अंतरराष्ट्रीय खेल ढांचे को संभालो

भूपिंदर सिंह

राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रशिक्षक

कुछ दशकों से राष्ट्रीय स्तर के खेल परिणामों में काफी उन्नति हुई है। इस का मुख्य कारण खेल ढांचे में वैज्ञानिक तकनीकी से आधुनिकीकरण है। इस बात को ध्यान में रख कर पूर्व मुख्यमंत्री प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल ने अपने पहले कार्यकाल में आधुनिक खेल ढांचे की रूप रेखा तैयार करवा कर विभिन्न योजनाओं पर कार्य शुरू करवाया तथा अपने दूसरे कार्यकाल में अधिकतर योजनाओं को पूरा भी करवा दिया था। बिलासपुर के लुहणू में बने खेल परिसर के लिए पूर्व मंत्री व वर्तमान में कोट कहलूर के विधायक ठाकुर राम लाल के प्रयास लगातार बने रहे। हिमाचल प्रदेश के पास आज तीन सिंथेटिक ट्रैक, हाकी के लिए दो ऐस्ट्रो ट्रर्फ, कई जिलों में इंडोर स्टेडियम तथा कई प्रकार की अतिआधुनिक खेल सुविधा विकसित है…

हिमाचल प्रदेश की पहाड़ी भौगोलिक धरा को देखते हुए यहां पर लंबे चौड़े मैदानों की कल्पना करना बेमानी है। हिमाचल प्रदेश के पास आजादी से पहले विरासत में पहाड़ी राजाओं द्वारा प्रजा से निर्मित किए गए मैदानों में मंडी में पड्डल, सुंदरनगर में महाराज लक्ष्मण सेन स्मारक महाविद्यालय का खेल मैदान, चंबा व नाहन के चौगान, कुल्लू का ढालपुर मैदान, सुजानपुर व जयसिंहपुर के बड़े-बड़े मैदानों सहित और भी कई जगह मैदान बनवाए गए थे। इन मैदानों पर प्रजा के लिए मेले उत्सवों का आयोजन किया जाता था। बड़े मैदानों पर राजाओं की सेना परेड भी करती थी। आजादी के बाद हिमाचल प्रदेश में बहुत अधिक शिक्षा संस्थान खुले और जगह व आवश्यकतानुसार खेल मैदान भी बनाए गए। इन मैदानों पर प्रदेश के लाखों बच्चे, किशोर व युवा प्रति दिन खेल व सामान्य फिटनेस करते हैं।

कुछ दशकों से राष्ट्रीय स्तर के खेल परिणामों में काफी उन्नति हुई है। इस का मुख्य कारण खेल ढांचे में वैज्ञानिक तकनीकी से आधुनिकीकरण है। इस बात को ध्यान में रख कर पूर्व मुख्यमंत्री प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल ने अपने पहले कार्यकाल में आधुनिक खेल ढांचे की रूप रेखा तैयार करवा कर विभिन्न योजनाओं पर कार्य शुरू करवाया तथा अपने दूसरे कार्यकाल में अधिकतर योजनाओं को पूरा भी करवा दिया था। बिलासपुर के लुहणू में बने खेल परिसर के लिए पूर्व मंत्री व वर्तमान में कोट कहलूर के विधायक ठाकुर राम लाल के प्रयास लगातार बने रहे। हिमाचल प्रदेश के पास आज तीन सिंथेटिक ट्रैक, हाकी के लिए दो ऐस्ट्रो ट्रर्फ, कई जिलों में इंडोर स्टेडियम तथा कई प्रकार की अतिआधुनिक खेल सुविधा विकसित है। अनुराग ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश में क्रिकेट स्टेडियम धर्मशाला व नादौन में बनवाए हैं। इस युवा खेल प्रशासक को धर्मशाला में क्रिकेट स्टेडियम बनाने पर इतनी प्रसिद्धि मिली कि वह हमीरपुर से लोकसभा का चुनाव जीतकर संसद में पहुंच गया। आज भारत सरकार में राज्य मंत्री है। क्रिकेट का खेल ढांचा तो चार दिवारी में सुरक्षित है मगर अन्य खेलों का आधार भूत ढांचा लावारिस पड़ा अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। हमीरपुर, धर्मशाला व बिलासपुर के सिंथेटिक ट्रैक यूं ही लावारिस पड़े हैं। लोगों के घूमने के लिए पार्क बने हैं। करोड़ों रुपए की इस अंतरराष्ट्रीय खेल सुविधा को यू ही बरबाद किया जा रहा है।

