खेल में है स्वस्थ पीढ़ी का भविष्य

भूपिंदर सिंह

राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक

 

इसमें कोई संदेह नहीं कि ओलंपिक खेलों की लोकप्रियता बढ़ने के साथ-साथ खेलों में राष्ट्रीयता की भावना में बढ़ोतरी हुई है। आज अधिक से अधिक देश ओलांपिक खेलों में भाग ले रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप काफी कठिन खेल प्रतियोगिताएं हो गई हैं। इसके लिए विकसित देशों ने भविष्य के विजेता खिलाड़ी तैयारी करने के लिए स्कूली स्तर से ही एथलेटिक्स, तैराकी व जिम्नास्टिक में अति आधुनिक खेल ढांचा अपने विद्यार्थियों के लिए तैयार कर दिया है। प्रत्येक विद्यार्थी को पढ़ाई के साथ-साथ अपने स्वास्थ्य को उच्च स्तर तक विकसित करने के लिए स्कूल में ही शारीरिक क्रियाओं और पौष्टिक आहार का उचित प्रबंध किया जा रहा है…

बीसवीं सदी में जहां विज्ञान के क्षेत्र में संचार माध्यमों ने अभूतपूर्व प्रगति की है वहीं पर हीरोशिमा और नागासाकी में परमाणु तबाही का भीषण विनाश भी देखा है। इसलिए दूसरे महायुद्ध के बाद तो ओलंपिक आंदोलन को बहुत बढ़ावा मिला, क्योंकि ओलंपिक खेलों का मूल मकसद अंतरराष्ट्रीय भाईचारे व मैत्री तथा स्वस्थ विश्व की परिकल्पना है। आज ओलंपिक खेलों की ओर सभी राष्ट्रों का ध्यान है। सभी देशों ने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करने के लिए विभिन्न खेल स्पर्धाओं में उत्कृष्ट परिणाम देने शुरू किए हैं, जिसका उदाहण विकसित देश अमरीका, रूस, इंग्लैंड, जर्मनी आदि हैं।

ओलंपिक खेलों में अपने देश के गौरव के लिए शब्द खेलों की शुरुआती शपथ में शामिल होता है। इसमें कोई संदेह नहीं कि ओलंपिक खेलों की लोकप्रियता बढ़ने के साथ-साथ खेलों में राष्ट्रीयता की भावना में बढ़ोतरी हुई है। आज अधिक से अधिक देश ओलांपिक खेलों में भाग ले रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप काफी कठिन खेल प्रतियोगिताएं हो गई हैं। इसके लिए विकसित देशों ने भविष्य के विजेता खिलाड़ी तैयारी करने के लिए स्कूली स्तर से ही एथलेटिक्स, तैराकी व जिम्नास्टिक में अतिआधुनिक खेल ढांचा अपने विद्यार्थियों के लिए तैयार कर दिया है। प्रत्येक विद्यार्थी को पढ़ाई के साथ-साथ अपने स्वास्थ्य को उच्च स्तर तक विकसित करने के लिए स्कूल में ही शारीरिक क्रियाओं के साथ-साथ उनके पौष्टिक आहार का भी उचित प्रबंध किया होता है।

जब स्कूल के प्रत्येक विद्यार्थी तक फिटनेस कार्यक्रम पहुंचेगा, तो वहां से विभिन्न खेलों के लिए भविष्य के खिलाड़ी मिल ही जाते हैं। स्कूली स्तर पर जब प्रत्येक विद्यार्थी को अपनी शारीरिक क्षमताओं को बढ़ाने के मूलमंत्र मिलना शुरू हो जाएंगे, तो वे महाविद्यालय स्तर तक पहुंचते-पहुंचते अच्छे खिलाड़ी के तौर पर पहचानने शुरू हो जाते हैं। आज अधिकतर ओलंपिक विजेता या तो महाविद्यालय या विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे होते हैं या थोड़ी देर पहले पढ़ाई पूरी कर निकले होते हैं। जब स्कूली व विश्वविद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों को फिटनेस के लिए माकूल वातावरण मिलेगा, तो उससे अति शारीरिक क्षमता वाले तो खेलों के क्षेत्र के विजेता बन जाएंगे और शेष बचे उस देश का फिट नागरिक मिल जाएंगे।

