हिमाचल में हाकीः तब और अब

Jul 19th, 2019 12:07 am

भूपिंदर सिंह

राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक

जब प्रदेश की संतानें सीता व दीपक होकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा कर भारतीय टीम का मुख्य अंग बन सकती हैं, तो फिर हिमाचल के प्रशिक्षकों को चाहिए कि वे राज्य में ऐसा प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए, जिससे हिमाचल के खिलाडि़यों को राज्य से बाहर पलायन न करना पड़े। राज्य हाकी संघ तथा खेल विभाग को आपस में समन्वय स्थापित करना होगा, ताकि हाकी खिलाड़ी को हर वह सुविधा मिल सके, जिसका रास्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जाता हो। हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय खेल हाकी के लिए आज सुविधा है और प्रशिक्षक भी हैं। देखते हैं कौन-कौन प्रशिक्षक अपने प्रशिक्षण केंद्र से वैसे स्टार खिलाड़ी निकालता है, जैसे इस प्रदेश की संतानें पलायन कर बाहर प्रशिक्षण प्राप्त कर विश्व हाकी में एक नाम हैं…

राष्ट्रीय स्तर पर हिमाचल का हाकी में जाना-पहचाना नाम है। महिला हाकी में विद्या स्टोक्स दशकों भारतीय हाकी की अध्यक्ष रही हैं। केपीएस गिल हिमाचल कोटे से ही राष्ट्रीय पुरुष हाकी के वर्षों अध्यक्ष रहे हैं। आजकल के वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर हिमाचल हाकी अध्यक्ष हैं, साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर उपाध्यक्ष की भूमिका निभा रहे हैं। हिमाचल प्रदेश वैसे तो राष्ट्रीय स्तर पर टीम के रूप में स्कूली खेलों से आगे नहीं जा पाया है, मगर राज्य के बाहर प्रशिक्षण प्राप्त कर हिमाचल की संतानें दुनिया के सबसे बड़े खेल उत्सव ओलंपिक में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय हाकी का प्रतिनिधित्व ही नहीं, नेतृत्व भी कर चुकी हैं। ऊना के पदमश्री चरणजीत सिंह 1964 टोकियो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम के कप्तान थे। राज्य के बाहर जाकर गीता व सीता गोसाई ने भारत का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व किया। सीता गोसाई ने भातीय टीम का एशियाई व राष्ट्रमंडल खेलों में सफल नेतृत्व भी किया। इस स्टार खिलाड़ी ने विश्व एकादश में भी जगह बनाई थी। दीपक ठाकुर भी पलायन कर पंजाब की धरती पर प्रशिक्षण प्राप्त कर ओलंपिक तक पहुंचे। इस तेज-तर्रार फारवर्ड के अर्जुन अवार्ड में पैरवी हिमाचल के बजाय पंजाब ने की थी। हिमाचल स्तर पर हाकी अस्सी के दशक में शिमला, सोलन, मंडी, बिलासपुर, सिरमौर तथा हमीरपुर के स्कूलों में खूब खेली जाती थी। बालिका वर्ग में हिमाचल प्रदेश स्कूली राष्ट्रीय खेलों में तब से कोई न कोई पदक जीतता आ रहा है। उस समय हिमाचल में बहुत कम प्रशिक्षक थे। कुछ पूर्व खिलाड़ी, जो हाकी के दीवाने थे, राज्य में विभिन्न जिलों में हाकी का प्रारंभिक प्रशिक्षण देते थे। इनमें हमीरपुर के अमरनाथ शर्मा काफी चर्चित रहे हैं। वर्षों पहले जब हाकी की राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं एस्ट्रो टर्फ पर होने लगीं, तो इस प्ले फील्ड की बहुत मांग उठी। प्रो. पे्रम कुमार धूमल ने अपने दूसरे कार्यकाल में