शारीरिक शिक्षा के ज्ञाता डा. आरसी कपिल

भूपिंदर सिंह

राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रशिक्षक

राकेश चंद कपिल का जन्म हमीरपुर जिला में भोरंज उपमंडल के बैरी गांव में पिता महंत राम कपिल व माता अजुध्या देवी के घर 12 दिसंबर 1951 को हुआ। पांच बहन-भाइयों में सबसे बडे़ राकेश ने प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय भरेड़ी स्कूल से पास कर राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर से 1973 में कला स्नातक की उपाधि प्राप्त करने के बाद अमरावती से शारीरिक शिक्षा में स्नातक व स्नातकोत्तर की उपाधि पास की। 1975 में अमरावती के प्रतिष्ठित शिवाजी कालेज ऑफ  एजुकेशन में शारीरिक शिक्षा की स्नातक कक्षाओं के लिए अध्यापन कार्य शुरू किया, बाद में इस संस्थान से प्राध्यापक की नियमित नौकरी शुरू की…

शिक्षा का मतलब मानव का संपूर्ण मानसिक व शारीरिक विकास है,  जिस के माध्यम से वह अपने जीवन में आने बाली हर छोटी-बड़ी चुनौतियों के ऊपर सफलतापूर्वक काबू पा कर जिंदगी को सुखी व चैन से जी सके। हजारों साल पहले भारत की शिक्षा पद्धति जब गुरुकुल मॉडल पर चलती थी तो उस समय भी शास्त्रों के साथ-साथ शारीरिक व शस्त्र विद्या का अध्ययन समान रूप से करवाया जाता था। आज जब हम विश्व के आधुनिक व विकसित देशों की शिक्षा प्रणाली को देखते हैं तो साफ पता चलता है कि वहां पर स्कूली स्तर पर विद्यार्थी के स्वास्थ्य के लिए आहार व व्यायाम का उचित प्रबंध किया गया है। जितनी देर विद्यार्थी स्कूल में रहता है उस समय उसके पौष्टिक भोजन के लिए प्रोटीन सहित अन्य सभी पोषक तत्त्वों वाला भोजन व शारीरिक विकास के लिए विभिन्न खेलों की कई प्ले फील्ड स्कूल परिसर में उपलब्ध हैं। विकसित देशों में शारीरिक शिक्षा का कार्य केवल कुछ विद्यार्थियों को खिलाड़ी बनाना ही नहीं है अपितु शिक्षा संस्थान में पड़ रहे हर विद्यार्थी की सामान्य फिटनेस का जिम्मा संस्थान के शारीरिक शिक्षा विभाग का होता है। भारत में आजादी के बाद जब शिक्षा के विकास पर बनी योजनाओं में शारीरिक शिक्षा का कागजों पर जिक्र तो जरूर था मगर किसी भी विश्वविद्यालय या कालेज में शारीरिक शिक्षा विषय का कोई जिक्र नहीं था। उस समय के शुरुआती दौर में स्कूलों व अन्य शिक्षा संस्थानों को शारीरिक शिक्षक के स्थान पर फिजिकल इंस्ईट्रर से काम चलाना पड़ता था। सेना के भूतपूर्व सैनिक जिन्होंने पीईटी कोर्स पास किया होता था, वे ही अधिकतर शिक्षा संस्थानों में पीईटी मास्टर होते थे। महाविद्यालय स्तर पर भी पीईटी का पद होता था बाद में डीपीई का पद सृजित हुआ और अब अन्य विषयों की तरह प्राध्यापक का पद होता है। ऐसा इसलिए भी था कि देश में स्नातकोत्तर डिग्री के लिए संस्थान ही नहीं थे। सिविल में वाईएमसीए शारीरिक शिक्षक बनने के लिए कोर्सेज चलाता था। उसी दौर में महाराष्ट्र के अमरावती में शारीरिक शिक्षा की पढ़ाई के शिक्षण व प्रशिक्षण के लिए निजी क्षेत्र में भी संस्थान शुरू हो चुके थे। उस समय उत्तर भारत में केवल पंजाब के पास पटियाला में एक शारीरिक शिक्षा का महाविद्यालय था। आज उत्तर भारत के राज्यों में कई दर्जन शारीरिक शिक्षा के महाविद्यालय हैं तथा कई विश्वविद्यालय के परिसर में भी शारीरिक शिक्षा में स्नातकोत्तर डिग्री व पीएचडी के लिए उच्च स्तरीय सुविधा है। मगर उस समय हिमाचल प्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों के विद्यार्थी भी शारीरिक शिक्षा में शिक्षक बनने के लिए अमरावती का रुख करते थे। आज से चार दशक पहले शारीरिक शिक्षक बनने के लिए राकेश चंद कपिल ने भी अमरावती के लिए ट्रेन पकड़ ली थी। सुविधाओं के अभाव में हिमाचल प्रदेश की कई प्रतिभाशाली संतानों को हिमाचल प्रदेश से पलायन करना पड़ा है। जब कोई और पालन-पोषण करता है तो नाम भी उसी का चलता है। इसलिए इन प्रतिभाओं को अपने ही राज्य में न तो परिचय मिलता है और न ही प्रश्रय। राकेश चंद कपिल जिन्हें अधिकतर लोग डाक्टर आरसी कपिल सर के नाम से जानते हैं उन्हें शारीरिक शिक्षा में स्नातकोत्तर डिग्री हासिल करने के बाद अपना शिक्षा जगत में कर्म क्षेत्र भी अमरावती को ही बनाना पड़ा। राकेश चंद कपिल का जन्म हमीरपुर जिला में भोरंज उपमंडल के बैरी गांव में पिता महंत राम कपिल व माता अजुध्या देवी के घर 12 दिसंबर 1951 को हुआ।