वयस्क व्यक्तियों के स्वास्थ्य की उपेक्षा भी नहीं की जा सकती है। बहुत से देशों में सरकारी व गैर सरकारी स्तर पर शारीरिक व्यायाम को महत्त्व दिया गया है ताकि स्वचलन और रहन-सहन के स्तर में वृद्धि होने के कारण बैठे रहने से पड़ने वाले विनाशकारी प्रभावों को दूर किया जा सके। खेलकूद के लिए आर्थिक सहायता प्रदान कर अधिक से अधिक नागरिकों को भी फिटनेस के लिए प्रेरित किया जा रहा है। सरकारी खिलाड़ी कर्मचारियों को उनके प्रशिक्षण व प्रतियोगिता समय को ऑन ड्यूटी मानकर खेलों में अधिक से अधिक भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाता है। सरकारी कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़े, इसके लिए विभागीय खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन भी प्रति वर्ष होता रहता है। पहले के अपेक्षा आज का मानव इस बात के लिए अधिक सजग हो गया है कि व्यक्ति विशेष के स्वास्थ्य से समग्र व्यक्ति का कल्याण जुड़ा हुआ है।

शारीरिक योग्यता की आवश्यकता हर इनसान को होती है। आज के आधुनिक युग में जब गांव से शहर की तरफ पलायन हो रहा है तो शहर में शारीरिक क्षमता बढ़ाने के लिए कोई कार्य न होकर उलटा पूरा दिन बैठे रहने से हमारे स्वास्थ्य में गिरावट आ रही है। इससे देश के सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में हम पिछड़ रहे हैं। अगर किसी देश को सामाजिक व आर्थिक रूप से ऊपर उठना है तो वहां पर खेलकूद के माध्यम से वहां के नागरिकों के  स्वास्थ्य के स्तर को ऊपर उठाना अनिवार्य हो जाता है।

यही कारण है कि विकसित देश चिकित्सालय से अधिक खेल मैदान व पार्क बनवाते हैं। आज बहुत तेजी से सामान्य फिटनेस एक बहुत बड़ा उद्योग बनने जा रही है। अस्तित्व के लिए संघर्ष अभी भी जारी है। योग्यता की अति जीविता का सिद्धांत अब भी उतना ही महत्त्व रखता है, जितना पहले रखता था। भविष्य में हम जान पाएंगे कि सत्यता की नियोग्यता एवं अनेक रोगों के बचाव के लिए शारीरिक योग्यता अत्यंत महत्त्वपूर्ण रहेगी। शारीरिक ही नहीं अपितु मानसिक रोगों के बचाव के लिए खेलकूद काफी उपयोगी सिद्ध हो रहा है।

शारीरिक औषधियों के मामलों में प्रयुक्त बहुत सी तकनीकों की खोज प्रशिक्षकों ने खेल मैदान या व्यायामशालाओं में की है। आज औषधि तथा शारीरिक प्रशिक्षण के बीच घनिष्ठ संबंध स्थापित हो रहा है, जिससे एथलेटिक्स प्रशिक्षण के क्षेत्र में होने वाली प्रगति का उपयोग चिकित्सा क्षेत्र में किया जा रहा है। हिमाचल का किशोर व युवा जहां आज स्कूल व महाविद्यालय स्तर पर नशे की चपेट में भी आ रहा है, इस भयानक दानव से बचने के लिए हमें अपनी पीढ़ी को फिटनेस के लिए प्रेरित करना होगा, तभी भविष्य में प्रदेश व देश को फिट नागरिक मिल पाएंगे।

हिमाचली लेखकों के लिए

लेखकों से आग्रह है कि इस स्तंभ के लिए सीमित आकार के लेख अपने परिचय तथा चित्र सहित भेजें। हिमाचल से संबंधित उन्हीं विषयों पर गौर होगा, जो तथ्यपुष्ट, अनुसंधान व अनुभव के आधार पर लिखे गए होंगे।                                       -संपादक

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