अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में हिमाचल

भूपिंदर सिंह

राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक

सितंबर में होने वाली विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में  हिमाचल का यह गबरू भारत का प्रतिनिधित्व करता नजर आएगा। सेना की तरफ से खेलते हुए चंबा के बकलोह निवासी वीएस थापा ने ओलंपिक तक मुक्केबाजी में सफर तक किया था। आशीष चौधरी जिला मंडी की तहसील धर्मपुर में तहसील कल्याण अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। इस उभरते हुए मुक्केबाज को हिमाचल सरकार पदोन्नति कब तक दे रही है। एशियाई चैंपियनशिप में पदक जीतने के बाद भी हिमाचल सरकार इस मुक्केबाज को कोई नकद इनाम नहीं दे रही है, क्योंकि हिमाचल प्रदेश खेल परिषद की नियमावली में एशियन व विश्व चैंपियनशिप के पदक विजेताओं के लिए नकद इनाम का प्रावधान ही नहीं रखा है…

हिमाचल प्रदेश में सब खेलों के लिए आधारभूत ढांचा न के बराबर था, उस समय भी हिमाचल की कुछ संतानें अंतरराष्ट्रीय खेल पटल पर चमकती रही हैं। आज जब राज्य में कई खेलों के लिए आधारभूत ढांचे के साथ-साथ अभिभावक भी खेलों के प्रति जागरूक हैं, तो हिमाचल के खिलाड़ी प्रदेश में या प्रदेश के बाहर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हों, इनमें से बहुत से खिलाड़ी आज भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में चमका रहे हैं। शूटिंग में विजय कुमार के नक्शे कदमों पर चलते हुए ऊना की अंजुम मौदगिल ने 12वीं सरदार सज्जन सिंह सेठी स्मारक मास्टर्ज निशानेबाजी प्रतियोगिता में दस मीटर पिस्टल स्पर्धा में विश्वकप में बने रिकार्ड से बेहतर 253.9 अंकों के साथ स्वर्ण पदक पर कब्जा कर विश्व की शीर्ष निशानेबाज अपूर्वी चंदेला को रजत पदक के लिए मजबूर कर दिया। चंदेला ने 252.9 अंक बनाए।

पिछले वर्ष भी राष्ट्रमंडल खेलों में इस स्टार शूटर ने भारत के लिए पदक जीतकर हिमाचल का नाम भी रोशन किया था। यह शूटर राज्य से बाहर रहकर अपना अभ्यास कर रही है। हिमाचल प्रदेश आज तक राज्य में एक सही शूटिंग रेंज तक नहीं बनवा पाया है। हिमाचल सरकार के युवा सेवाएं एवं खेल विभाग के साथ-साथ हिमाचल शूटिंग संघ को भी इस विषय पर कार्य पूर्ण कर देना चाहिए। राज्य सरकार को चाहिए कि अंजुम को राज्य में सम्मानजनक नौकरी देकर उसके प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहायता करनी चाहिए। एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप में भारत के रजत पदक जीतने वाले आशीष चौधरी ने 75 किलोग्राम  भार वर्ग में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना पहला स्वर्ण पदक प्रतिष्ठित थाईलैंड ओपन मुक्केबाजी प्रतियोगिता में कोरियाई मुक्केबाज किम को फाइनल में हराकर जीत लिया। सितंबर में होने वाली विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में यह हिमाचल का गबरू भारत का प्रतिनिधित्व करता नजर आएगा। इसके पूर्ण ओलंपियन वीएस थापा ही विश्व चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाला पहला और एकमात्र हिमाचली था। सेना की तरफ से खेलते हुए चंबा के बकलोह निवासी वीएस थापा ने ओलंपिक तक मुक्केबाजी में सफर तक किया था। आशीष चौधरी जिला मंडी की तहसील धर्मपुर में तहसील कल्याण अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। इस उभरते हुए मुक्केबाज को हिमाचल सरकार पदोन्नति कब तक दे रही है। एशियाई चैंपियनशिप में पदक जीतने के बाद भी हिमाचल सरकार इस मुक्केबाज को कोई नकद इनाम नहीं दे रही है, क्योंकि हिमाचल प्रदेश खेल परिषद की नियमावली में एशियन व विश्व चैंपियनशिप के पदक विजेताओं के लिए नकद इनाम का प्रावधान ही नहीं रखा है। अच्छा होगा ओलंपिक खेलों में होने वाली स्पर्धाओं के खिलाडि़यों व टीमों को भी एशियन, राष्ट्रमंडल व विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने पर अन्य राज्यों की तरह नकद इनाम का प्रावधान हो। हमीरपुर के विकास ठाकुर ने राष्ट्रमंडल भारोत्तोलन प्रतियोगिता में एक बार फिर उम्दा प्रदर्शन कर भारत की झोली में रजत पदक डाला है। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के कल्याण सिंह ने भी जूनियर राष्ट्रमंडल भारोत्तोलन प्रतियोगिता में रजत पदक जीता है। कल्याण सिंह उभरता हुआ स्टार लिफ्टर है, भविष्य में इससे देश को काफी उम्मीद है। इन दोनों लिफ्टरों को भी नकद इनाम मिलना चाहिए तथा कल्याण सिंह के लिए वजीफे का प्रावधान हिमाचल खेल विभाग को करना चाहिए। अगले वर्ष ओलंपिक है, विकास ठाकुर उसके लिए प्रस्तावित लिफ्टर है। हिमाचल सरकार को चाहिए कि इस खिलाड़ी को भी सरकार प्रोत्साहन दे।

वायुसेना के इस जूनियर कमिशंड अधिकारी को भी राज्य में सम्मानजक नौकरी हिमाचल सरकार को देनी चाहिए। हिमाचल प्रदेश बिलासपुर जिला के घुमारवीं उपमंडल के मोरसिंगी में चल रही स्नेहलता की हैंडबाल अकादमी महिला हैंडबाल में देश के लिए बहुत अच्छी महिला खिलाड़ी दे रही है। जूनियर हैंडबाल प्रतियोगिता के लिए लगे राष्ट्रीय कैंप में इस अकादमी की प्रियंका ठाकुर जस्सी, भावना, संजना व अंजलि का चयन हुआ है। लेबनान में आयोजित हैंडबाल प्रतियोगिता में मोरसिंगी अकादमी की शालिनी ठाकुर, प्रियंका ठाकुर व हेमलता ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। शालिनी ठाकुर ने गोल दाग कर प्रतियोगिता के पहले दस सकोररों में जगह बनाकर भारत का नाम भी चमकाया है। स्नेहलता प्रदेश व देश के लिए अपने दम पर बहुत बड़ा काम कर रही है। पिछले दिनों उसका यहां से तबादला कर दिया था। अच्छा होगा हिमाचल सरकार ऐसे जुनूनी लोगों की सहायता करे, जो देशहित में अपना बहुत कुछ दांव पर लगाए हुए हैं।

हिमाचल प्रदेश की पुरुष व महिला कबड्डी में बहुत अच्छा काम हो रहा है, मगर यह कबड्डी का बुरा वक्त है। आज कबड्डी संघ ऊपर से नीचे तक दोफाड़ होकर अपने-अपने सर्वोच्च्य की लड़ाई में खिलाडि़यों के भविष्य को खत्म कर रहा है। खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। हिमाचल सरकार तथा खेल संघों को आपस में तालमेल बिठाकर राज्य में खेलों के लिए वातावरण देना होगा, ताकि इस बर्फ के प्रदेश के खिलाड़ी भी विश्व स्तर पर भारत का मान बनें।

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