भयंकर लैंडस्लाइड में लापता हिमाचल के लाल- परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़, अब बस चमत्कार की ही आस
हिमाचल समेत पूरे देश में इन दिनों बारिश राहत कम और आफत ज़्यादा बनकर बरस रही है। अभी तो मानसून की बस शुरुआत है, लेकिन इस शुरुआत ने ही कई परिवारों की ज़िंदगी बदल दी है, कहीं पहाड़ से गिरे पत्थरों ने अपनों को छीन लिया, तो कहीं भूस्खलन ने लोगों को मलबे के नीचे दफना दिया। किसी घर में मातम पसरा है, तो कहीं अपनों की एक झलक पाने की उम्मीद में टकटकी लगाए आंखें हर पल किसी अच्छी खबर का इंतज़ार कर रही हैं।
ऐसी ही एक दर्दनाक तस्वीर सामने आई है केरल के वायनाड से… जहां सुरंग निर्माण स्थल पर अचानक हुए भीषण लैंडस्लाइड ने कुछ ही सेकंड में सब कुछ बदल दिया। सड़क पर चल रहे वाहन हों या निर्माण कार्य में जुटे मजदूर और इंजीनियर, किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। वायरल हो रही सीसीटीवी फुटेज इस मंजर इस त्रासदी की भयावहता बयां करने के लिए काफी है। अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, कई लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, लेकिन अभी भी कई लोग लापता हैं।
इन्हीं लापता लोगों में हिमाचल प्रदेश के दो इंजीनियर भी शामिल हैं। कांगड़ा जिले की फतेहपुर तहसील के सुरेला निवासी कंस्ट्रक्शन मैनेजर विक्रम राणा और मंडी जिले के रिवालसर निवासी इंजीनियर राहुल शर्मा का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। बेटों के लापता होने की खबर मिलते ही दोनों परिवारों की दुनिया जैसे थम गई। रातभर किसी की आंखों में नींद नहीं आई, किसी के गले से निवाला नहीं उतरा। हर गुजरते पल के साथ सिर्फ एक दुआ है…कि किसी तरह अपने घर लौट आएं।
वायनाड की उसी भीगी मिट्टी में अपनों की तलाश जारी है लगातार हो रही बारिश के कारण राहत और बचाव कार्यों में भी मुश्किलें आ रही हैं। हर बीतते घंटे के साथ लापता लोगों के परिवारों की चिंता और बेचैनी बढ़ती जा रही है।
हिमाचल के मंडी के रिवालसर में राहुल शर्मा के घर का माहौल शब्दों में बयां करना मुश्किल है। बीमार मां मंजू देवी चाहकर भी कुछ नहीं कह पा रही हैं। उनकी आंखें सिर्फ बेटे के लौट आने की राह देख रही हैं। पत्नी के लिए इस हादसे पर यकीन करना भी मुश्किल है। अभी कुछ ही महीने पहले, मार्च में दोनों ने साथ जीने-मरने की कसमें खाई थीं। किसे पता था कि शादी का पहला सावन आने से पहले ही ज़िंदगी ऐसी कठिन परीक्षा ले लेगी।
हादसे की सूचना मिलते ही राहुल के पिता रूपदेव शर्मा और भाई रोहित वायनाड चले गए हैं। पिता का कहना है कि मंगलवार सुबह ही बेटे से आखिरी बार बात हुई थी। राहुल ने फोन पर कहा था- पापा, मैं ड्यूटी पर जा रहा हूं। अपना ख्याल रखन- तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यही उनकी आखिरी बातचीत बन जाएगी। शाम होते-होते भारी बारिश और ढहती पहाड़ियों के बीच राहुल लापता हो गया।
आज उस घर में सिर्फ सन्नाटा है… मां की आंखों में इंतजार है, पत्नी के मन में अनगिनत सवाल हैं और पिता के दिल में बस एक उम्मीद… कि बेटा सकुशल वापस लौट आए।
वहीं दूसरी ओर उपमंडल फतेहपुर के सुरेला गांव निवासी विक्रम राणा (50) के लैंडस्लाइड में लापता होने की खबर ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। विक्रम राणा फरवरी माह से कंपनी के प्रोजेक्ट के सिलसिले में वायनाड में तैनात थे।
हादसे के बाद से उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। जैसे ही परिवार को उनके लापता होने की सूचना मिली, घर में मायूसी छा गई। विक्रम की पत्नी रंजना देवी अब भी इस हादसे पर यकीन नहीं कर पा रही हैं। पूरा परिवार बस उनके सकुशल लौट आने की प्रार्थना कर रहा है। बेटा हिमांश इन दिनों पेरिस में सरकारी छात्रवृत्ति पर सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है, जबकि बेटी विशाखा राणा चंडीगढ़ में एमएससी एग्रीकल्चर की छात्रा है। परिवार के लिए यह समय बेहद कठिन है।
जानकारी के अनुसार, 7 जुलाई को सुबह 11:09 बजे के बाद से विक्रम राणा से कोई संपर्क नहीं हो सका। शुरुआत में परिजन लगातार उनसे संपर्क करने की कोशिश करते रहे, लेकिन जब बात नहीं हो पाई तो चिंता बढ़ने लगी… इसी बीच प्रशासन की ओर से उनके लापता होने की सूचना मिलने के बाद पूरे परिवार पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
विक्रम के भाई कुलवंत सिंह ने बताया कि वह वायनाड पहुंच चुके हैं और मौके पर राहत एवं बचाव कार्य पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। हालांकि, अब तक विक्रम का कोई पता नहीं चल पाया है। परिवार की उम्मीदें अभी भी बचाव दल पर टिकी हैं और सभी उनकी सुरक्षित वापसी की दुआ कर रहे हैं। यह दर्द सिर्फ राहुल या विक्रम के परिवार का नहीं है, बल्कि उन तमाम परिवारों का है जिनके अपने अभी भी इस आपदा में लापता हैं। हर घर में एक ही प्रार्थना है—कुदरत के इस कहर के बीच कोई चमत्कार हो जाए और उनके अपने सही-सलामत लौट आएं।
इस बीच केरल की वायनाड आपदा को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी राज्य के मुख्यमंत्री से बात कर बचाव, राहत और पुनर्वास कार्यों में केंद्र की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा दिया। राज्य सरकार ने भी हादसे की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं, जिसमें सुरक्षा मानकों, पर्यावरणीय पहलुओं और भूस्खलन के संभावित कारणों की पड़ताल की जाएगी।
जाहिर है जांच अपनी जगह चलती रहेगी… जिम्मेदारियां भी तय होंगी… लेकिन फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता उन परिवारों को हौसला देना है जिनकी निगाहें हर फोन कॉल पर टिकी हैं। दुआ बस इतनी है कि मलबे के नीचे दबे सपनों को फिर से सांस मिल जाए… और जो आज लापता हैं, वे अपने अपनों के बीच सकुशल लौट आएं।
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