एथलेटिक्स में बड़ा नाम जीत राम शर्मा

भूपिंदर सिंह

राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रशिक्षक

जीत राम शर्मा शिमला जिला के  चौपाल उपमंडल के दूरदराज गांव पुरों डाक घर सरैन के निवासी हैं। अपनी प्रारंभिक शिक्षा चौपाल से प्राप्त करने के बाद 1987 में हिमाचल प्रदेश सचिवालय में नौकरी शुरू की और आज सचिवालय के प्रशासनिक विभाग में कल्याण अधिकारी खेल के पद पर सेवाएं दे रहे हैं। नौकरी के साथ-साथ जीत राम ने शिमला की सड़कों पर दौड़ना भी जारी रखा। मास्टर एथलेटिक्स की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 13 बार भारत का प्रतिनिधित्व दस हजार मीटर व इक्कीस किलोमीटर हाफ मैराथन में किया। 2016 आस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में आयोजित 20वीं विश्व मास्टर एथलेटिक्स प्रतियोगिता में इक्कीस किलोमीटर हाफ  मैराथन में स्वर्ण पदक जीता है…

एथलेटिक्स में मानव विस्थापन की सभी क्रियाओं को मनुष्य किसी न किसी रूप में जीवन भर प्रतिदिन प्रयोग करता है। एथलेटिक्स में चलना, दौड़ना, कूदना व फेंकना सभी क्रियाओं को मानव तब से प्रयोग में ला रहा है जब से वह धरती पर आया है। अनंत काल से मावन अपने अस्तित्व को बचाने में प्रयासरत रहा है। लाखों वर्ष पूर्व जब प्राकृति अपने रौद्र रूप में थी मानव अपने को सुरक्षित रखने के लिए घने जंगलों की अंधेरी गुफाओं व पेड़ों पर सोने व आराम करने के लिए आशियाना तो बना सकता था मगर जंगली जानवरों से सुरक्षा व भोजन के लिए शिकार के पीछे दौड़ना नदी-नालों व खाइयों को कूदना व शिकार को पत्थर से मारना या किसी पर पत्थर फेंक कर हिंसक जानवरों से जान बचाने के लिए आज की इन एथलेटिक्स क्रियाओं का जन्म हुआ होगा। संसार में जितने भी शारीरिक क्षमता से खेले जाने वाले खेल हैं उन सब में मानव विस्थापन की क्रियाओं चलना दौड़ने, कूदने व फेंकने का प्रयोग किसी न किसी रूप में जरूर होता है। ईसा पूर्व ओलंपिक खेलों का जन्म ही एथलेटिक्स स्पर्धाओं से हुआ था। आज एथलेटिक्स शिक्षा का अनिवार्य अंग है। यह अलग बात है कि भारत में शिक्षा संस्थान अपने यहां एथलेटिक्स मीट वर्ष में एक बार करवा कर औपचारिकता पूरी कर लेते हैं। आज किसी भी खेल को जिला स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक हर आयु वर्ग में खेला जा रहा है। किशोरावस्था से ही आज अंडर 14 वर्ष आयु वर्ग के लिए प्रतियोगिताएं स्कूल व खेल संघों द्वारा करवाई जा रही है शारीरिक फिटनेस सभी विद्यार्थियों को जरूरी है और एथलेटिक्स व अन्य खेलों के माध्यम से फिटनेस असानी से करवाई जा सकती है। अधेड़ावस्था की तरफ जब मनुष्य चलता है तो उसे फिटनेस कार्यक्रम की जरूरत पड़ती है। क्योंकि इस उम्र में मांसपेशियों के आकार में गिरावट आना शुरू हो जाती है। इस समय फिटनेस के लिए कोई न कोई खेल जरूरी हो जाता है। जब खिलाड़ी जवानी के ढलान पर जब खेल छोड़ रहा होता है उसी समय मनोरंजक व फिटनेस के लिए मास्टर या वैटरन खेल शुरू हो जाते हैं।

