सडक़ को तरसे 400 परिवार
बरी पंचायत में चार किलोमीटर सडक़ बदहाल, 50 हजार सेब की पेटियों की ढुलाई पर पड़ रहा भारी खर्च
वरिष्ठ संवाददाता-रिकांगपिओ
आजादी के 80 साल बाद भी निचार ब्लॉक की बरी ग्राम पंचायत के कंडे क्षेत्र के करीब 400 परिवार सडक़ सुविधा के लिए तरस रहे हैं। बरी बस स्टैंड से कंडे तक करीब 3 से 4 किलोमीटर सडक़ की हालत बदहाल होने से ग्रामीणों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। हर साल यहां से करीब 50 हजार सेब की पेटियां निकलती हैं, लेकिन सडक़ की खराब हालत के कारण सेब की ढुलाई पर किसानों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। सेब सीजन में मजदूर एक पेटी सडक़ तक पहुंचाने के लिए 100 से 150 रुपये तक किराया मांगते हैं। सडक़ की बदहाली से परेशान ग्रामीणों ने सरकार और संबंधित विभाग की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए जाने पर खुद ही सडक़ सुधारने का बीड़ा उठाया है। बरी पंचायत के नौजवान पिछले 70 से 80 दिनों से श्रमदान कर सडक़ को दुरुस्त करने में जुटे हैं। हर रोज 10 से 15 युवा अपना काम छोडक़र सडक़ निर्माण में श्रमदान कर रहे हैं।
कृष्ण कपूर ने 30 फलदार सेब के पौधों वाली जमीन, एजय चंद ने 60 मीटर बगीचे की जमीन तथा शशि कपूर, रमेश, केदार सिंह सहित कई अन्य ग्रामीणों ने सडक़ के लिए जमीन उपलब्ध करवाई है। बरी ग्राम पंचायत के उपप्रधान दिनेश कुमार ने बताया कि बरी बस स्टैंड से कंडे तक करीब 3 से 4 किलोमीटर सडक़ का निर्माण ग्रामीण अपने स्तर पर कर रहे हैं। पूर्व वन विकास निगम उपाध्यक्ष सूरत नेगी ने कहा कि बरी पंचायत के नौजवानों का श्रमदान सरकारी व्यवस्था की नाकामी का जीता-जागता उदाहरण है। जिस सडक़ की मरम्मत सरकार और संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है, उसे ग्रामीण अपने हाथों से ठीक करने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति प्रदेश सरकार और स्थानीय मंत्री की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने सरकार से ग्रामीणों की समस्या का जल्द समाधान करने और सडक़ को पक्का करने की मांग की।
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