मंडी में 983 हेक्टेयर जंगल राख

By: Jun 29th, 2026 12:45 am

फायर सीजन के दौरान 36.91 लाख की वन संपदा नष्ट, नई प्लांटेशन पर मार

कार्यालय संवाददाता-मंडी
हिमाचल प्रदेश के मध्यवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में भीषण गर्मी और शुष्क मौसम के बीच फायर सीजन के दौरान वनाग्नि (जंगल की आग) ने तांडव मचाया है। लेकिन प्री-मानसून आने के उपरांत जंगलों में आग के मामले थम गए है। वहीं इस सीजन में अब तक वनाग्नि की कुल 164 घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। आग की इन भीषण लपटों ने सर्कल के तहत आने वाले चार बड़े वन डिवीजनों में भारी तबाही मचा रही। इससे करीब 983.36 हेक्टेयर वन भूमि जलकर पूरी तरह स्वाहा हो चुकी है। वन विभाग द्वारा किए गए त्वरित चरण-1 आकलन के मुताबिक इस आगजनी से अब तक विभाग और पर्यावरण को सीधे तौर पर लगभग 36.91 लाख रुपये की वित्तीय क्षति का अनुमान लगाया गया है । हालांकि,यह केवल प्राथमिक आंकड़ा है। विस्तृत जमीनी सर्वेक्षण के बाद यह नुकसान कहीं अधिक बड़ा हो सकता है।

आग के कारण मंडी डिवीजन में सर्वाधिक नुकसान हुआ है। अकेले 20 लाख की क्षति आंकड़ों के बारीक विश्लेषण से पता चलता है कि पूरे सर्कल में सबसे ज्यादा मार मंडी डिवीजन पर पड़ी है । अकेले मंडी डिवीजन में वनाग्नि की 71 घटनाएं रिपोर्ट की गईं, जो पूरे सर्कल की कुल घटनाओं का लगभग 43 प्रतिशत है । मंडी डिवीजन में आग ने 437.86 हेक्टेयर वन क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया । इसमें सबसे चिंताजनक बात यह है कि 46 हेक्टेयर ऐसा क्षेत्र जला है जहां हाल ही में प्लांटेशन (पौधरोपण) किया गया था, जबकि 343.66 हेक्टेयर प्राकृतिक वन क्षेत्र जल गया । इस भारी तबाही के कारण अकेले मंडी डिवीजन को ही 2006001.50 का वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा है। इसके अलावा मंडी के बाद जोगिंद्रनगर वन डिवीजन दूसरा सबसे प्रभावित क्षेत्र बनकर उभरा है ।


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