प्रशिक्षक मोहताज, फिर कैसे होगा खेल

भूपिंदर सिंह

राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक

अब हिमाचल का युवा सेवाएं एवं खेल विभाग उसे प्रशिक्षक बना रहा है, जो जिला स्तर तक खेला है और 42 दिनों की ट्रेनिंग किए हुए है, मगर वह राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी जो एक वर्ष की ट्रेनिंग किए हुए है, उसे छोड़ रहा है। हिमाचल में युवा सेवाएं एवं खेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रशिक्षक कैडेट को बुरी तरह बर्बाद किया हुआ है। क्या हिमाचल का युवा सेवाएं एवं खेल विभाग अपने यहां बने कनिष्ठ प्रशिक्षक भर्ती की योग्यता के इस बेतुके नियम को खत्म करेगा, जो देश के किसी भी अन्य राज्य में नहीं है। प्रशिक्षक की नियुक्ति पूरे देश के अन्य राज्यों तथा भारतीय खेल प्राधिकरण में राष्ट्रीय क्रीड़ा संस्थान से एक वर्षीय कोर्स किए हुए प्रशिक्षक की ही होती है। यह नियम हिमाचल प्रदेश को लागू करना चाहिए, अगर सच ही यहां खेल करवाना है…

हिमाचल प्रदेश में एशियाई खेल नई दिल्ली-1982 तक खेलों का जिम्मा शिक्षा विभाग के साथ ही था। बाद में अन्य राज्यों की तरह हिमाचल प्रदेश युवा सेवाएं एवं खेल विभाग का गठन हुआ। इस विभाग में पहले दस वर्षों तक जहां सचिव निदेशक, उपनिदेशक व जिला युवा सेवाएं एवं खेल अधिकारी नियुक्त थे, वहीं पर आधा दर्जन प्रशिक्षक बाद में एक दर्जन कनिष्ठ प्रशिक्षक तथा 12 जिलों में एक-एक युवा संयोजक भी लोक सेवा आयोग के माध्यम से नियुक्त किए गए। उपनिदेशक, जिला युवा सेवाएं एवं खेल अधिकारी व प्रशिक्षक, जो एक वेतनमान में नियुक्त किया गया। कनिष्ठ प्रशिक्षक तथा युवा संयोजक का एक वेतनमान रखा गया, मगर जब भर्ती व पदोन्नति नियम बने तो प्रशिक्षक को 25 प्रतिशत, युवा संयोजक को 50 प्रतिशत तथा खुली भर्ती से जिला युवा सेवाएं एवं खेल अधिकारी बनने के लिए 25 प्रतिशत पदों को बांटा गया। यह प्रशिक्षक कैडेट के साथ बिलकुल अन्याय था। जब कनिष्ठ प्रशिक्षक व युवा संयोजक का पद एक समान वेतन में था, तो फिर उनमें से ही आपस में बराबरी होनी चाहिए थी। युवा संयोजक के लिए योग्यता स्नातक चाहिए, वहीं पर प्रशिक्षक के लिए योग्यता स्नातक के साथ अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी या तीन बार राष्ट्रीय स्तर पर राज्य का प्रतिनिधित्व करने के बाद राष्ट्रीय क्रीड़ा संस्थान से प्रशिक्षक का कोर्स पास करना होता है। मगर हिमाचल प्रदेश युवा सेवाएं एवं खेल विभाग के बाद में छह सप्ताह वाले सर्टीफिकेट कोर्स को प्रशिक्षक के लिए योग्यता मान लिया, यह प्रशिक्षक कैडेट के साथ बहुत बड़ा मजाक है। अब हिमाचल का युवा सेवाएं एवं खेल विभाग उसे प्रशिक्षक बना रहा है, जो जिला स्तर तक खेला है और 42 दिनों की ट्रेनिंग किए हुए है, मगर वह राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी जो एक वर्ष की ट्रेनिंग किए हुए है, उसे छोड़ रहा है। हिमाचल में युवा सेवाएं एवं खेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रशिक्षक कैडेट को बुरी तरह बर्बाद किया हुआ है। क्या हिमाचल का युवा सेवाएं एवं खेल विभाग अपने यहां बने कनिष्ठ प्रशिक्षक भर्ती की योग्यता के इस बेतुके नियम को खत्म करेगा, जो देश के किसी भी अन्य राज्य में नहीं है। प्रशिक्षक की नियुक्ति पूरे देश के अन्य राज्यों तथा भारतीय खेल प्राधिकरण में राष्ट्रीय क्रीड़ा संस्थान से एक वर्षीय कोर्स किए हुए प्रशिक्षक की ही होती है। यह नियम हिमाचल प्रदेश को लागू करना चाहिए, अगर सच ही यहां खेल करवाना है। जो कभी खेल मैदान  गया नहीं, वह किस तरह राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनाने की सोच रखेगा। यह बात हिमाचल सरकार को समझनी चाहिए। इस समय प्रदेश में कई पद जिला युवा सेवाएं एवं खेल अधिकारी के खाली पड़े हैं, इन पर नियुक्तियां भी नहीं की हैं। केवल चार्ज ही दिया है, जबकि कुश्ती प्रशिक्षक विजय कुमार, जो जिला युवा सेवाएं एवं खेल अधिकारी के पद की पदोन्नति के लिए हर शर्त पूरी कर रहा है, मगर उसे केवल कुल्लू जिला युवा सेवाएं एवं खेल अधिकारी का चार्ज ही दिया है। जब यह प्रशिक्षक पदोन्नति की हर शर्त पूरी कर रहा है, साथ में वह सबसे वरिष्ठ भी है, तो फिर उसे कब अपने पद पर पदोन्नति विभाग देगा। प्रशिक्षकों के साथ इस तरह का व्यवहार करके प्रदेश का युवा सेवाएं एवं खेल विभाग क्या संदेश देना चाहता है। सैनिक कोटे से भर्ती गोपाल ठाकुर एथलेटिक्स प्रशिक्षक को विभाग अभी तक उनके आर्थिक लाभ नहीं दे पाया है। प्रशिक्षक कैडेट की इस तरह उपेक्षा खेल विभाग में ठीक नहीं है। प्रशिक्षकों को उनके प्रशिक्षण कार्यक्रम से कई-कई सप्ताह तक दूर रखा जाता है, ताकि वह अपना काम ठीक ढंग से नहीं कर सकें, जबकि प्रशिक्षण कार्यक्रम वर्षों तक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। जब प्रशिक्षक विभाग के अन्य काम में व्यस्त रहेगा, तो फिर उसे प्रशिक्षण के लिए कब समय मिलेगा। प्रदेश में अगर खेलों को बढ़ावा देना है, तो प्रशिक्षक कैडेट की भर्ती, पदोन्नति से लेकर उनके प्रशिक्षण समय के लिए हिमाचल सरकार को एक बार फिर नए सिरे से नियम बनाने होंगे, ताकि हिमाचल की पहाड़ी संतानों को अपने राज्य में ही सही प्रशिक्षण कार्यक्रम मिल सके और उन्हें अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनने के लिए राज्य से पलायन न करना पड़े।

ई-मेल : bhupindersinghhmr@gmail.com

You might also like