हिमाचल में नशे पर सरकार का बड़ा प्रहार, 5,642 मामले दर्ज, 8,250 अपराधी गिरफ्तार

By: Aug 18th, 2026 5:47 pm

शिमला। स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल की अध्यक्षता में आज यहां मादक पदार्थों के सेवन और तस्करी के विरुद्ध हितधारकों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें हिमाचल को नशा मुक्त बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर डॉ. शांडिल ने कहा कि मादक पदार्थ शारीरिक एवं मानसिक दृष्टि से हानिकारक होते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नशे के सेवन एवं तस्करी के विरुद्ध प्रभावशाली कदम उठा रही हैं। प्रदेश सरकार ने नशे के विरुद्ध जीरो टोलरेंस नीति को अपनाया है तथा नशे की रोकथाम के लिए विधानसभा में सख्त कानून पारित किए गए हैं। कानून में मृत्युदंड, आजीवन कारावास, भारी जुर्माना और संपत्ति जब्त करने जैसे कड़े प्रावधान किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने नशे के विरुद्ध 15 नवम्बर, 2025 को शिमला के ऐतिहासिक रिज से एंटी-चिट्टा वॉकथॉन की शुरुआत की। यह आयोजन चिट्टे के विरुद्ध आवाजों को एक कर इसे जन-आंदोलन का रुप देने के उद्देश्य से आरम्भ किया गया है। धर्मशाला, हमीरपुर एवं बिलासपुर में भी विशाल वॉकथॉन आयोजित किए गए हैं। इनमें युवाओं, महिलाओं, सामाजिक संगठनों एवं आम जनता ने हजारों की संख्या में भाग लिया।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में राष्ट्रीय नशा निवारण अभियान के तहत सराहनीय कार्य किया जा रहा है। अभियान के तहत पिछले वर्ष सभी जिलों में लगभग 18.50 लाख लोगों को नशे के विरुद्ध जागरूक किया गया। इसमें 17,304 शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ रहे बच्चे भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य बना है जहां पंचायत स्तर पर चिट्टा तस्करों एवं इसका नशा करने वालों की पहचान कर पंचायतों को विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। प्रदेश में पीआइटी एनडीपीएस अधिनियम को सख्ती से लागू करते हुए अब तक 63 करोड़ रुपए से अधिक की सम्पत्ति जब्त की गई है।

प्रदेश सरकार के कार्यकाल के दौरान 5 हज़ार 642 मामले दर्ज किए गए हैं और 8 हज़ार 250 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में जिला कुल्लू, ऊना, हमीरपुर और कांगड़ा में पुरूषों के लिए चार तथा रेडक्रास सोसायटी कुल्लू द्वारा महिलाओं के लिए एक नशा निवारण एवं पुनर्वास केन्द्र संचालित किया जा रहा है। हाल ही में मशोबरा में ‘नव-जीवन’ महिला नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केन्द्र खोला गया है। यह केन्द्र प्रदेश का पहला महिला नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केन्द्र है। यह महिलाओं को केवल उपचार ही नहीं प्रदान करेगा, बल्कि उनके लिए सम्मानजनक जीवन की ओर लौटने के अवसर भी खोलेगा।

प्रदेश सरकार सिरमौर जिला के कोटला बड़ोग में 100 बिस्तरों वाला अत्याधुनिक नशामुक्ति केन्द्र भी स्थापित कर रही है। उन्होंने कहा कि नशा लोगों, विशेषकर बच्चों के सर्वांगीण विकास को बुरी तरह से प्रभावित करता है। बच्चों का नशे के दुषचक्र में फसना बेहद चिन्ता का विषय है। उन्होंने कहा कि नशा करने वाला व्यक्ति आदत से मजबूर हो जाता है और समाज को इससे एक बीमार व्यक्ति की तरह देखना चाहिए न की उसे समाज के सामने शर्मसार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नशा करने वाले व्यक्ति को सही उपचार और मार्गदर्शन की आवश्यकता है और इस दिशा में प्रदेश सरकार गंभीरता से प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश को देवभूमि के नाम से जाना जाता है तथा हमारे समाज का सदैव ही धार्मिक झुकाव रहा है। ऐसे में आज का युवा पूजा पद्धति के स्थान पर नशे का सेवन चुन रहा है तो यह परिवार और समाज द्वारा उन्हें दिए जा रहे संस्कारों पर भी सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि बच्चों को पुनः सही राह पर लाना जहां वे देवभूमि की समृद्ध परम्पराओं के ध्वजवाहक बनें यह जिम्मेदारी प्रदेश सरकार के साथ-साथ माता-पिता और समाज को वहन करनी है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने कहा कि माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वह अपने बच्चों की जीवनशैली को स्वस्थ्य बनाएं, उनमें अच्छी आदतों का संचार करें और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाएं। इसके साथ ही उनकी प्रतिभाओं का विकास कर उन्हें संस्कारी बनाएं ताकि वह सामाजिक विकास में सक्रिय भागीदार बनें।


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