जयराम सरकार के दो साल

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री

वरिष्ठ स्तंभकार

जयराम सरकार को इस बात का श्रेय देना होगा कि उसने विभिन्न स्तरों पर फैली भ्रष्टाचार की जड़ों को उखाड़ने की दिशा में जाने का संकल्प ही नहीं लिया बल्कि उस दिशा में व्यावहारिक रूप से काम करना भी शुरू कर दिया है। शिक्षा विभाग में फैले छात्रवृत्ति घोटाले की खुल रही परतें इसका प्रमाण हैं। वैसे तो हर सरकार स्थापना के समय भ्रष्टाचार को समाप्त करने का संकल्प लेती ही है, लेकिन राजनीति के गली, मुहल्लों से वाकिफ  लोग जानते हैं कि उनका इरादा कभी भी उस संकल्प को व्यावहारिक स्तर पर उतारने का नहीं होता बल्कि अनेक बार तो वे अपनी भविष्य की राजनीति की सुरक्षा हेतु स्वयं भी उस भ्रष्टाचारी सिस्टम का हिस्सा बन जाते हैं। जयराम ठाकुर का उन सरकारों से यही गहरा अंतर है। जयराम ठाकुर  अपने संकल्प को जमीनी धरातल पर उतार रहे हैं, जिसके कारण आमजन का उनके प्रति विश्वास बढ़ा है…

कल शिमला में हिमाचल प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी ने दो साल पूरे होने पर एक विशाल जनसभा का आयोजन किया था। इसमें शिरकत करने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कार्यवाहक अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा विशेष रूप से आए थे। कड़ाके की ठंड में भी जितनी बड़ी संख्या में लोग इस सभा में भाग लेने के लिए प्रदेश के हर हिस्से से पहुंचे, उसके हिसाब से रैली को सफल कहा जा सकता है। किसी भी सरकार की सफलता का पैमाना क्या माना जा सकता है? इसके दो धरातल माने जा सकते हैं। पहला धरातल सामान्य जनता का है और दूसरा धरातल उस पार्टी या संगठन का है जिसकी सरकार प्रदेश में होती है। इसलिए जयराम सरकार की कारगुजारी को इन दो धरातलों पर ही परखना होगा। हिमाचल प्रदेश में चाहे बिहार व तमिलनाडु के स्तर का भ्रष्टाचार कभी नहीं रहा, लेकिन फिर भी पिछले दो दशकों से भ्रष्टाचार का एक पूरा सिस्टम इस पहाड़ी प्रदेश में भी पैर पसार गया था। यहां तक कि प्राइवेट विश्वविद्यालयों की स्थापना और कार्यप्रणाली की नींव भी कुछ सीमा तक अंधकार के आवरण में घिरी हुई थी। जयराम सरकार को इस बात का श्रेय देना होगा कि उसने विभिन्न स्तरों पर फैली भ्रष्टाचार की जड़ों को उखाड़ने की दिशा में जाने का संकल्प ही नहीं लिया बल्कि उस दिशा में व्यावहारिक रूप से काम करना भी शुरू कर दिया है। शिक्षा विभाग में फैले छात्रवृत्ति घोटाले की खुल रही परतें इसका प्रमाण हैं। वैसे तो हर सरकार स्थापना के समय भ्रष्टाचार को समाप्त करने का संकल्प लेती ही है, लेकिन राजनीति के गली, मुहल्लों से वाकिफ  लोग जानते हैं कि उनका इरादा कभी भी उस संकल्प को व्यावहारिक स्तर पर उतारने का नहीं होता बल्कि अनेक बार तो वे अपनी भविष्य की राजनीति की सुरक्षा हेतु स्वयं भी उस भ्रष्टाचारी सिस्टम का हिस्सा बन जाते हैं। जयराम ठाकुर का उन सरकारों से यही गहरा अंतर है। जयराम ठाकुर  अपने संकल्प को जमीनी धरातल पर उतार रहे हैं, जिसके कारण आमजन का उनके प्रति विश्वास बढ़ा है। जयराम ठाकुर का प्रदेश की आम जनता से सीधा संवाद उनकी सबसे बड़ी ताकत है। प्रदेश की जनता को लगता है उनका अपना ही कोई आदमी, जो उन्हीं के बीच का है, मुख्यमंत्री बन गया है। इससे जन और जननायक के बीच का द्वैत समाप्त हो जाता है , जो शासन के आतंक को समाप्त करता है, लेकिन असली प्रश्न है हिमाचल प्रदेश को आर्थिक लिहाज से स्वावलंबी कैसे बनाया जाए? यह किसी भी सरकार का सपना हो सकता है, लेकिन सरकार में ऐसा सपना लेने की इच्छा भी होनी चाहिए। जब सरकार चलाने वाले भ्रष्टाचार के सपनों में खो जाते हैं तो हिमाचल के भविष्य के सपने आने बंद हो जाते हैं। हिमाचल के साथ अब तक यही होता आया है, लेकिन जयराम ठाकुर की सरकार जानती है कि हिमाचल की उन्नति का रास्ता उसके पर्यटन में से ही निकलेगा। इसके लिए हिमाचल के प्राकृतिक स्थलों को सजाना-संवारना ही नहीं होगा बल्कि पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए पर्याप्त सुविधाओं की व्यवस्था भी करनी होगी। जयराम ठाकुर की सरकार उसी दिशा में आगे बढ़ रही है। सड़कों को सजाने-संवारने और उनको चौड़ा करने की जिस कवायद में यह सरकार लगी है, उससे निश्चय ही हिमाचल प्रदेश की तकदीर बदलेगी।