पांच बहन भाइयों में सबसे बडे़ राकेश ने प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय भरेड़ी स्कूल से पास कर राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर से 1973 में कला स्नातक की उपाधि प्राप्त करने के बाद अमरावती से शारीरिक शिक्षा में स्नातक व स्नातकोत्तर की उपाधि पास की। 1975 में अमरावती के प्रतिष्ठित शिवाजी कालेज ऑफ  एजुकेशन में शारीरिक शिक्षा की स्नातक कक्षाओं के लिए अध्यापन कार्य शुरू किया बाद में इस संस्थान से प्राध्यापक की नियमित नौकरी शुरू की। शिक्षण कार्य के साथ-साथ पीएचडी की उपाधि 1998 में प्राप्त करने के बाद अब तक  30 से अधिक शिष्यों को पीएचडी की उपाधि प्रदान करवाई। दर्जनों बार शारीरिक शिक्षा के राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय के सेमिनारों में भाग लिया तथा कई पेपर प्रकाशित हुए। शारीरिक शिक्षा व  खेल विज्ञान के कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय जनरल के संपादक मंडल के सदस्य रहे हैं। अमरावती विश्वविद्यालय की शारीरिक शिक्षा की कई कमेटियों के सदस्य भी रहे। एनसीटीई के सदस्य रहे इस दूरदर्शी प्रोफेसर का शारीरिक शिक्षा के विकास में अहम योगदान रहा है। डाक्टर राकेश चंद कपिल अमरावती जिले के कुछ  खेल संघों के मानद पदाधिकारी भी हैं। इस शिक्षक का स्वयंसेवी संस्थाओं में भी काफी योगदान रहा है। आर्चरी के अंतरराष्ट्रीय तकनीकी अधिकारी हैं। दिल्ली में आयोजित 1982 एशियाड में आर्चरी के प्रबंधन में भी तकनीकी अधिकारी के रूप में कार्य किया है। डाक्टर राकेश चंद कपिल सेवानिवृत्ति के बाद अपनी गृहिणी पत्नी निर्मला शर्मा व प्रोफेसर बेटे इंजीनियर आशीष के साथ अमरावती में ही रह रहे हैं। इनकी दो बेटियां सुनीता व मोनिका भी पिता की तरह पीएचडी हैं। अभी भी डाक्टर साहब कई पीएचडी स्कालर के गाइड हैं। अपने सेवाकाल में हिमालय प्रदेश से अमरावती आने वाले विद्यार्थियों की काफी सहायता की है और अब सेवानिवृत्ति के बाद शारीरिक शिक्षा में इतने लंबे अनुभव वाले इस प्रोफेसर की हिमाचल प्रदेश को भी जरूरत रहेगी।

ई-मेल-bhupindersinghhmr@gmail.com

हिमाचली लेखकों के लिए

लेखकों से आग्रह है कि इस स्तंभ के लिए सीमित आकार के लेख अपने परिचय तथा चित्र सहित भेजें। हिमाचल से संबंधित उन्हीं विषयों पर गौर होगा, जो तथ्यपुष्ट, अनुसंधान व अनुभव के आधार पर लिखे गए होंगे।  

-संपादक

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