शिरगुल देवता बैसाखी मेला अब राज्य स्तरीय
हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की मंजूरी से क्षेत्रवासियों में खुशी, धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
नगर संवाददाता-राजगढ़
राजगढ़ के ऐतिहासिक और प्रसिद्ध शिरगुल देवता बैसाखी मेले को प्रदेश सरकार ने राज्य स्तरीय मेले का दर्जा प्रदान कर दिया है। हाल ही में आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में इस संबंध में निर्णय लिया गया, जिसके बाद क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है। लंबे समय से उठ रही इस मांग के पूरा होने पर लोगों ने प्रदेश सरकार का आभार जताया है। शिरगुल देवता बैसाखी मेला सिरमौर, शिमला और सोलन जिलों में आयोजित होने वाले बिशु मेलों में सबसे पहला और प्रमुख मेला माना जाता है। लगभग 70 वर्ष पुराने इस मेले का क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं से गहरा संबंध है। प्रारंभिक वर्षों में यह मेला ग्राम पंचायत बोहल-टालिया के कुफरधार क्षेत्र में आयोजित किया जाता था। बाद में राजगढ़ के विकास के साथ इसका आयोजन सरोट पहाड़ी पर होने लगा, लेकिन पानी की समस्या के कारण इसे वर्तमान नेहरू मैदान में स्थानांतरित किया गया। तब से यह मेला यहीं भव्य रूप से आयोजित किया जा रहा है।
अब तक यह आयोजन जिला स्तरीय मेले के रूप में आयोजित होता रहा, लेकिन इसके ऐतिहासिक महत्व और बढ़ते स्वरूप को देखते हुए इसे राज्य स्तरीय दर्जा देने की मांग लगातार उठ रही थी। पिछले वर्ष मेले के समापन समारोह में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने इसे राज्य स्तरीय मेला घोषित करने की घोषणा की थी। अब मंत्रिमंडल की स्वीकृति के साथ यह घोषणा औपचारिक रूप से लागू हो गई है। क्षेत्रवासियों का मानना है कि राज्य स्तरीय दर्जा मिलने से मेले की पहचान पूरे प्रदेश में और मजबूत होगी। इससे धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, वहीं स्थानीय व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। लोगों ने उम्मीद जताई कि यह निर्णय राजगढ़ क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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