नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का अधिकार नहीं, बंगाल SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की दोटूक

By: Jul 18th, 2026 12:03 am

दिव्य हिमाचल ब्यूरो — नई दिल्ली
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बीच नागरिकता को लेकर उठे सवालों पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपना रुख साफ किया। पश्चिम बंगाल में एसआईआर विवाद पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट फैसला सुनाया कि किसी व्यक्ति की नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का संवैधानिक अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग का अधिकार केवल मतदाता सूची के नियंत्रण और पर्यवेक्षण तक सीमित है। कोर्ट ने कहा कि एसआईआर के बाद मतदाता सूची से नाम कट जाने से किसी की नागरिकता खत्म नहीं होती। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग का अधिकार केवल मतदाता सूची के नियंत्रण और पर्यवेक्षण तक सीमित है। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग नागरिकता का निर्णय करने वाला संवैधानिक प्राधिकरण नहीं है। अगर किसी व्यक्ति का नाम संदिग्ध नागरिकता के आधार पर मतदाता सूची से हटाया जाता है, तो चुनाव आयोग का कत्र्तव्य है कि वह केंद्र सरकार से उसकी नागरिकता की स्थिति निर्धारित करने के लिए आवेदन करे। आयोग का मतदाता सूची पर नियंत्रण है। यह किसी को शामिल न करने का निर्णय ले सकता है, लेकिन इससे नागरिकता की स्थिति का हनन नहीं होता है।

दरअसल, इस याचिका में पश्चिम बंगाल में एसआईआर से बाहर रखे गए लोगों की अपीलों की सुनवाई के लिए गठित न्यायाधिकरणों में प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने की मांग की गई है। इसी दौरान पश्चिम बंगाल सरकार ने नाम हटाए गए लोगों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली और अन्नपूर्णा योजना जैसी कल्याणकारी योजनाओं के लाभ देने से इनकार करने के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। याचिका पर सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने की। पीठ ने कहा कि बिहार एसआईआर के अपने फैसले में हमने स्पष्ट किया था कि चुनाव आयोग का यह कत्र्तव्य है कि एसआईआर पर फैसला आते ही उसे नागरिकता अधिनियम के तहत निर्णय हेतु मंत्रालय को भेजना होगा।

सीजेआई बोले, आप टैक्स लगाइए, हम उसे सही ठहराएंगे

देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अगवाई वाली पीठ देश भर की जिला अदालतों में महिलाओं के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी से जुड़े एक मुद्दे की सुनवाई कर रही थी। इस दौरान मामले की पैरवी कर रहे एक वकील ने सीजेआई को कर्नाटक के हालात से अवगत कराते हुए कहा कि कर्नाटक की तालुका अदालतों में महिलाओं के लिए वॉशरूम या टॉयलट तक नहीं हैं। इस पर सीजेआई कांत ने भारी चिंता जताई और कहा, जरा सोचिए हमारी बेटियों के लिए कितनी खराब और दयनीय स्थिति है… वे कैसे काम कर रही हैं। इसके बाद सीजेआई ने कर्नाटक के एडवोकेट जनरल से कहा कि एजी साहब, सभी तालुका अदालतों में महिलाओं के लिए वॉशरूम की तुरंत रिपोर्ट मंगवाइए और साथ ही पीडब्ल्यूडी से कहिए कि वे विशेष फंड से इनका निर्माण करें। अब एक मिसाल कायम करें। यह कहना कि फंड नहीं है वगैरह, काफी नहीं है क्योंकि यह बुनियादी मानवाधिकारों के खिलाफ है। सीजेआई ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर फंड नहीं है तो शराब या सिगरेट पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाइए, हम उसे सही ठहराएंगे।


Keep watching our YouTube Channel ‘Divya Himachal TV’. Also,  Download our Android App or iOS App