एथलेटिक्स नर्सरी के बागबान केहर सिंह

भूपिंदर सिंह

राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रशिक्षक

केहर सिंह पटियाल का जन्म हमीरपुर शहर के साथ लगते गांव वारल में पिता स्वर्गीय मिलखी राम पटियाल व माता स्वर्गीय शाहवो देवी के घर 11 दिसंबर 1959 को हुआ। तत्कालीन राजकीय उच्चतर माध्यमिक बाल पाठशाला हमीरपुर जो अब वरिष्ठ माध्यमिक बाल पाठशाला हमीरपुर है, से 11वीं कक्षा पास की थी। पाठशाला में केहर सिंह पटियाल ने तत्कालीन डीपीई भीम सिंह सेन के प्रशिक्षण में फुटबाल व हाकी खेलना शुरू किया और पाठशाला में डीपीई साहब द्वारा आयोजित एथलेटिक्स मीट में 1500 मीटर की दौड़ को सम्मानजनक समय में दौड़ कर भविष्य के लिए एथलेटिक्स को अपना लिया…

हिमाचल प्रदेश में एथलेटिक्स का इतिहास बहुत पुराना नहीं है। तीन दशक पूर्व हिमाचल प्रदेश में खेलों का स्तर बहुत नीचे था। एथलेटिक्स सभी खेलों की जननी है। हिमाचल प्रदेश में एथलेटिक्स के लिए आज जैसा तैयार अंतरराष्ट्रीय आधारभूत ढांचा भी नहीं था। सीमित सुविधाओं में प्रशिक्षण कार्यक्रम चला कर राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना हिमाचल प्रदेश के खिलाडि़यों के लिए आसमान से तारे तोड़ना जैसा था। इस सदी के शुरू होने के कई दशक पहले ही हिमाचल प्रदेश में भारतीय खेल प्राधिकरण ने शिलारू, बिलासपुर व धर्मशाला में खेल छात्रावासों को शुरू कर दिया था। शिलारू में विशेष क्षेत्र खेल योजना के अंतर्गत मध्य व लंबी दूरी की दौड़ों के लिए एक छात्रावास चला, जो बाद में बंद हो गया। उसी समय बिलासपुर व धर्मशाला में भी खेल छात्रावासों की शुरुआत हुई। पहले लड़कियों व लड़कों के लिए बिलासपुर में तथा एसपीडी, के अंतर्गत धर्मशाला में लड़कों के लिए प्रशिक्षण शुरू हुआ था। बाद में बिलासपुर लड़कों के लिए तथा धर्मशाला लड़कियों के लिए प्रशिक्षण केंद्र बने। धर्मशाला के साई खेल छात्रावास को पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का सौभाग्य भारतीय खेल प्राधिकरण के एथलेटिक्स प्रशिक्षक केहर सिंह पटियाल द्वारा प्रशिक्षित मंजु कुमारी को जाता है। जब कई वर्षों तक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलने के बाद भी धर्मशाला खेल छात्रावास राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने में असफल रहा था, उसी समय केहर सिंह की बदली धर्मशाला होती है। यहां पर सही प्रशिक्षण कार्यक्रम चला कर राष्ट्रीय स्कूली खेलों में हिमाचल प्रदेश को स्वर्ण पदक दिला कर प्रशिक्षक केहर सिंह पटियाल ने अपनी प्रशिक्षण प्रतिभा का पहला परिचय दे दिया था। केहर सिंह पटियाल का जन्म हमीरपुर शहर के साथ लगते गांव वारल में पिता स्वर्गीय मिलखी राम पटियाल व माता स्वर्गीय शाहवो देवी के घर 11 दिसंबर 1959 को हुआ। तत्कालीन राजकीय उच्चतर माध्यमिक बाल पाठशाला हमीरपुर जो अब वरिष्ठ माध्यमिक बाल पाठशाला हमीरपुर है, से 11वीं कक्षा पास की थी। पाठशाला में केहर सिंह पटियाल ने तत्कालीन डीपीई भीम सिंह सेन के प्रशिक्षण में फुटबाल व हाकी खेलना शुरू किया और फिर एक दिन पाठशाला में डीपीई साहब द्वारा आयोजित एथलेटिक्स मीट में 1500 मीटर की दौड़ को सम्मानजनक समय में दौड़ कर भविष्य के लिए एथलेटिक्स को अपना लिया। राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर में कला स्नातक के प्रथम वर्ष में प्रवेश लेते ही नेहरू युवा केंद्र हमीरपुर में नियुक्त राष्ट्रीय क्रीड़ा संस्थान पटियाला के एथलेटिक्स प्रशिक्षक अजीत सिंह सोहता की देखरेख में मध्य व लंबी दूरी की दौड़ों का अभ्यास शुरू किया। कला स्नातक की डिग्री पास करने के बाद 1982 में हिमाचल प्रदेश पुलिस में भर्ती होकर सीएसआरएफ जो बाद में फर्स्ट बटालियन  में बदल गई, में पहली नियुक्ति मिली। पुलिस में एथलेटिक्स ट्रेनिंग को जारी रखा, हिमाचल प्रदेश पुलिस के मध्य व लंबी दूरी की दौड़ों के रिकार्डों को सुधारा। कई बार हिमाचल प्रदेश पुलिस खेलों का सर्वश्रेष्ठ धावक रहा। पुलिस ने 1985-86 के ट्रेनिंग सत्र में राष्ट्रीय क्रीड़ा संस्थान पटियाला से एथलेटिक्स प्रशिक्षक का कोर्स करवाने में पूरा सहयोग दिया। मई 1991 में हिमाचल प्रदेश पुलिस को अलविदा कह कर भारतीय खेल प्राधिकरण में पहली नियुक्ति उत्तर क्षेत्रीय केंद्र चंडीगढ़ में हुई। उसके बाद एक वर्ष तक एसपीडीए पटियाला में प्रशिक्षण का जिम्मा मिला। पटियाला से ट्रांसफर होकर एनएसटीसी जो शिवालिक पब्लिक स्कूल मोहाली में चल रहा था में आकर जुलाई 2000 तक नौकरी करने के बाद  एक बार फिर साई खेल छात्रावास में तबादला हुआ। 