ऊना के इंदिरा स्टेडियम में हाकी के लिए एस्ट्रो टर्फ बिछा दिया। हिमाचल प्रदेश में स्कूली स्तर पर माजरा में लड़कियों के लिए खेल छात्रावास चल रहा है। इस खेल छात्रावास में चंद्र शेखर शर्मा प्रशिक्षण दे रहे हैं। पिछले कई वर्षों से यह छात्रावास स्कूली खेलों में कोई न कोई पदक जीत रहा है, मगर स्वर्ण पदक से हर बार पीछे रह जाता है। इसका मुख्य कारण है माजरा में प्रशिक्षण के लिए एस्ट्रो टर्फ का न होना। क्या इस टीम को माजरा से तब तक ऊना नहीं भेजा जा सकता है, जब तक माजरा में एस्ट्रो टर्फ नहीं बिछता? हिमाचल स्कूली शिक्षा विभाग को चाहिए कि ऊना में लड़के तथा लड़कियों के लिए खेल छात्रावास खोले। हिमाचल प्रदेश खेल विभाग के ऊना में चल रहे खेल छात्रावास में भी हाकी के लड़के रखे जाएं, ताकि इस अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधा का उपयोग किया जा सके। शिमला के शिलारू में बिछे एस्ट्रो टर्फ का उपयोग भी हिमाचल प्रदेश के खिलाडि़यों को मिलना चाहिए। ऊना तथा शिलारू में समर कोचिंग कैंप के साथ-साथ राष्ट्रीय प्रतियोगिता पूर्व लंबी अवधि के प्रशिक्षण शिविर राज्य स्कूली क्रीड़ा संगठन, प्रदेश विश्वविद्यालय तथा राज्य हाकी संघ हिमाचल प्रदेश खेल विभाग के साथ मिलकर हर वर्ष लगाए। राज्य खेल विभाग के प्रशिक्षकों के साथ-साथ कई शारीरिक शिक्षक प्रशिक्षण में डिप्लोमा व सर्टीफिकेट कोर्स पास किए हुए हैं, वे ईमानदारी से अपने-अपने नियुक्ति के स्थानों पर प्ले फील्ड सुविधा के अनुसार प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करें। स्वर्गीय चमन लाल गुप्ता ने अपनी सेवा के समय विभिन्न महाविद्यालयों में हाकी के लिए काफी काम किया है। गुप्ता के देहांत के बाद अब प्रदेश विश्वविद्यालय के पास कोई भी हाकी प्रशिक्षक नियुक्त नहीं है। भारतीय खेल प्राधिकरण के प्रशिक्षक अशोक शर्मा को भी राज्य में अच्छे हाकी प्रशिक्षक के रूप में याद किया जाता है। जब प्रदेश की संतानें सीता व दीपक होकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा कर भारतीय टीम का मुख्य अंग बन सकती हैं, तो फिर हिमाचल के प्रशिक्षकों को चाहिए कि वे राज्य में ऐसा प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए, जिससे हिमाचल के खिलाडि़यों को राज्य से बाहर पलायन न करना पड़े। राज्य हाकी संघ तथा खेल विभाग को आपस में समन्वय स्थापित करना होगा, ताकि हाकी खिलाड़ी को हर वह सुविधा मिल सके, जिसका रास्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जाता हो। हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय खेल हाकी के लिए आज सुविधा है और प्रशिक्षक भी हैं। देखते हैं कौन-कौन प्रशिक्षक अपने प्रशिक्षण केंद्र से वैसे स्टार खिलाड़ी निकालता है, जैसे इस प्रदेश की संतानें पलायन कर बाहर प्रशिक्षण प्राप्त कर विश्व हाकी में एक नाम हैं।

हिमाचली लेखकों के लिए

लेखकों से आग्रह है कि इस स्तंभ के लिए सीमित आकार के लेख अपने परिचय तथा चित्र सहित भेजें। हिमाचल से संबंधित उन्हीं विषयों पर गौर होगा, जो तथ्यपुष्ट, अनुसंधान व अनुभव के आधार पर लिखे गए होंगे।  

-संपादक

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