चिट्टा तस्करी के दोषी को पांच साल की जेल
अदालत ने लगाया एक लाख रुपए जुर्माना, राशि न भरने पर एक साल अतिरिक्त कारावास
स्टाफ रिपोर्टर – धर्मशाला
प्रदेश के जिला कांगड़ा के नूरपुर थाना क्षेत्र में दर्ज नशा चिट्टा तस्करी के मामले में अदालत ने आरोपी नसीब कुमार को दोषी करार देते हुए पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर उसे एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वक्फ ट्रिब्यूनल कोर्ट धर्मशाला के न्यायाधीश जसवंत सिंह ठाकुर ने उक्त अहम फैसला सुनाया है। जानकारी के अनुसार यह मामला नूरपुर थाने में चार मई 2022 को दर्ज प्राथमिकी संख्या 145/2022 के तहत मादक पदार्थ अधिनियम की धारा 21 में दर्ज किया गया था। मामले में आरोपी के कब्जे से 7.86 ग्राम चिट्टा हेरोएन बरामद की गई थी। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच पूरी कर आरोप पत्र अदालत में पेश किया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से जिला न्यायवादी डीए संजीव राणा ने कुल 13 गवाहों के ब्यान दर्ज करवाए गए। साथ ही नायब कोर्ट हैरी सिंह ने गवाहों को ब्यान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने नसीब कुमार को मादक पदार्थ अधिनियम की धारा 21 के तहत दोषी करार देते हुए गुरुवार को पांच वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा
सुनाई। साथ ही जुर्माना न भरने पर एक वर्ष के अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
चाकू से हमला करने के मामले में आरोपी बरी
धर्मशाला। जिला मुख्यालय धर्मशाला के साथ लगते चरान खड्ड में वर्ष 2015 में कमरे में घुसकर युवक पर चाकू से हमला करने के मामले में आरोपी को अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कांगड़ा स्थित धर्मशाला डॉ. हकीकत ढांडा की अदालत ने शुक्रवार को मामले में फैसला सुनाया। आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 451 और 324 के तहत मामला दर्ज था। अभियोजन के अनुसार चार अप्रैल 2015 की रात करीब 11 बजे चरान खड्ड स्थित कमरे में शिकायतकर्ता शंकर कुमार मौजूद था। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में आरोपी की पहचान स्थापित करने के लिए पहचान परेड कराई जानी चाहिए थी, लेकिन जांच के दौरान ऐसा नहीं किया गया। इन परिस्थितियों और अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों में सामने आए विरोधाभासों के आधार पर अदालत ने माना कि आरोपी के खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित नहीं हो सके। अदालत ने दोनों आरोपों पर अभियोजन के पक्ष में निर्णय नहीं दिया और मोहम्मद राशिद को दोनों धाराओं से बरी कर दिया।
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