पिछले 19 वर्षों में केहर सिंह पटियाल ने हिमाचल प्रदेश की इस खेल नर्सरी से कई दर्जन लड़कियों को प्रशिक्षित किया और राष्ट्रीय स्तर पर हिमाचल प्रदेश को पदक तालिका में स्थान दिलाया। धर्मशाला के भारतीय खेल प्राधिकरण छात्रावास में एथलेटिक्स तो शुरू कर दिया, मगर यहां पर 400 मीटर का ट्रैक तो दूर की बात थी, अपना 200 मीटर का घास का ट्रैक भी नहीं था। राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला के छोटे से खेल मैदान में हाकी व फुटबाल जो मैदान के दोनों छोरों पर खेले जा रहे होते थे, उन्हीं के  साथ एक दर्जन लड़कियों को एथलेटिक्स की ट्रेनिंग बहुत कठिनाई से देकर राष्ट्रीय स्तर पर पदक प्राप्त करना कहां आसान रहा होगा। 2012 में जब धूमल सरकार ने धर्मशाला में सिंथेटिक ट्रैक बिछवा दिया तो  केहर सिंह के प्रशिक्षण कौशल में अलग ही निखार देखने को मिला। सीमा देवी ने यूथ राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में नए राष्ट्रीय कीर्तिमान के साथ 3000 मीटर में स्वर्ण पदक जीत कर एशियाई यूथ एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भी भारत के लिए कांस्य पदक जीता। सीमा के कदम यहीं तक नहीं रुके। केहर सिंह के प्रशिक्षण में उसने क्वालिफाई कर यूथ ओलंपिक तक भारत का प्रतिनिधित्व किया। 31 दिसंबर को केहर सिंह पटियाल साई से सेवानिवृत्त होकर अपने शहर हमीरपुर में प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने के इच्छुक हैं। उनका कहना है कि अच्छा प्रशिक्षक बनने के लिए दशकों का अनुभव चाहिए होता है। आज हमारे पास अनुभव है और उसका लाभ प्रदेश व देश को मिलना चाहिए। केहर सिंह कहते हैं कि हर प्रशिक्षक का सपना होता है कि उसका शिष्य ओलंपिक में पहुंच कर देश के लिए पदक जीते, हम भी उसी सपने को साकार करने के लिए मरते दम तक प्रशिक्षण से जुड़े रहेंगे। हिमाचल प्रदेश खेल जगत जहां भारतीय खेल प्राधिकरण से केहर सिंह पटियाल को भावभीनी विदाई देता है वहीं पर हमीरपुर के अणु सिंथेटिक ट्रैक पर अगली प्रशिक्षण पारी के लिए उनका स्वागत करता है।

ई-मेल-bhupindersinghhmr@gmail.com

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