प्रदेश में वायु मार्ग की सुविधाओं को बढ़ाने और रेल मार्ग में बढ़ोतरी करने के लिए भी प्रयास करना होगा। रेल मार्ग जब दौलतपुर चौक से तलवाड़ा के साथ जुड़ जाएगा, तो यह रास्ता जम्मू-कटरा तक खुल जाएगा। उधर, भानुपल्ली से लेह तक के रेल मार्ग पर काम चालू हो जाने से हिमाचल के पर्यटन को ही पंख नहीं लग जाएंगे बल्कि देश की सुरक्षा भी मजबूत होगी। एक ऐसा अनछुआ क्षेत्र है जिसकी ओर ध्यान देकर सरकार पर्यटन के साथ राष्ट्रीय एकता की दिशा में भी ऐतिहासिक भूमिका अदा कर सकती है। वह है चंबा से भद्रवाह तक के लिए बस की सुविधा प्रदान करना। अभी तक जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित राज्य की राजधानी तक पहुंचने का एक ही सड़क मार्ग है। वह पंजाब में पठानकोट से होकर जाता है। ऐसा एक दूसरा रास्ता भी उपलब्ध है जिसकी ओर किसी भी सरकार ने ध्यान नहीं दिया। वह रास्ता चंबा जिला से जम्मू-कश्मीर के भद्रवाह में जाता है। भद्रवाह से यह मार्ग बटोट से होकर श्रीनगर पहुंचता है। जम्मू-कश्मीर के हिस्से की सड़क बनी हुई है और उसका अधिकांश हिस्सा राष्ट्रीय राजमार्ग है। यदि हिमाचल प्रदेश का हिस्सा जो मात्र पंद्रह-बीस किलोमीटर है, पक्का कर दिया जाए तो श्रीनगर जाने का यह दूसरा राजमार्ग बन जाएगा। यह सड़क मार्ग कांगड़ा को श्रीनगर से जोड़ेगा और कश्मीर को जाने वाले बहुत से पर्यटक इस रास्ते जाना चाहेंगे ताकि हिमाचल प्रदेश भी देखा जा सके। दूसरा क्षेत्र जिसका श्रेय जयराम ठाकुर को दिया जा सकता है, वह संगठन का क्षेत्र है। जयराम ठाकुर ने प्रयास किया है कि संगठन के भीतर की दरारों को पाटा जाए ताकि सरकार चलाने में दिक्कतें न आएं। यद्यपि यह काम बहुत कठिन है, फिर भी कहना न होगा कि ठाकुर ने इसमें बहुत हद तक सफलता प्राप्त कर ली है। आज भाजपा प्रदेश में समरस संगठन माना जा सकता है, यह इस सरकार की दूसरी सबसे बड़ी सफलता कही जा सकती है।

ईमेलः kuldeepagnihotri@gmail.com

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