों के खेल छात्रावास खोले गए।

पिछली मोदी सरकार ने कनिष्ठ स्तर से खिलाडि़यों का चयन कर उन्हें प्रशिक्षित करने के लिए ‘खेलो इंडिया’ अभियान चलाया है। इसके अंतर्गत स्कूली खिलाडि़यों के लिए अंडर-17 आयु वर्ग की स्पर्धाओं का आयोजन राष्ट्रीय स्तर पर किया जा रहा है। इसमें स्कूली राष्ट्रीय खेलों के पहले आठ स्थानों के व्यक्तिगत खिलाड़ी या पहली आठ टीमें, ओपन राष्ट्रीय कनिष्ठ राष्ट्रीय स्तर के पहले चार व्यक्तिगत खिलाड़ी व टीमें, जिस राज्य में खेल हो रहे हैं, उसका एक खिलाड़ी व टीम तथा अन्य तीन टीमों या व्यक्तिगत अति प्रतिभावान खिलाडि़यों को सीधा प्रवेश है। इस तरह देश की सर्वश्रेष्ठ 16 टीमों या व्यक्तिगत खेलों के खिलाडि़यों की प्रतियोगिता राष्ट्रीय स्तर पर कराई जाती है।

इसी तरह अंडर-21 आयु वर्ग के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर व अंडर 20 आयु वर्ग कनिष्ट राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता के विजेता खिलाडि़यों के लिए भी खेलो इंडिया प्रतियोगिता का आयोजन पिछले सत्र में पूना में किया गया। दोनों वर्गों से चयनित खिलाडि़यों को विभिन्न खेल अकादमियों में रखकर प्रशिक्षण दिया जाएगा। खेलो इंडिया के अंतर्गत एथलेटिक्स व कबड्डी में हिमाचल प्रदेश से खिलाडि़यों का चयन इन खेल अकादमियों के लिए हो चुका है। चंबा की सीमा जो साई के धर्मशाला खेल छात्रावास की खिलाड़ी थी, अब भोपाल में खेलो इंडिया की अकादमी में प्रशिक्षण ले रही है। इस खेलो इंडिया योजना के अंतर्गत इस योजना में चयनित होने के बाद अगले आठ वर्षों तक प्रति वर्ष सरकार तक खिलाड़ी पर लगभग आठ लाख रुपए प्रति वर्ष खर्च कर उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बनाने में सरकार अपना योगदान दे रही है। खेलो इंडिया की देश में कई जगह सुविधा के अनुसार खेल अकादमियां शुरू की गई हैं। हिमाचल प्रदेश में भी धर्मशाला के भारतीय खेल प्राधिकरण के खेल छात्रावास में कबड्डी व खो-खो के लिए इस सत्र से अकादमी शुरू की जा चुकी है। इस खेल छात्रावास में भीड़ होने के कारण खो-खो की खिलाडि़यों को बाहर किराए पर आवास सुविधा लेकर रखा जाएगा। पिछले कुछ वर्षों से धर्मशाला में राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर भी लग रहे हैं।

वे खिलाड़ी भी आवास के लिए होटलों का सहारा ले रहे हैं। इस असुविधा को देखते हुए धर्मशाला में बड़ा खेल छात्रावास परिसर बनाने के लिए जमीन भी चिन्हित कर ली है, मगर उस पर आगे अभी तक कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है। अच्छा होगा हिमाचल व केंद्र सरकार जल्द ही इस मुद्दे पर बातचीत कर धर्मशाला में बड़ा खेल छात्रावास परिसर बनाएं, ताकि खेलो इंडिया व राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविरों के लिए आवास सुविधा का समाधान हो सके। वर्षों से भारतवर्ष में ऊंचाई वाले ठंडे स्थानों पर खेल छात्रावास बनाने की बात हो रही है। धर्मशाला में जब से सिंथेटिक ट्रैक बना है। राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर लग रहे हैं। अच्छा होता देश का खेल मंत्रालय धर्मशाला में एथलेटिक्स के लिए मध्य व लंबी दूरी की खेल अकादमी खेलो इंडिया के अंतर्गत शुरू करता। हिमाचल प्रदेश में कई खेलों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधा कई जिलों में बनी हुई है। हमीरपुर तथा बिलासपुर में दो एथलेटिक्स के लिए सिंथेटिक ट्रैक है। ऊना में हाकी के लिए एस्ट्रोटर्फ बिछा है। वहां पर राज्य सरकार स्वयं या फिर केंद्र सरकार के साथ मिलकर उन खेलों को शुरू किया जाता।

बिलासपुर में पहले साई के प्रशिक्षण केंद्र में एथलेटिक्स के  लड़के व लड़कियां थे, बाद में यह छात्रावास लड़कों के लिए हो गया। आज से पहले यहां एथलेटिक्स के लिए प्रशिक्षण सुविधा नहीं थी। एथलेटिक्स बंद कर दी थी। अब जब यहां सिंथेटिक ट्रैक बिछाया जा चुका है, तो साई के प्रशिक्षण केंद्र में एथलेटिक के लड़के रख लेने चाहिएं। ऊना में राज्य का खेल छात्रावास चल रहा है, यहां पर भी हाकी खेल नहीं है। अच्छा होगा यहां पर हाकी खिलाडि़यों को चयनित कर खेल छात्रावास में प्रशिक्षण सुविधा दी जाए। राज्य में जहां-जहां अच्छी प्रशिक्षण सुविधा है, हमीरपुर में एथलेटिक के लिए खेलो इंडिया का खेल छात्रावास शुरू किया जाता। इस तरह हिमाचल में खेलों को अधिक गति मिल सकती है।

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