बू्रस ली बनाने का गोरख धंधा

Aug 17th, 2019 12:06 am

भूपिंदर सिंह

राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक

राष्ट्रीय स्तर की इन प्रतियोगिताओं में एक ही मोहल्ले के खिलाड़ी किसी राज्य की टीम हो जाते हैं। इस गोरख धंधे का अध्ययन जब किया गया तो पता चलता है कि देश के विभिन्न राज्यों के शहरों व गांवों में अपने को अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता कहने वाले ये नासमझ खिलाड़ी व उनके अभिभावक या तो बहुत भोले हैं या फिर धन कमाने वाले फ्राड मार्शल आर्ट माफिया के शिकार हैं…

आजकल अखबारों के अंदर यह खबर जरूर मिल जाती है कि कराटे के अमुक खिलाड़ी ने फलां अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक प्राप्त किया है। इसी तरह की खबरें ताइकवांडो, किक बॉक्सिंग आदि कम रेटिंग खेलों के बारे में मिल जाती हैं। एक ही महीने में एशियाई व विश्व स्तर की कई प्रतियोगिताएं विभिन्न देशों में आयोजित हो जाती हैं और इन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में एक-दो शहरों के ही खिलाड़ी होते हैं।  राष्ट्रीय स्तर की इन प्रतियोगिताओं में एक ही मोहल्ले के खिलाड़ी किसी राज्य की टीम हो जाते हैं। इस गोरख धंधे का अध्ययन जब किया गया तो पता चलता है कि देश के विभिन्न राज्यों के शहरों व गांवों में अपने को अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता कहने वाले ये नासमझ खिलाड़ी व उनके अभिभावक या तो बहुत भोले हैं या फिर धन कमाने वाले फ्राड मार्शल आर्ट माफिया के शिकार हैं। उन्हें यह पता करना चाहिए कि कराटे, ताइकवांडो आदि सभी मार्शल आर्ट खेलों के संघ अंतरराष्ट्रीय स्तर से लेकर जिला स्तर तक बने हैं जो जिला स्तर पर जिला खेल परिषद से मान्यता प्राप्त होता है।

 राज्य स्तर पर राज्य खेल परिषद तथा राज्य ओलंपिक संघ से मान्यता प्राप्त होता है। राष्ट्रीय स्तर पर देश के खेल मंत्रालय तथा भारतीय ओलंपिक संघ से मान्यता लिए होते हैं। इन खेल संघों की वर्ष में एक बार प्रतियोगिता होती है जिसमें जिला स्तर पर पूरे जिला के राज्य स्तर पर उस राज्य के सभी जिलों के तथा राष्ट्रीय स्तर पर सभी राज्यों की टीमें भाग लेती हैं।  इन खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए सरकार धन देती है और जो खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम में चुने जाते हैं उन्हें भारत का खेल मंत्रालय भारतीय खेल प्राधिकरण के माध्यम प्रतियोगिता पूर्व प्रशिक्षण शिविर तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाडि़यों का खर्चा वहन करता है। मगर इस गोरख धंधे वाली प्रतियोगिताओं का खर्चा खिलाड़ी के अभिभावक उठाते हैं। किसी भी मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले खिलाडि़यों का पूरा आने-जाने व रहने का खर्चा खेल मंत्रालय उठाता है। साथ ही कुछ डालर जेब खर्च भी प्रतिदिन मिलता है। इसलिए अभिभावकों को सचेत रहना होगा कि उनके खिलाड़ी बच्चे कहां प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं और किस प्रतियोगिता में भाग ले  रहे हैं।

मान्यता प्राप्त खेल संघों द्वारा आयोजित खेल प्रतियोगिताओं में भाग लिए खिलाडि़यों को पढ़ाई व नौकरी में खेल आरक्षण की सुविधा है। महाविद्यालय व विश्वविद्यालय की सीटों में पांच प्रतिशत आरक्षण है।  हर 19वीं सीट खिलाड़ी को मिलती है। इसी तरह नौकरी में भी स्तरीय मान्यता प्राप्त खेल प्रतियोगिताओं के पदक विजेताओं व प्रतिनिधित्व करने वालों को तीन प्रतिशत आरक्षण है। हर 33वां पद खिलाड़ी प्रतिभागी के लिए आरक्षित होता है। इसलिए अभिभावकों व उनके खिलाड़ी बच्चों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे किस खेल में अपना समय दे रहे हैं।  हिमाचल के खिलाडि़यों को अधिक से अधिक जिला स्तर की मान्यता प्राप्त खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेकर राज्य व राष्ट्रीय स्तर की टीमों का हिस्सा बनने के लिए कठिन प्रशिक्षण करना चाहिए। साथ ही साथ फ्राड खेल संघों द्वारा आयोजित नकली खेलों व खेल प्रतियोगिताओं से बचना चाहिए। स्कूली स्तर पर भी आजकल कई फर्जी खेल संघ सक्रिय हैं जो अंतरराष्ट्रीय स्तर तक खेल प्रतियोगिताएं करवा रहे हैं। स्कूली स्तर पर स्कूली क्रीड़ा संगठन खेल करवाता है जो हर जिले व राज्य में मौजूद है। जिला स्तर पर उपनिदेशक इस क्रीड़ा संगठन का अध्यक्ष व जिला का उप शारीरिक शिक्षा अधिकारी सचिव होता है। सरकारी व सभी मान्यता प्राप्त स्कूल इसके सदस्य होते हैं।

राज्य स्तर पर निदेशक अध्यक्ष तथा उपनिदेशक शारीरिक शिक्षा सचिव होते हैं। सभी जिला इसके सदस्य होते हैं। केवल इन द्वारा करवाया गया खेल टूर्नामेंट ही मान्यता प्राप्त होता है। शेष सभी समय की बर्बादी है और गैर मान्यता प्राप्त खेल प्रतियोगिताओं के प्रमाण पत्र रद्दी से अधिक और कुछ नहीं हैं। ये सभी गैर मान्यता प्राप्त खेल संघ मनोरंजन व फिटनेस के नाम पर पंजीकृत करवाए जाते हैं।  लोग इनका पंजीकरण देख कर धोखा खा जाते हैं। इसलिए अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को फिटनेस के लिए जरूर खेल मैदान भेजें, मगर साथ ही साथ यह भी सुनिश्चित करें कि वह खेल हर स्तर पर मान्यता प्राप्त हो ताकि उनके खिलाड़ी बच्चों को फिटनेस के साथ-साथ खेल आरक्षण का भी लाभ मिल सके और उसमें प्रतिभा है तो वह एशियाई व ओलंपिक खेलों में भारतीय टीम का हिस्सा बन कर देश को पदक जीत सकें।

ई-मेल-bhupindersinghhmr@gmail.com

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लेखकों से आग्रह है कि इस स्तंभ के लिए सीमित आकार के लेख अपने परिचय तथा चित्र सहित भेजें। हिमाचल से संबंधित उन्हीं विषयों पर गौर होगा, जो तथ्यपुष्ट, अनुसंधान व अनुभव के आधार पर लिखे गए होंगे।                                               

-संपादक

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