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बिना बिजली और कोयले के दौड़ेगी भारत की पहली Train, जानिए क्या है नीले रंग का राज…

By: Jul 17th, 2026 8:58 pm

भारत की पहली हाइड्रोजन Train
खूबियों से भरी है हाइड्रोजन Train
आखिर क्या है नीले रंग की वजह
क्या है टाइमिंग और किराया
बिना बिजली कैसे चलती है हाइड्रोजन ट्रेन

एक ऐसी Train, जो न डीज़ल से चलती है न बिजली से चलती है तो सवाल अब ये कि आखिर ये ट्रेन चलती कैसे है  और क्या इस Train में भी बाकी सभी ट्रेनों जैसी सुविधाएं हैं और इस ट्रेन का रंग बाकी सभी ट्रेनों से अलग ब्लू यानि नीला क्यों है। इन सभी सवालों का जबाव हम आपको हमारी आज की खास पेशकश में देंगे।

जी हाँ- भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल Train अब जींद-सोनीपत रेलखंड पर चलने के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को हरी झंडी दिखाई है, इस साल मई महीने में भारतीय रेल ने उत्तर रेलवे के जींद–सोनीपत सेक्शन पर 10 कोच वाली हाइड्रोजन-संचालित Train चलाने को मंजूरी दी थी  और इस सब के साथ भारतीय रेलवे ने एक नया इतिहास लिख दिया है अब भारत भी उन सभी देशों में शामिल हो गया है जहां हाइड्रोजन Train चलती है|

अब सवाल ये की आखिर ये टेक्नोलॉजी है क्या  देखिए हाइड्रोजन Train सेल फ्यूल टेक्नोलॉजी की मदद से हाइड्रोजन को बिजली में बदला जाता है। पर्यावरण के लिहाज से इस तकनीक की बड़ी खासियत है कि इसमें धुएं की जगह पानी की भाप निकलती है। यह पारंपरिक इंजन से बिल्कुल अलग है। इसमें ट्रेन के ऊपर या अंदर हाइड्रोजन टैंक और फ्यूल सेल लगे होते हैं। जब टैंक से हाइड्रोजन  फ्यूल सेल में पहुंचती है, तो इलेक्ट्रो केमिकल प्रोसेस के जरिए बिजली बनती है। और इस बिजली से ही ट्रेन चलती है।

ट्रेन की एक और खासियत की बात करें तो इस ट्रेन में कुल 10 डिब्बे हैं, जिसमें दो हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार यानी कि इंजन वाले डिब्बे और आठ ट्रेलर कोच यानी कि यात्रियों के बैठने के डिब्बे शामिल हैं। वहीँ एक आम इंजन के मुकाबले हाइड्रोजन फ्यूल सेल वाले इंजन बेहद शांत होते हैं। इनमें से न के बराबर शोर निकलता है और यात्री आराम से सफर कर सकते हैं।​

देखिए ये तो बात हो गई टेक्नोलॉजी और ट्रेन के डिब्बों की  पर इसके साथ सवाल ये भी है की हाइड्रोजन किधर से आती है, तो इस ट्रेन में इंधन भरने के लिए पेट्रोल पंप स्टेशन की तरह हरियाणा के जींद में देश का सबसे बड़ा रेलवे हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशन बनाया गया है।इस हाइड्रोजन प्लांट में बिजली की मदद से पानी से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को अलग किया जाता है। इसके बाद हाइड्रोजन को सुरक्षित टैंकों में स्टोर कर लिया जाता है।

और सबसे ज्यादा चर्चा का विषय यह है की इस ट्रेन का रंग नीला क्यों है- तो ऐसा इसलिए क्यूंकि नीला रंग सिर्फ इसकी सुंदरता के लिए नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई वजह हो सकती हैं। दुनिया की पहली हाइड्रोजन पैसेंजर ट्रेन जर्मनी में 2018 में चली थी, जिसका रंग ब्राइट ब्लू है। वहीं, कनाडा, जापान, चीन में भी चल रही हाइड्रोजन ट्रेनें नीले रंग की ही हैं।

हाइड्रोजन फ्यूल सेल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन मिलने पर सिर्फ पानी बनता है। नीला रंग पानी, आकाश और स्वच्छता का प्रतीक माना जाता है।जापान की Hybari ट्रेन भी नीली है और उस पर पानी का डिजाइन भी बना है। वहीं, जर्मनी की हाइड्रोजन ट्रेन Coradia iLint भी ब्राइट ब्लू कलर की है। ऐसे में भारत की हाइड्रोजन ट्रेन का रंग भी नीला है।

हाइड्रोजल ट्रेन सामान्य ट्रेनों से अलग है। इसका नीला रंग आंखों को तो आकर्षित करता ही है साथ ही आधुनिक भी लगता है। दुनिया भर की हाइड्रोजन ट्रेनें ज्यादातर नीले रंग की होती हैं. भारत भी उसी वर्ल्ड स्टाइल को फॉलो कर रहा है  और इस ट्रेन में सबसे आखिर में किराए की बात करें तो इस ट्रेन का किराया बहुत कम रखा गया है ट्रेन का न्यूनतम किराया 5 रूपए और अधिकतम किराया 25 रूपए है यानि इस ट्रेन का टिकट प्लेटफार्म टिकट से भी कम है वहीँ जींद से सोनीपत तक के सफर में ये ट्रेन 14 स्टेशनों पर रुकेगी।

टाइमिंग की बात करें तो ये ट्रेन रोज सुबह 7 बजकर 40 मिनट पर जींद से रवाना होकर 9 बजकर 40 मिनट पर सोनीपत पहुंचेगी। वापसी में सुबह 10:30 बजे सोनीपत से चलकर दोपहर एक बजे जींद पहुंचेगी। ये ट्रेन सप्ताह में छह दिन चलेगी। तो ये थी हाइड्रोजन ट्रैन से जुड़ी एक छोटी सी जानकारी, आपको भारतीय रेल का यह प्रयास कैसा लगा कमेंट बॉक्स में बताइए।


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