युवा सेवाएं एवं खेल विभाग व जिला उपायुक्तों को चाहिए कि वे अपने-अपने जिलों में वहां के खिलाडि़यों व जिला खेल परिषद के साथ मिल बैठ कर सार्थक हल निकालें जिस से खिलाडि़यों को असुविधा न हो और करोड़ों रुपए की इस अंतरराष्ट्रीय खेल सुविधा की सुरक्षा के साथ-साथ सदुपयोग भी हो। हिमाचल प्रदेश के इंडोर स्टेडियमों का हाल भी ठीक नहीं है, वहां पर सुधार की बहुत जरूरत है। इंडोर खेलों के खिलाडि़यों को प्ले फील्ड का हमेशा राज्य में टोटा ही रहा है। ऊना व मंडी के तरणताल वर्षों से सुखे पड़े हैं। यहां से कौन तैराक निकाला इस का पता खेल विभाग के पास नहीं है। हिमाचल प्रदेश के अधिकांश शिक्षा संस्थानों के पास जिला व उपमंडल मुख्यालय स्तर पर खेल मैदानों का अभाव है। निजी स्कूलों के पास तो मैदानों के नाम पर सुबह की प्रार्थना सभा करने के लिए भी स्थान नहीं है। ये बिना खेल मैदानों वाले शिक्षा  संस्थान अपनी वार्षिक खेल प्रतियोगिताएं जिला स्तर पर बनी अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्ले फील्ड पर ही करवाते हैं तथा इन संस्थाओं के खिलाड़ी विद्यार्थी भी प्रति दिन यहीं ट्रेनिंग करते हैं। इसलिए भी इन अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाओं का उचित प्रबंधन व देखभाल जरूरी हो जाती है।

हमीरपुर व धर्मशाला के सिंथेटिक ट्रैकों पर विभिन्न शिक्षा संस्थानों के सैकड़ों खिलाड़ी विद्यार्थियों को ट्रेनिंग करते देखा जा सकता है। यही कारण है कि अधिकतर राज्य स्तर की एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में हमीरपुर व धर्मशाला आगे रहते हैं। यही हाल इंडोर खेलों का भी है। मुख्यालय स्थित इंडोर स्टेडियमों का सभी शिक्षा संस्थान उपयोग करते हैं। यहां पर भी सभी को समय मिले व सुविधाओं को भी हानि न हो, इस के लिए भी सही प्रबंधन जरूरी है। सफाई व सही रख-रखाव के लिए फिटनेस वालों को भी अलग समय रख कर फीस लेने का प्रावधान रखना चाहिए ताकि फीस की राशि से सफाई कर्मचारी रखे जा सकें। राज्य में बनी इन उच्च स्तरीय प्ले  फील्ड की सुविधा अधिक से अधिक नए व प्रतिभा खोज में चयनित खिलाडि़यों को सरलता से मिलनी चाहिए तथा यह भी सुनिश्चित करें कि ये सुविधाएं अधिक देर तक ठीक-ठाक चलें, इसलिए इन का रख रखाव भी ठीक हो। अभी समय है खेल विभाग व खेल संघों को जिला उपायुक्तों के सहयोग से इस अतिआधुनिक अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाओं को बरबाद होने से बचा कर वर्तमान व भविष्य के खिलाडि़यों को सुपुर्द करना होगा ताकि इस बर्फ के प्रदेश के लोग अपने यहां प्रशिक्षण प्राप्त कर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विजय पताका लहरा कर प्रदेश व देश को गौरव प्रदान कर सकें। 

ई-मेल-bhupindersinghhmr@gmail.com

हिमाचली लेखकों के लिए

लेखकों से आग्रह है कि इस स्तंभ के लिए सीमित आकार के लेख अपने परिचय तथा चित्र सहित भेजें। हिमाचल से संबंधित उन्हीं विषयों पर गौर होगा, जो तथ्यपुष्ट, अनुसंधान व अनुभव के आधार पर लिखे गए होंगे।

-संपादक

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