साई छात्रावास निर्माण में सहयोग करें 

Sep 13th, 2019 12:06 am

भूपिंदर सिंह

राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक

1982 एशियाई खेलों के लिए बने स्टेडियमों के रखरखाव के लिए बने भारतीय खेल प्राधिकरण में राष्ट्रीय क्रीड़ा संस्थान का विलय हो जाने के बाद अब देश में खेलों की सबसे बड़ी संस्था साई ही है। भारतीय खेल प्राधिकरण बनने के बाद देश में बहुत से खेल छात्रावास सुविधा व प्रतिभा के अनुसार देश के विभिन्न भागों में साई ने खोले। जब प्रदेश में राज्य सरकार का कोई भी खेल छात्रावास नहीं चल रहा था, उस समय साई ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के पास प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई…

भारत में खेलों के लिए प्रयास तो आजादी के एकदम बाद 1951 में एशियाई खेल भारत में आयोजित कर शुरू हो गए थे, मगर राजकुमारी खेल योजना 1961 तक चलती रही। जब राष्ट्रीय क्रीड़ा संस्थान पटियाला बना तो राजकुमारी प्रशिक्षण खेल योजना का विलय एनआईएस में हो गया। भारत में खेलों की आधुनिक व वैज्ञानिक तकनीकी व प्रशिक्षण के लिए प्रशिक्षक, राष्ट्रीय टीमों का अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के पूर्ण प्रशिक्षण तथा भविष्य के प्रशिक्षक निकालने का जिम्मा राष्ट्रीय क्रीड़ा संस्थान का ही था। देश के विभिन्न राज्यों में सुविधा के अनुसार एनआईएस के केंद्र भी स्थापित किए गए। ऊंचाई पर प्रशिक्षण का लाभ मिले इसके लिए शिमला के आसपास एक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की बात भी शुरू हो गई थी। 1982 एशियाई खेलों के लिए बने स्टेडियमों के रखरखाव के लिए बने भारतीय खेल प्राधिकरण में राष्ट्रीय क्रीड़ा संस्थान का विलय हो जाने के बाद अब देश में खेलों की सबसे बड़ी संस्था साई ही है। भारतीय खेल प्राधिकरण बनने के बाद देश में बहुत से खेल छात्रावास सुविधा व प्रतिभा के अनुसार देश के विभिन्न भागों में साई ने खोले। जब प्रदेश में राज्य सरकार का कोई भी खेल छात्रावास नहीं चल रहा था, उस समय साई ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला समरहिल के साथ लगती पहाड़ी पोटर हिल पर ऊंचाई का लाभ लेने के लिए प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई, मगर राजनीतिक दखल के कारण यह प्रशिक्षण केंद्र शिमला से दूर ठियोग से आगे व नारकंडा से पीछे भारत-तिब्बत सीमा सड़क के साथ शिलारू में बनाया गया।

इस केंद्र पर भारतीय खेल प्राधिकरण ने विशेष क्षेत्र खेल योजना के अंतर्गत एक खेल छात्रावास लंबी व मध्य दूरी की दौड़ों के लिए शुरू किया गया, मगर 90 के दशक के शुरुआती वर्षों में ही यह खेल छात्रावास बंद भी हो गया। शिलारू के साथ-साथ भारतीय खेल प्राधिकरण ने बिलासपुर तथा धर्मशाला में खेल छात्रावास शुरू किए। धर्मशाला में एसपीडीए के अंतर्गत वालीबाल व एथलेटिक के लड़कों को रखा था। बाद में बिलासपुर के खेल छात्रावास में लड़कों के लिए एथलेटिक्स, मुक्केबाजी, वालीबाल तथा कबड्डी खेल को रखा और धर्मशाला में लड़कियों के लिए एथलेटिक्स, हाकी, बास्केटबाल, वालीबाल तथा कबड्डी खेल को रखा गया। तत्कालीन सहायक निदेशक ललिता शर्मा ने इस खेल छात्रावास को उन्नत करने में अपने खेल प्रबंधन का खूब परिचय दिया था। आजकल यह अधिकारी साई में निदेशक के पद पर उत्तर भारत की प्रमुख है। उन्हीं के प्रयत्नों से धर्मशाला में 300 बिस्तरों वाले एक बड़े खेल छात्रावास का निर्माण भी होने जा रहा है। इस खेल छात्रावास के निर्माण पर भारतीय खेल प्राधिकरण 27 करोड़ रुपए खर्च कर रहा है। भारतीय खेल प्राधिकरण देश के अन्य राज्यों में भी  इस समय कई कई जगह 300 बिस्तरों वाले बड़े खेल छात्रावासों का निर्माण कर रहा है। वहां राशि जारी भी कर चुका है, मगर धर्मशाला में करारनामा हस्ताक्षरित न होने के कारण यहां कार्य शुरू नहीं हो पाया है। अच्छा होगा हिमाचल प्रदेश सरकार इस विषय को प्रमुखता से ले, ताकि इस छात्रावास के निर्माण में जल्दी हो सके। खेलों इंडिया के अंतर्गत धर्मशाला खेल छात्रावास में इस समय कबड्डी व खो-खो की लड़कियां आ चुकी हैं वर्तमान छात्रावास की क्षमता 80 बिस्तरों की है। बाहर कमरे किराए पर लेकर खेलो इंडिया का छात्रावास चल रहा है। अभी वालीबाल तथा एथलेटिक में भी धर्मशाला को खेलों इंडिया का प्रशिक्षण केंद्र मिला एथलेटिक्स व वालीबाल की लड़कियां आने बाद तो फिर और भी अधिक बड़े खेल छात्रावास की जरूरत बढ़ जाएगी। पिछले कुछ वर्षों से जब से धर्मशाला में सिंथेटिक ट्रैक बना है। राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर भी धर्मशाला में लगने लगे हैं।

इसलिए इस खेल छात्रावास के निर्माण में जल्दी होना बेहद जरूरी हो जाता है। बिलासपुर में भारतीय खेल प्राधिकरण के खेल छात्रावास की हालत भी बहुत खस्ता है। वहां पर इस समय वालीबाल, मुक्केबाजी व कबड्डी के लड़के हैं। वालीबाल प्रशिक्षक न होने के कारण इन खिलाडि़यों को जम्मू में भारतीय खेल प्राधिकरण के छात्रावास में भेजा जा रहा है। अच्छा होता बिलासपुर में वालीबाल का प्रशिक्षक नियुक्त कर इन खिलाडि़यों को अपने ही राज्य में रखा जाता।  खेलो इंडिया ने भी बिलासपुर को अपना राज्य प्रशिक्षण केंद्र घोषित कर दिया है। बिलासपुर के साई खेल छात्रावास की हालत बहुत अच्छी नहीं है और न ही उसमें अधिक खिलाड़ी ठहर सकते हैं। बिलासपुर में भी एक अच्छे और बड़े खेल छात्रावास के निर्माण की जरूरत है। हिमाचल सरकार इस विषय पर भारतीय खेल प्राधिकरण के साथ शीघ्र बात कर हिमाचल में खेल छात्रावास तैयार करवाने में सहयोग दें। जब सारा खर्चा केंद्र सरकार वहन कर हिमाचल में खेल संस्कृति को बढ़ावा दे रही है तो हिमाचल सरकार को भी पहल कर भारतीय खेल प्राधिकरण के साथ धर्मशाला खेल छात्रावास का एमओयू साइन कर देना चाहिए इसी में देश व प्रदेश के खेलों का भला है।

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