हिमाचल में तेज गति दौड़ाक की संभावनाएं: भूपिंद्र सिंह, राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रशिक्षक

By: Aug 7th, 2020 12:06 am

भूपिंदर सिंह

राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रशिक्षक

यही गिनती के हिमाचली हैं जो स्प्रिंट में हिमाचल प्रदेश को थोड़ी-बहुत पहचान दिला पाए हैं। भविष्य में पारस, रोहित व दिव्या सहित कई उभरती प्रतिभाओं से अपेक्षा की जा सकती है कि वे सही प्रशिक्षण कार्यक्रम से गुजर कर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतें…

मानव शरीर ईश्वर द्वारा बनाई गई बहुत ही अद्भूत मशीन है। इसे चलाने के लिए भी ईंधन की जरूरत होती है। मानव शरीर के ऊर्जा चक्र को समझने के लिए हमें एटीपी से लेकर सीपीए लैक्टिक एसिड, शरीर से ऑक्सीजन की उधारी व सांस द्वारा ऑक्सीजन का फेफड़ों में पहुंच कर खून के साथ मिलकर फिर सैल का पहुंच कर शरीर को गतिशील बनाए रखने का गहन अध्ययन जरूरी है। सौ से लेकर चार सौ मीटर की दौड़ों को तेज गति में गिना जाता है। गति ही सभी स्पर्धाओं व खेलों की जीत का मूल मंत्र है। यह खिलाड़ी में जन्मजात होती है। प्रशिक्षण द्वारा भी इसमें बहुत ही कम एक उम्र तक विकास होता है। इस विषय पर इस कॉलम के माध्यम से कई अलग-अलग तरह से समझाया जाता रहा है। ओलंपिक खेलों में विभिन्न खेलों की कई स्पर्धाएं आयोजित होती हैं, मगर एथलेटिक्स का आकर्षण सबसे अधिक होता है।

ओलंपिक में जो धावक सौ मीटर की दौड़ में विजेता बनता है, वह पृथ्वी का तीव्रतम इनसान बनता है। सौ मीटर की दौड़ का अद्भुत रोमांच होता है। हिमाचल प्रदेश में तेज गति के बहुत कम धावक व धाविकाएं आज तक सामने आए हैं। सौ मीटर से लेकर चार सौ मीटर की स्पर्धाओं को स्प्रिंट यानी तेज गति की दौड़ों में रखा है। इन स्पर्धाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए जहां जन्मजात स्पीड चाहिए होती है, वहीं पर बहुत अधिक स्पीड इंडोरेंस व स्ट्रैंथ ट्रेनिंग की जरूरत होती है। जहां उच्च कोटि का प्रोटीन आम आदमी को आसानी से उपलब्ध होता है, वहीं के लोगों में अच्छी स्पीड जन्म से ही होती है। स्पीड को बहुत छोटी उम्र से ही विकसित करना पड़ता है। इसलिए स्पीड पर प्रशिक्षण दस वर्ष से भी कम आयु में शुरू करना पड़ता है। अगले पांच सालों में स्पीड अपने उच्च स्तर तक विकसित हो जाती है। यह भी कहा जाता है कि स्प्रिंटर पैदा होते हैं, बनाए नहीं जाते।

भारत के अधिकतर स्प्रिंटर समुद्र तट से संबंध रखते हैं। मछली इन लोगों का मुख्य आहार है। मछली में अच्छी गुणवत्ता का प्रोटीन मिलता है। उत्तर भारत में  शाकाहारी अधिक हैं, मगर गेहूं, दूध व उससे बने पदार्थों में भी अच्छी क्वालिटी का प्रोटीन मिलता है। यह भी कारण है कि पंजाब, हरियाणा व पश्चिमी उत्तर प्रदेश से भी समय-समय पर अच्छे स्प्रिंटर मिलते रहते हैं। हिमाचल प्रदेश से वरिष्ठ राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पुष्पा ठाकुर ही एकमात्र धाविका है जो हिमाचल प्रदेश के लिए राष्ट्रीय स्तर पर 400 मीटर में पदक विजेता है। एशिया व ओलंपिक खेलों के राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविरों तक पहुंचने वाली इस धाविका के बाद अभी तक कोई भी पुरुष या महिला हिमाचल प्रदेश के लिए वरिष्ठ राष्ट्रीय स्तर पदक जीत नहीं पाया है।

