हिमाचल में मत्स्य क्षेत्र ने खोले रोजगार-समृद्धि के नए द्वार, तीन साल में 60,800 मीट्रिक टन मछली उत्पादन दर्ज

By: Jun 8th, 2026 12:07 am

सुक्खू सरकार के अभिनव प्रयास ला रहे रंग

हिमाचल में तीन साल में 60,800 मीट्रिक टन मछली उत्पादन दर्ज

स्टाफ रिपोर्टर — शिमला

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के दूरदर्शी नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश का मत्स्य क्षेत्र अभूतपूर्व प्रगति के दौर से गुजर रहा है। कभी सीमित आर्थिक गतिविधि के रूप में देखा जाने वाला यह क्षेत्र आज ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक समृद्धि का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। राज्य सरकार की योजनाओं के फलस्वरूप जनवरी, 2023 से मार्च, 2026 के बीच प्रदेश में कुल 60,799.66 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन दर्ज किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत 972.46 करोड़ रुपए रही। वर्ष 2023-24 में जहां 17,721.64 मीट्रिक टन मछली उत्पादन दर्ज किया गया, वहीं 2024-25 में यह ब?कर 19,019.83 मीट्रिक टन और 2025-26 में रिकॉर्ड 20,005.97 मीट्रिक टन उत्पादन दर्ज किया गया। वर्ष 2023 से अब तक विभिन्न मत्स्य विकास योजनाओं के माध्यम से कुल 1,553 रोजगार अवसर सृजित किए गए।

वर्ष 2023-24 में 385, वर्ष 2024-25 में 539 तथा वर्ष 2025-26 में युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के 612 अवसर सृजित किए गए हैं। जनवरी, 2023 से मार्च, 2026 के दौरान विभागीय ट्राउट फार्मों ने 235.16 लाख रुपए की 42.29 मीट्रिक टन ट्राउट का उत्पादन किया है। विभाग ने विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से 338.16 लाख रुपए का राजस्व अर्जित किया है। एक अन्य महत्त्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में वर्ष 2025-26 के दौरान हिमाचल के मत्स्य पालकों ने उत्तराखंड को 2.5 लाख आइड ओवा और 8.5 लाख रेनबो ट्राउट फ्राई उपलब्ध करवाई गई, जो राज्य की गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उत्पादन क्षमता को प्रदर्शित कर रहा है। वर्ष 2023-24 से 2025-26 के दौरान 18,649 मछुआरों को जलाशय मत्स्य पालन के माध्यम से पूर्णकालिक स्वरोजगार प्राप्त हुआ। वर्ष 2023-24 में 6,022, वर्ष 2024-25 में 6,318 तथा वर्ष 2025-26 में 6,309 मछुआरों को स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हुए।

मुख्यमंत्री कार्प मत्स्य पालन योजना 80 प्रतिशत अनुदान

मत्स्य पालन क्षेत्र को विस्तार प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने वर्ष 2024-25 में मुख्यमंत्री कार्प मत्स्य पालन योजना प्रारंभ की। इस योजना के अंतर्गत सभी श्रेणियों के लाभार्थियों को समान रूप से 80 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध करवाया जा रहा है। वर्ष 2024-25 में इस योजना के अंतर्गत 146 लाख रुपए की सबसिडी वितरित की गई, जबकि 2025-26 में 48.57 लाख जारी किए गए।

प्रदेश में उन्नत प्रजातियों का किया जा रहा विकास

प्रदेश सरकार द्वारा अमूर कार्प, एएचआर जयंती तथा अमृत कतला जैसी उन्नत प्रजातियों का विकास किया जा रहा है, इनकी वृद्धि दर और प्रजनन क्षमता पारंपरिक प्रजातियों की तुलना में 20 से 25 प्रतिशत अधिक है। सेविंग्स-कम-रिलीफ योजना के तहत 13,767 जलाशय मछुआरों को 619.52 लाख रुपए की सहायता प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त, 42,000 से अधिक मछुआरों और मत्स्य पालकों को सामान्य दुर्घटना बीमा योजना के तहत सुरक्षा कवच उपलब्ध करवाया गया। वहीं 1,786 लाभार्थियों को किसान क्रेडिट कार्ड सुविधा से जोडकऱ संस्थागत ऋण तक उनकी पहुंच सुनिश्चित की गई है। राज्य सरकार ने जलाशयों में पकड़ी जाने वाली मछलियों पर लगने वाली रॉयल्टी को कम किया है। वर्ष 2025-26 में इसे 15 प्रतिशत से घटाकर 7.5 प्रतिशत किया गया और वर्ष 2026-27 में इसे मात्र एक प्रतिशत कर दिया गया है।


Keep watching our YouTube Channel ‘Divya Himachal TV’. Also,  Download our Android App or iOS App