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HP Election-2022: चुनावी पिच पर मंत्री भी क्लीन बोल्ड

By: Nov 22nd, 2022 1:27 pm

राज्य ब्यूरो प्रमुख—शिमला

शिमला। बार-बार सरकार बदलने वाले हिमाचल में कैबिनेट मंत्रियों के पास भी जीत की गारंटी नहीं है। चुनावी इतिहास बताता है कि 2012 में भाजपा की धूमल सरकार के तीन कैबिनेट मंत्री हार गए थे और 2017 में वीरभद्र सिंह सरकार के पांच मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा था। अब जयराम कैबिनेट के मंत्री भी मुश्किल लड़ाई में फंसे हैं।

गौर हो कि 2007 में जब भाजपा सरकार प्रेम कुमार धूमल ने बनाई थी तो उनकी कैबिनेट में पांच साल के भीतर कई तरह के बदलाव भी हुए। इसी दौरान जेपी नड्डा मंत्री पद छोडक़र दिल्ली गए और प्रदेशाध्यक्ष से हटाने के बाद खीमीराम को मंत्री बनाया गया, लेकिन 2012 में जब चुनाव हुए तो वन मंत्री खीमी राम को कांग्रेस प्रत्याशी कर्ण सिंह ने हरा दिया था। धर्मशाला से मंत्री रहे किशन कपूर को सुधीर शर्मा ने हराया और ज्वालामुखी से रमेश धवाला संजय रतन से हार गए थे। फिर आया 2017 का चुनाव, जिसमें वीरभद्र सिंह कैबिनेट के सबसे ज्यादा मंत्री हारे।

कुल 12 में से सात मंत्री बाहर हो गए थे। इनमें से पांच को चुनावी हार का सामना करना पड़ा था। कर्ण सिंह का निधन हो गया था, जबकि विद्या स्टोक्स चुनाव से बाहर हो गई थीं। कौल सिंह को जवाहर ठाकुर ने हराया था, जबकि जीएस बाली को अरुण कुमार कूका हरा गए। बल्ह से प्रकाश चौधरी को इंद्र सिंह गांधी ने हराया, जबकि ठाकुर सिंह भरमौरी को जियालाल ने भरमौर में पटखनी दी थी। धर्मशाला से सुधीर शर्मा मंत्री रहते हारे और किशन कपूर दोबारा विधानसभा आए। वहीं, धनीराम शांडिल भी 671 वोट से अपनी सीट बचा पाए थे।
मौजूदा हालात
वर्तमान चुनाव की बात करें तो कैबिनेट मंत्रियों में महेंद्र सिंह पहले ही बाहर हो गए हैं, जबकि सुरेश भारद्वाज और राकेश पठानिया की सीटें बदली गई हैं। शाहपुर से सरवीन चौधरी इस बार सीधी फाइट में हैं, जबकि मार्कंडेय की सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला है। बिक्रम ठाकुर भी त्रिकोणीय मुकाबले में फंसे हैं। वीरेंद्र कंवर और गोविंद सिंह ठाकुर को कांग्रेस द्वारा कैंडिडेट बदलने के कारण एंटी इनकम्बेंसी झेलनी पड़ रही है। सुखराम चौधरी और राजीव सेजल की सीटों पर सीधा मुकाबला है, जबकि पहली बार मंत्री बने राजेंद्र गर्ग लगभग त्रिकोणीय मुकाबला झेल रहे हैं।