खेलों को खेल की भावना से खेलो

Nov 8th, 2019 12:06 am

भूपिंदर सिंह

राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक

खेल चाहे वह क्रिकेट का हो, फुटबाल का हो या फिर एथलेटिक्स का, सभी जगह पैसा ही सब कुछ बनता जा रहा है। इसी व्यवस्था की दौड़ में खेलों में रिश्वत, सट्टे और डोपिंग की नई शब्दावली विकसित हुई है। यह शब्दावली केवल रेस कोर्स के मैदानों पर नहीं बल्कि दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित ओलंपिक के मैदान तक सुनाई देने लगी है। आधुनिक ओलंपिक खेलों को पुनर्जीवित करने का श्रेय फ्रांस के प्रोफेसर कुवर्टिन को जाता है। इन्हीं को हम आधुनिक ओलंपिक खेलों का जन्मदाता कहते हैं। कुवर्टिन का विचार था कि विश्व युद्ध से दुनिया को बचाने तथा मानवता के दुख को कम करने के लिए ओलंपिक जैसी विशाल अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता सहायक होगी…

वर्तमान में व्यवसायिकता की अंधी दौड़ में सारी नैतिकता और मर्यादाओं को तिलांजलि दी जा रही है। खेल भी व्यवसायिकता की अंधी दौड़ में पीछे नहीं रहना चाहते हैं। कभी मैत्रीप्रेम और भाईचारे का संदेश देने वाले खेल अब मात्र धन कमाने का जरिया बन गए हैं। खेल चाहे वह क्रिकेट का हो फुटबाल का हो, या फिर एथलेटिक्स का, सभी जगह पैसा ही सब कुछ बनता जा रहा है। इसी व्यवस्था की दौड़ में खेलों में रिश्वत, सट्टे और डोपिंग की नई शब्दावली विकसित हुई है। यह शब्दावली केवल रेस कोर्स के मैदानों पर नहीं बल्कि दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित ओलंपिक के मैदान तक सुनाई देने लगी है। आधुनिक ओलंपिक खेलों को पुनर्जीवित करने का श्रेय फ्रांस के  प्रोफेसर कुवर्टिन को जाता है। इन्हीं को हम आधुनिक ओलंपिक खेलों का जन्मदाता कहते हैं। कुवर्टिन का विचार था कि विश्व युद्ध से दुनिया को बचाने तथा मानवता के दुख को कम करने के लिए ओलंपिक जैसी विशाल अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता सहायक होगी। आज गैर पेशेवर एथलेटिक की विश्व संस्था  अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स महासंघ विश्व एथलेटिक्स प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने पर ़60,000 तथा विश्व रिकार्ड बनाने पर 1,00,000 और देता है।

फुटबाल क्लब में खिलाडि़यों को करार करने के लिए लाखों डालर मिलते हैं। ओलंपिक या अन्य प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता किस शहर में होगी, इस बात के लिए रिश्वत दी जा रही है। क्योंकि किसी खेल की विश्व प्रतियोगिता में अरबों डालर का व्यवसाय हो जाता है। आज विश्व में कई खिलाड़ी विश्व के धनपतियों की श्रेणी में आते हैं। क्रिकेट शुरू से ही पेशेवर खेल रहा है, धन के बदले में मैच खेलना इसका चलन रहा है, मगर राष्ट्रीयता, खेल की भावना तथा खेल के उच्च नियमों की गरिमा हमेशा मौजूद रही है। आज पूरा का पूरा क्रिकेट तंत्र सट्टे तथा पूर्व में निर्णय का शिकार नजर आ रहा है। यह खेल गरिमा के लिए न धोया जाने वाला दाग है। भारत में लोगों के पास मनोरंजन के दो साधन हैं। फिल्म तथा क्रिकेट यह दोनों ही आज अंडरवर्ल्ड के गुलाम नजर आ रहे हैं। लोग दीवानगी की हद तक दोनों को देखते हैं मगर देश के युवाओं को दिशा देने वाले यह दो बड़े मनोरंजन उद्योग आज किन लोगों के पास गिरवी पड़े हैं, यह भारत के चाहने वालों के लिए सोचने का विषय है। खेल कोई भी हो खेल गरिमा को चोट पहुंचाने के विरुद्ध आवाज उठानी चाहिए। सट्टेबाजों ने पहले ही लोगों को सट्टे में लगाया, फिर खिलाडि़यों के जमीर तक को खरीद लिया। मैच फिक्सिंग के  मामले इस के स्पष्ट उदाहरण हैं। संसार में लोकप्रिय खेलों में धन की बहुत अधिकता है। इस से अब देश  खिलाडि़यों को शक की नजर से देखेगा।

विश्व व्यापार में कड़ी प्रतिस्पर्धा हो गई है। अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को पूरे विश्व की मंडी चाहिए। आज कैसे भी वस्तु को उसके विक्रय के लिए विज्ञापन और इसके लिए विश्व स्तर प्रतियोगिता और उनके स्टार खिलाड़ी चाहिए होते हैं जो विज्ञापन देते हैं। खिलाड़ी को सम्मान के साथ करोड़ों डालर की आय भी हो रही है। यह एक बड़ा कारण है कि खेल गैर पेशेवर से पेशेवर हो गए हैं। प्रतिबंधित दवा का सेवन पिछले कई वर्षों से खेलों में हो रहा है। खिलाडि़यों के पौष्टिक आहार में प्रतिबंधित दवाओं के अंश पाए जाते रहे हैं। मगर खिलाड़ी इस संदेश को मानने के लिए तैयार नहीं है कि वे विज्ञान की उच्च तकनीकी से कोई बच नहीं सकता है। हर देश में डोप निरीक्षण के लिए  करोड़ों रुपए का बजट रखा होता है। प्रतिबंधित दवाओं का प्रचलन तो खेलों में शुरू से ही था मगर चोरी के बाद सीनाजोरी आज खेलों में देखने को मिल रही है। अभी भी समय है अगर खेलों को इस अत्यधिक व्यावसायिकता से नहीं बचाया गया तो रिश्वत, सट्टे व डोपिंग का दानव खेलों की पवित्र भावना को निगल जाएगा। सभी राज्य की तरह हिमाचल प्रदेश के उभरते खिलाडि़यों में डोपिंग का चलन बढ़ रहा है जो राज्य की खेलों के लिए अच्छा संकेत नहीं है। किशोरों व युवाओं को प्रतिबंधित दवाओं व सहायक आहार में फर्क  के बारे में शिक्षित करना होगा। राज्य में चल रहे हजारों जिंमों में स्वास्थ्य सुधार रहे लोगों को भी सहायक आहार के बारे में शिक्षित करना होगा। क्रिकेट मैचों व अन्य जगह पर लग रहे सट्टे से कई घरों को आर्थिक रूप से तबाह होने से प्रशासन को बचाना होगा। उभरते खिलाडि़यों में यह भावना भरनी होगी कि वे खेल को खेल की भावना से ही खेलें ताकि खेलों का गौरव बरकरार रहे। 

ई-मेल- bhupindersinghhmr@gmail.com

हिमाचली लेखकों के लिए

लेखकों से आग्रह है कि इस स्तंभ के लिए सीमित आकार के लेख अपने परिचय तथा चित्र सहित भेजें। हिमाचल से संबंधित उन्हीं विषयों पर गौर होगा, जो तथ्यपुष्ट, अनुसंधान व अनुभव के आधार पर लिखे गए होंगे।

-संपादक

 

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