भारत में मास्टर एथलेटिक्स का इतिहास यूरोप व अन्य देशों के मुकाबले काफी नया है। विकसित देशों में फिटनेस के प्रति जागरूकता बहुत पहले आ गई है। इस लिए वहां पर अधिक मास्टर या बैटरन खेल प्रतियोगिताएं होती रहती हैं। हिमाचल प्रदेश में बुजुर्ग एथलेटिक्स के प्रचार प्रसार में स्वर्गीय सुरेश पठानिया का बहुत योगदान रहा है। पठानिया साहब ने पहली बार हिमाचल प्रदेश के बुजुर्गों के लिए राज्य बैटरन एथलेटिक्स संघ का गठन चार दशक पहले ही कर दिया था। सुरेश पठानिया ने हिमाचल प्रदेश में जब यहां खेल अति पिछड़े थे तब राज्य के कई खेल संघों के गठन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आज बुजुर्गों के लिए कई तरह के संघ बन चुके हैं। एथलेटिक्स में बहुत से लोगों के लिए प्रतिस्पर्धा के अवसर है इसलिए कई लोग इस में आज भाग ले रहे हैं। मास्टर एथलेटिक्स में जीत राम शर्मा हिमाचल प्रदेश में जाना पहचान नाम है। जीत राम शर्मा शिमला जिला के  चौपाल उपमंडल के दूरदराज गांव पुरों डाक घर सरैन का निवासी है। अपनी प्रारंभिक शिक्षा चौपाल से प्राप्त करने के बाद 1987 में हिमाचल प्रदेश सचिवालय में नौकरी शुरू की और आज सचिवालय के प्रशासनिक विभाग में कल्याण अधिकारी खेल के पद पर सेवाएं दे रहे हैं। नौकरी के साथ साथ जीत राम ने शिमला की सड़कों पर दौड़ना भी जारी रखा। मास्टर एथलेटिक्स की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 13 बार भारत का प्रतिनिधित्व दस हजार मीटर व इक्कीस किलोमीटर हाफ मैराथन में किया। 2016 आस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में आयोजित 20वीं विश्व मास्टर एथलेटिक्स प्रतियोगिता में इक्कीस किलोमीटर हाफ  मैराथन में स्वर्ण पदक जीता है। मलेशिया के राजधानी कोलाल्मपुर में आयोजित एशियाई मास्टर एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक जीता है। एशियाई स्तर पर चार रजत व तीन कांस्य पदक विभिन्न प्रतियोगिताओं में जीते हैं।  2014 काठमांडू में जीतराम को भारत नेपाल अंतरराष्ट्रीय मैत्री अवार्ड  सहित 2015 में श्रीलंका, 2016 भूटान, 2017 थाईलैंड व 2018 दुबई-भारत अंतरराष्ट्रीय मैत्री अवार्ड मिले हैं। 2017 में ही महाराष्ट्र के पुणे में जीत राम को पराईड ऑफ  नेशन अवार्ड मिला है। 2015 में हिमाचल प्रेरणा स्रोत अवार्ड बिलासपुर के घुमारवीं में मिला है। जीत राम शर्मा इस वर्ष सचिवालय की नौकरी से तो सेवानिवृत्त हो रहे हैं मगर दौड़ को वह लंबे समय तक जारी रखना चाहते हैं। हिमाचल प्रदेश के किशोरों व युवाओं को भविष्य में एथलेटिक्स के प्रति जागरूक करने  की भी सोच जीत राम शर्मा रखते हैं।

ई-मेल- bhupindersinghhmr@gmail.com

हिमाचली लेखकों के लिए

लेखकों से आग्रह है कि इस स्तंभ के लिए सीमित आकार के लेख अपने परिचय तथा चित्र सहित भेजें। हिमाचल से संबंधित उन्हीं विषयों पर गौर होगा, जो तथ्यपुष्ट, अनुसंधान व अनुभव के आधार पर लिखे गए होंगे।

-संपादक

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