कांग्रेस का आत्ममंथन

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री

वरिष्ठ स्तंभकार

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चिदंबरम ने आम आदमी पार्टी को जीत की बधाई दी और इस बात पर खुशी जाहिर की कि केजरीवाल ने भाजपा को हराकर एक बहुत बड़ा राष्ट्रीय कार्य किया है। चिदंबरम की यह प्रतिक्रिया क्या कांग्रेस की आधिकारिक प्रतिक्रिया थी? यह भ्रम जल्दी ही टूट गया। पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी और कांग्रेस की महिला नेत्री शर्मिष्ठा मुखर्जी ने चिदंबरम से सीधा सवाल किया कि क्या अब कांग्रेस ने भाजपा को हराने की असाइनमेंट दूसरे राजनीतिक दलों को आउटसोर्सिंग पर दे दी है? चिदंबरम भला क्या उत्तर देते? उनका कष्ट व्यक्तिगत भी था और थोड़ा अलग प्रकार का भी। उन पर आर्थिक अपराधों के अंतर्गत मुकदमा चल रहा है और वे काफी अरसा जेल में रह कर जमानत पर घर आए हैं…

दिल्ली के विधानसभा चुनावों में सोनिया कांग्रेस की भयंकर पराजय के बाद वहां आत्ममंथन की सुगबुगाहट सुनाई दे रही है। विधानसभा के 2015 में हुए चुनावों में भी कांग्रेस को कोई सीट नहीं मिली थी और अब 2020 के चुनावों में भी उसे कोई सीट नहीं मिली है, लेकिन पांच साल पहले उसे 19 प्रतिशत वोट मिल गए थे, लेकिन इस बार वे सारे वोट छिटक गए और मामला चार प्रतिशत पर पहुंच गया। इतना ही नहीं, पार्टी के 63 प्रत्याशियों की जमानत भी जब्त हो गई। यह पार्टी के लिए सचमुच अपमानजनक था। यह एक प्रकार से पार्टी के  भीतर भूकंप आने जैसी स्थिति थी। जाहिर था पार्टी के अंदर इस स्थिति पर प्रतिक्रिया होती, लेकिन पहली प्रतिक्रिया अपनी दोनों टांगें टूटी होने के बावजूद पड़ोसी की टूटी हुई एक टांग पर ख़ुशी मनाने जैसी थी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चिदंबरम ने आम आदमी पार्टी को जीत की बधाई दी और इस बात पर खुशी जाहिर की कि केजरीवाल ने भाजपा को हराकर एक बहुत बड़ा राष्ट्रीय कार्य किया है। चिदंबरम की यह प्रतिक्रिया क्या कांग्रेस की आधिकारिक प्रतिक्रिया थी? यह भ्रम जल्दी ही टूट गया। पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी और कांग्रेस की महिला नेत्री शर्मिष्ठा मुखर्जी ने चिदंबरम से सीधा सवाल किया कि क्या अब कांग्रेस ने भाजपा को हराने की असाइनमेंट दूसरे राजनीतिक दलों को आउटसोर्सिंग पर दे दी है? चिदंबरम भला क्या उत्तर देते? उनका कष्ट व्यक्तिगत भी था और थोड़ा अलग प्रकार का भी।

उन पर आर्थिक अपराधों के अंतर्गत मुकदमा चल रहा है और वे काफी अरसा जेल में रह कर जमानत पर घर आए हैं। उनको लगता होगा कि अब कांग्रेस तो निकट भविष्य में भाजपा को गद्दी से हटा नहीं पाएगी, लेकिन पुनः जेल यात्रा से बचने के लिए भाजपा का शीघ्रातिशीघ्र गद्दी से हटना जरूरी है। इसलिए जो भी भाजपा को हराए वही वंदनीय हैं, लेकिन बाकी लोगों को जेल का इतना खतरा नहीं है। वे चिदंबरम से असहमत ही नहीं दिखाई दिए बल्कि उन्होंने उसे आड़े हाथों भी लिया। जयराम रमेश ने गहराई से अपनी पराजय का विश्लेषण किया है। उनका कहना है कि कांग्रेस को केवल आत्ममंथन ही नहीं करना चाहिए बल्कि अपने आप को पुनः परिभाषिक भी करना चाहिए। आखिर सोनिया गांधी कांग्रेस को आगे करके सत्ता क्यों लेना चाहती हैं? सत्ता का उद्देश्य क्या है? कांग्रेस का वैचारिक अनुष्ठान क्या है।