समय-समय पर राज्य स्तर पर अच्छा प्रदर्शन कर कुछ धाविकाओं व धावकों ने आशा जगाई है। हिमाचल प्रदेश में पहली बार राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर के धावक अशोक ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश  विश्वविद्यालय अंतर महाविद्यालय एथलेटिक्स प्रतियोगिता 1994 सुंदरनगर में पहली बार हिमाचल प्रदेश की धरती पर सौ मीटर की दौड़ को 11 सेकंड से नीचे 10.9 सेकंड में दौड़ कर तीव्रतम धावक बना था। उसके साथ हमीरपुर के राजेश ठाकुर ने भी 11 सेकंड से नीचे दौड़ कर रजत पदक जीता था। 2012-13 में राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर के विद्यार्थी धावक रोहित चौहान ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय अंतर महाविद्यालय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में अशोक ठाकुर के रिकॉर्ड को तोड़कर 10.83 सेकंड का नया कीर्तिमान बनाया था। वर्ष 2019 में राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला के धावक  पारस ने रोहित चौहान के कीर्तिमान को तोड़कर 10.70 सेकंड में दौड़ कर तीव्रतम धावक बना है।

इस धावक ने 200 मीटर की दौड़ को 22 सेकंड से नीचे 21.90 सेकंड में पहली बार दौड़ कर नया कीर्तिमान बनाया है। हिमाचल प्रदेश पुरुष वर्ग का रिकॉर्ड 10.40 सेकंड में हमीरपुर के धावक संदीप ने हिमाचल प्रदेश मिनी ओलंपिक 2017 में बनाया है। हिमाचल प्रदेश महिला वर्ग में हमीरपुर की पुष्पा ठाकुर ने पहली बार सौ मीटर दौड़ को 12 सेकंड से नीचे हिमाचल प्रदेश मिनी ओलंपिक 2004 मंडी में 11.96 सेकंड में दौड़ कर नया राज्य रिकॉर्ड बनाया था। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय का रिकॉर्ड हमीरपुर की सोनिका शर्मा के नाम 12.23 सेकंड अंकित है। हमीरपुर की ही रिशु ठाकुर ने राष्ट्रीय महिला खेलों की 100 मीटर दौड़ के फाइनल में पहुंच कर चौथा स्थान प्राप्त किया है।

200 मीटर की दौड़ में राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर की धाविका प्रोमिला ने अंतर विश्वविद्यालय एथलेटिक्स बंगलूरु 2006 में 100 मीटर में चौथा तथा 200 मीटर की दौड़ को 24.93 सेकंड में दौड़ कर रजत पदक जीता था। प्रोमिला 2010 राष्ट्रमंडल खेलों के लिए लगे प्रशिक्षण शिविर में भी रही है। राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर की ज्योति ने अंतर विश्वविद्यालय एथलेटिक्स प्रतियोगिता 2013 पटियाला में 400 मीटर की दौड़ में कांस्य पदक जीता था। 2012 की राष्ट्रीय महिला खेलों में ज्योति ने 400 मीटर की दौड़ में रजत पदक जीता था। धर्मशाला साई खेल छात्रावास की धाविका रिचा शर्मा ने 2015 राष्ट्रीय महिला खेलों की 200 मीटर दौड़ में रजत पदक जीता है। बालक 20 वर्ष आयु वर्ग में हमीरपुर के विजय कुमार शर्मा ने पहली बार 1981 में राष्ट्रीय स्तर पर हिमाचल प्रदेश के लिए कांस्य पदक 400 मीटर में जीता था।

1985 में सोलन महाविद्यालय के अमरीश जौली ने 400 मीटर दौड़ में अंतर विश्वविद्यालय एथलेटिक्स प्रतियोगिता के फाइनल तक पहुंच बनाई थी। 2005 हमीरपुर महाविद्यालय का अनिल शर्मा भी अंतर विश्वविद्यालय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में 200 दौड़ के फाइनल में पहुंच गया था। पिछले साल राष्ट्रीय स्कूली एथलेटिक्स में जोगिंद्रनगर के रोहित ने 400 मीटर के फाइनल में पहुंच कर भविष्य के पदक विजेता होने का परिचय दे दिया है। यही गिनती के हिमाचली हैं जो स्प्रिंट में हिमाचल प्रदेश को थोड़ी-बहुत पहचान दिला पाए हैं। भविष्य में पारस, रोहित व दिव्या सहित कई उभरती प्रतिभाओं से अपेक्षा की जा सकती है कि वे सही प्रशिक्षण कार्यक्रम से गुजर कर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतें। हिमाचल प्रदेश में आज तीन सिंथेटिक ट्रैक हैं, तीन खेल छात्रावास हैं तथा कई प्रशिक्षक बाहर भी स्वतंत्र रूप से प्रशिक्षण दे रहे हैं। प्रशिक्षकों से अपेक्षा रहेगी कि वे अपने-अपने ट्रेनी को अच्छा प्रशिक्षित करने के लिए अपने अध्ययन व जुनून को लगातार जारी रखें।

ईमेलः bhupindersinghhmr@gmail.com

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