जून का महीना लेकर आया अशुभ योग, कल से शुरू हो रहे मृत्यु पंचक भूलकर भी न करें शुभ काम
आखिर शनि देव से क्या है कनेक्शन
मंत्र-जाप और धार्मिक ग्रंथों का करें पाठ
पंचक में मृत्यु को क्यों अशुभ
हिन्दू धर्म में समय को सबसे बड़ा बलवान माना गया है। समय शुभ भी होता है और अशुभ भी। ज्यादातर लोग किसी भी काम की शुरुआत मुहूर्त से करते हैं और समय का खास ध्यान रखते हैं। किसी भी मांगलिक कार्य से पहले पंचांग और नक्षत्रों को देखकर शुभ-अशुभ समय का विचार किया जाता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में कुछ ऐसे समय के बारे में बताया गया है, जब किसी भी तरह के शुभ काम नहीं किए जाते हैं। इन्हीं में से एक अशुभ समय है मृत्यु पंचक।
माना जाता है कि यह समय ऐसा होता है जिसमे में किसी भी तरह के शुभ काम नहीं किए जाते वैदिक पंचांग के मुताबिक, जून 2026 यानी इस महीने मृत्यु पंचक की शुरुआत 6 जून को शाम 7 बजकर 03 मिनट पर होगी, जो 11 जून गुरुवार को सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर समाप्त होगी। इस बार पंचक शनिवार से शुरू हो रहा है, जिस वजह से इसे मृत्यु पंचक का नाम दिया गया है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि, शनिवार का संबंध शनिदेव से होता है। ऐसे में पंचत अवधि के दौरान किए गए कामों के प्रभाव को लेकर लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।
अब सवाल उठता है की अगर यही पंचक शनिवार को छोड़ कर किसी और दिन शुरू होता तो क्या होता अगर पंचक की शुरुआत सोमवार से हो तो उसे राज पंचक, मंगलवार से शुरू होने वाले पंचक को अग्नि और शनिवार को शुरू होने वाले पंचक को मृत्यु कहा जाता है। मान्यताओं के मुताबिक, पंचक काल में किए गए कामों का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। इसी वजह से इस अवधि को लेकर खास सावधानी बरतनी चाहिए। मृत्यु पंचक के दौरान शादी, गृह प्रवेश, मुंडन संस्कार, नया व्यापार शुरू करना या छत डालने जैसे मांगलिक कार्यों को करने से बचना चाहिए।। ऐसा इसलिए क्योंकि पंचक के दौरान शुभ कार्यों को करने में रुकावटें, देरी या अनचाही समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
मान्यताओं के मुताबिक इस दौरान व्यक्ति को जल्दबाजी में कोई बड़ा निर्णय नहीं लेना चाहिए। न ही बड़े निवेश, आर्थिक फैसले या जोखिम भरे कार्यों को करना चाहिए। देखिए अब जब बात मृत्यु पंचक की हो, तो लोगों के मन में डर बैठ जाता है कि इस दौरान कौन-से ऐसे काम हैं, जिन्हें हमें भूलकर भी नहीं करना चाहिए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचक के दौरान घर में लकड़ी या ईंधन इकट्ठा करने से बचना चाहिए, क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है। पंचक काल में चारपाई बनवाना, खरीदना, जोड़ना भी शुभ नहीं माना जाता। मान्यता है कि इससे नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पंचक के दिनों में घर की छत, लेंटर या आप कह सकते हैं की निर्माण से जुड़े बड़े कार्यों को टाल देना चाहिए।
इस अवधि में दक्षिण दिशा की यात्रा करने से भी बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि धार्मिक दृष्टि से इसे यम की दिशा माना गया है। पंचक के दौरान किसी भी तरह के जोखिम भरे, मांगलिक या बड़े शुभ कार्य करने से पहले शुभ मुहूर्त का विचार करना जरूरी माना जाता है।भले ही.. मृत्यु पंचक भौतिक कार्यों के लिए शुभ न हो पर आध्यात्मिक उन्नति के लिए बहुत श्रेष्ठ है। इस दौरान: धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें।
मंत्र-जाप, प्रभु का सिमरन और ध्यान लगाएं।
दान और निस्वार्थ सेवा से जुड़े कार्य करें।, और अगर इस दौरान कोई बहुत ही जरूरी काम आ पड़े, जिसे टाला नहीं जा सकता, तो किसी विद्वान ब्राह्मण से पूछकर, पंचक शांति कराकर ही कदम आगे बढ़ाएं। मान्यताओं के अनुसार, पंचक में मृत्यु को अशुभ माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि ऐसी आशंका रहती है कि जिस परिवार में मृत्यु होती है उस परिवार या कुल में पाँच अन्य मृत्यु या कष्टकारी घटनाएं घटित हो सकती हैं। यह “पांच का योग” ही भय का मुख्य कारण है। शास्त्रों का कहना है कि यदि विधि-विधान से शांति न की जाए, तो मृत आत्मा को शांति मिलने में बाधा आती है और परिवार पर संकट मंडरा सकता है।.तो आप अंदाज़ा लगा सकते हैं की जून में आया यह मृत्यु पंचक कितना खतरनाक साबित हो सकता है।
साथ ही यदि किसी की पंचक के दौरान मृत्यु हो जाए तो उसके लिए शांति के उपाय भी है यदि किसी का निधन पंचक काल में हो जाता है, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। गरुड़ पुराण में इसके निवारण के स्पष्ट उपाय बताए गए हैं: दाह संस्कार के समय शव के साथ कुश यानि एक विशेष घास से बने पाँच पुतले अर्थी पर रखे जाते हैं। इन पुतलों का भी शव के साथ ही पूरे विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया जाता है। माना जाता है कि ऐसा करने से पंचक का दोष समाप्त हो जाता है और परिवार सुरक्षित रहता है।
विशेष दान-पुण्य से भी यह दोष समाप्त होता है इसके लिए आपको ब्राह्मणों को दान, अन्न दान और छाया पात्र दान करना शुभ माना जाता है। मृत्यु के पश्चात घर में गरुड़ पुराण का पाठ सुनने से मृत आत्मा को सद्गति प्राप्त होती है और दोषों का प्रभाव कम होता है। तो दर्शकों, आज हमने जाना कि समय बलवान जरूर है, लेकिन सही ज्ञान और सूझबूझ से हम हर दोष के प्रभाव को कम कर सकते हैं। जून के इस मृत्यु पंचक में सावधान रहें, नियमों का पालन करें और भगवान की भक्ति में मन लगाएं।
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