रमेश के अनुसार इन सभी प्रश्नों पर एक बार फिर से विचार करने का अवसर आ गया है। उनका कहना है वर्तमान में पार्टी ही भारत की राजनीति में अप्रासंगिक हो गई है। यह प्रश्न बहुत ही महत्त्वपूर्ण है। क्या आज के राजनीतिक परिवेश और देश को दरपेश समस्याओं की पृष्ठभूमि में कांग्रेस की कोई उपयोगिता रह गई है। वैसे महात्मा गांधी ने तो इस उपयोगिता पर 1947 में ही प्रश्न चिन्ह लगा दिया था जब उन्होंने नेहरू को सुझाव दिया था कि कांग्रेस को भंग कर देना चाहिए। रमेश ने कांग्रेस नेताओं की कार्य शैली पर भी प्रश्न उठाया और उसे बदलने की बात की। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे लोगों में से अहंकार अभी भी गया नहीं है। वीरप्पा मोइली तो उससे भी दो कदम आगे निकल गए। उनका कहना था कि सोनिया कांग्रेस पर सर्जिकल स्ट्राइक की सख्त जरूरत है। उसके बिना इसमें जान नहीं आ सकती, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह स्ट्राइक कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर करने की जरूरत है या फिर उन लोगों के भवनों पर जो पार्टी पर कुंडली मार कर बैठे हैं? जहां तक पार्टी में परिवर्तन की बात है वह तो कांग्रेस में हो ही रहा है। पहले राहुल गांधी पार्टी अध्यक्ष थे, फिर उनको हटा कर सोनिया गांधी को बना दिया गया। इसी प्रकार पार्टी में नया खून लाया गया व प्रियंका गांधी को महासचिव बना दिया गया। देश के करोड़ों युवाओं की मांग को देखते हुए राहुल गांधी को फिर से सक्रिय किया गया। अब जयराम रमेश इससे आगे क्या परिवर्तन चाहते हैं?

रमेश ने यह भी कहा कि पार्टी के भीतर स्थानीय नेताओं को आजादी और स्वायत्तता मिलनी चाहिए। जिस प्रकार की भाषा रमेश और वीरप्पा मोइली पार्टी के बारे में प्रयोग कर रहे हैं, उससे ज्यादा वे किस प्रकार की आजादी चाहते हैं। पहली बार रमेश ने कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम किसी की नागरिकता छीनता नहीं है, लेकिन पार्टी ने इस साधारण तथ्य को समझने में इतनी देर लगा दी, इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कांग्रेस को जमीनी सतह तक पहुंचने में कितना समय लगता है। रमेश का कहना है हमें अल्पसंख्यक समुदाय की सांप्रदायिकता का भी विरोध करना चाहिए था। पहली बार है कि किसी कांग्रेस नेता ने कहा है कि कांग्रेस को पीएफआई की फुरकाप्रस्ती से भी लड़ना होगा। पीएफआई पर सरकार ने पाबंदी लगाई हुई है और उस पर आतंकी गतिविधियों में संलिप्त होने का आरोप है, लेकिन कांग्रेस भाजपा को हराने के लिए उसी का सहारा यूपी में लेती है। रमेश का कहना है कि कांग्रेस को कोरोना वायरस ने पकड़ लिया है, लेकिन पार्टी को खोज करनी चाहिए कि यह वायरस पार्टी के भीतर किस देश से आया है! जानते सभी हैं, लेकिन बोलेगा कोई नहीं क्योंकि पार्टी इतनी आजादी और स्वायत्तता कभी नहीं देगी।

ईमेलः kuldeepagnihotri@gmail.com

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