पहलगाम आतंकी हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के खिलाफ गैर-जामनती वारंट जारी
जम्मू। प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के पाकिस्तान स्थित प्रमुख हाफिज सईद के खिलाफ पहलगाम आतंकवादी हमले के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के पूरक आरोप पत्र दायर करने के कुछ दिनों बाद, जम्मू की विशेष एनआईए अदालत ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। यह आदेश विशेष एनआईए अदालत के न्यायाधीश द्वारा पहलगाम आतंकवादी हमले की चल रही जांच से संबंधित एक मामले के संबंध में दिया गया। आदेश के अनुसार, अदालत के समक्ष एक आवेदन प्रस्तुत किया गया था जिसमें फरार आरोपी हाफिज मोहम्मद सईद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने की मांग की गई थी। इस मामले में अदालत के समक्ष पहले ही एक पूरक आरोप पत्र दायर किया जा चुका है।
सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), 1967 के तहत आतंकवादी घोषित सईद पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सरगोधा का निवासी है। वह प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक है और पाकिस्तान से अपनी गतिविधियां चला रहा है। आदेश में कहा गया कि निष्पक्ष, पूर्ण और प्रभावी जांच के लिए आरोपी की गिरफ्तारी और हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। इसमें कहा गया, “तदनुसार, आरोपी हाफिज मोहम्मद सईद के खिलाफ गिरफ्तारी का गैर-जमानती वारंट जारी किया जाता है और इसे निर्धारित कानून और प्रक्रिया के अनुसार तामील करने के लिए जम्मू स्थित एनआईए के उप महानिरीक्षक (डीआईजी) को भेजा जाता है।”
भारत और अमेरिका द्वारा वैश्विक आतंकवादी घोषित किया गया सईद, 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों का मास्टरमाइंड भी माना जाता है। एनआईए ने छह जुलाई, 2026 को उसके खिलाफ कायरतापूर्ण पहलगाम आतंकवादी हमले के मामले में आरोप पत्र दायर किया था। पहलगाम आतंकी हमले के मामले में एनआईए ने विशेष अदालत में पूरक आरोपपत्र दाखिल किया है। इसमें हाफिज सईद पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और उसके सहयोगी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) के प्रमुख के रूप में कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उस पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने और सीमा पार से साजिश रचने का भी आरोप लगाया गया है।
गौरतलब है कि 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए इस आतंकी हमले में धर्म के आधार पर लोगों को निशाना बनाया गया था। इस हमले में 25 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें अधिकांश पर्यटक और एक स्थानीय नागरिक शामिल थे। घटना के बाद पहलगाम थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शुरुआती जांच जम्मू-कश्मीर पुलिस ने की, जिसके बाद गृह मंत्रालय ने यह मामला एनआईए को सौंप दिया।
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