सतलुज उफनी, सुन्नी के तटीय क्षेत्र डूबे

By: Jul 11th, 2026 12:50 am

सिल्ट बनी आफत, चार साल से जलभराव और टूट रही सडकें, बैठकों के बावजूद नहीं निकला स्थायी समाधान

स्टाफ रिपोर्टर-सुन्नी
मानसून की पहली बारिश ने ही शिमला ग्रामीण के उपमंडल सुन्नी में आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सतलुज नदी में बढ़ती सिल्ट के कारण पिछले चार वर्षों से हर बरसात में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो रहे हैं। तटीय इलाकों में जलभराव से जनजीवन प्रभावित हो रहा है, वहीं शिमला-करसोग मार्ग पर सेल्फी प्वाइंट के समीप क्षतिग्रस्त सडक़ इस बार भी खतरे के निशान पर पहुंच गई है। वर्ष 2023 और पिछले साल भारी बारिश से क्षतिग्रस्त हुई यह सडक़ अब तक पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो पाई है। सडक़ के दोबारा टूटने की आशंका से करसोग और शिमला ग्रामीण क्षेत्र के लोग चिंतित हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बरसात से पहले दावे और निरीक्षण तो होते हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। जानकारों के अनुसार सतलुज नदी में सिल्ट जमा होने से पानी का बहाव प्रभावित हो रहा है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है। सिल्ट हटाने को लेकर प्रशासन और लोक निर्माण विभाग स्तर पर कई बार चर्चा हो चुकी है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के अनुसार बीबीएमबी से सिल्ट हटाने को लेकर बातचीत चल रही है। हालांकि लोगों का कहना है कि अभी तक यह मामला बैठकों और सर्वे तक ही सीमित है। लगातार बारिश और नाथपा डैम से पानी छोड़े जाने के बाद सुन्नी के तटीय इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है। आईटीआई सुन्नी, काली माता मंदिर, वर्षा शालिका, श्मशान घाट, विश्राम गृह सुन्नी और आसपास के क्षेत्रों में पानी भरने का खतरा पैदा हो गया है।

ऐतिहासिक चाबा बिजलीघर के समीप भी जलभराव दर्ज किया गया है। आईटीआई सुन्नी में पानी भरने के कारण कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (सीबीटी) को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सुन्नी में शिफ्ट करना पड़ा। वहीं, आईटीआई के विद्यार्थियों को शुक्रवार को छुट्टी दी गई। प्रशासन की ओर से आवश्यकता पडऩे पर विद्यार्थियों को स्कूल या कालेज में अस्थायी रूप से स्थानांतरित करने की तैयारी की जा रही है। उपमंडलाधिकारी सुन्नी राजेश वर्मा ने आईटीआई सुन्नी, आसपास के प्रभावित क्षेत्रों और शिमला-करसोग मार्ग पर सेल्फी प्वाइंट का निरीक्षण किया। उन्होंने आपदा प्रबंधन को लेकर बैठक भी की। उन्होंने बताया कि फिलहाल सतलुज का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है। आईटीआई में रिसाव के कारण पानी भरा है और प्रशासन ने आपदा से निपटने की तैयारियां कर ली हैं। सेल्फी प्वाइंट पर स्थिति बिगडऩे पर यातायात वैकल्पिक मार्ग से डायवर्ट किया जाएगा। उधर, सुन्नी-लुहरी मार्ग पर लुंसु के समीप चौड़ीकरण कार्य के दौरान डंगा गिरने से सडक़ वाहनों की आवाजाही के लिए बंद हो गई है। बताया जा रहा है कि भारी ब्लास्टिंग के कारण भूस्खलन हुआ। इससे पहले भी इसी मार्ग पर सडक़ क्षतिग्रस्त होने से करीब दो महीने तक यातायात प्रभावित रहा था। स्थानीय लोगों ने यात्रियों की सुविधा के लिए बसों की अदला-बदली व्यवस्था शुरू करने की मांग की है।

हर साल टूटती हैं सडक़ें, संपर्क पर पड़ता है असर

सुन्नी क्षेत्र में हर मानसून भूस्खलन और जलभराव से परेशानी बढ़ जाती है। सेल्फी प्वाइंट और लुंसु जैसे संवेदनशील स्थानों पर सडक़ क्षति से शिमला, करसोग और आसपास के क्षेत्रों के लोगों की आवाजाही प्रभावित होती है।

सतलुज की सिल्ट हटाने पर टिकी समाधान की उम्मीद

सतलुज नदी में लगातार बढ़ रही सिल्ट को क्षेत्र में बाढ़ का प्रमुख कारण माना जा रहा है। प्रशासन और बीबीएमबी के बीच सिल्ट हटाने को लेकर चर्चा जारी है, लेकिन ग्रामीणों को अब भी स्थायी समाधान का इंतजार है।


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