लोहारली-चुरूडू पुल पर सियासी संग्राम
पूर्व विधायक राजेश ठाकुर को पुलिस ने रोका, समर्थकों की नारेबाजी से गूंजा इलाका
स्टाफ रिपोर्टर-गगरेट
गगरेट व चिंतपूर्णी विधानसभा क्षेत्रों समेत जिला ऊना के चार विधानसभा क्षेत्रों के हजारों लोगों के लिए लाइफलाइन बनने जा रहे लोहारली-चुरूडू पुल पर वीरवार को उस समय सियासी माहौल गरमा गया, जब प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक राजेश ठाकुर के प्रस्तावित आगमन से पहले पुल के उदघाटन की अफवाह फैल गई। देखते ही देखते पूरा क्षेत्र पुलिस छावनी में तब्दील हो गया और भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पूर्व विधायक राजेश ठाकुर लोहारली गांव पहुंचे, जहां बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत किया। इसके बाद सैकड़ों समर्थकों का काफिला उन्हें लेकर नवनिर्मित पुल की ओर बढ़ा। हालांकि पुल से करीब 300 मीटर पहले पुलिस ने बैरिकेड लगाकर उनका रास्ता रोक दिया। पुलिस ने राजेश ठाकुर को आगे बढऩे की अनुमति नहीं दी। इस दौरान पूर्व विधायक ने पैदल पुल की ओर जाने देने का कारण पूछा, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने केवल इतना कहा कि उन्हें पुल की ओर जाने की अनुमति नहीं है।
इसी बात को लेकर पुलिस और समर्थकों के बीच तीखी नोक-झोंक हुई। कुछ देर तक धक्कामुक्की का माहौल भी बना रहा। हालांकि राजेश ठाकुर पुल के ऊपर नहीं जा सके, लेकिन पुल के समीप पहुंचने पर क्षेत्रवासियों ने उन्हें पगड़ी और शाल भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान उनके समर्थन में राजेश ठाकुर जिंदाबाद के नारे गूंजते रहे। इधर, पुल की अप्रोच रोड के निर्माण के लिए अपनी भूमि दान देने वाले भूमि मालिकों को भी पुलिस द्वारा आगे जाने से रोके जाने पर लोगों में नाराजगी देखने को मिली। इस दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के खिलाफ भी नारेबाजी की गई। लोहारली-चुरूडू पुल लंबे समय से गगरेट और चिंतपूर्णी क्षेत्र की प्रमुख मांग रहा है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरे राजेश ठाकुर ने इसे अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करने का वादा किया था। इसके बाद उन्होंने इस परियोजना को मंजूरी दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए। बताया गया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर के गगरेट दौरे के दौरान राजेश ठाकुर ने यह मांग प्रमुखता से उठाई, जिस पर मुख्यमंत्री ने पुल निर्माण का ऐलान किया। इसके बाद सांसद अनुराग सिंह ठाकुर के साथ उन्होंने नई दिल्ली में केंद्रीय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से कई दौर की मुलाकात की। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप केंद्र सरकार ने पुल निर्माण के लिए करीब 43 करोड़ रुपये स्वीकृत किए। क्षेत्रवासी इसी योगदान के लिए राजेश ठाकुर का सम्मान करना चाहते थे। कार्यक्रम से एक दिन पहले भाजपा मंडल गगरेट और दौलतपुर चौक के महामंत्रियों की ओर से सोशल मीडिया पर संदेश जारी किया गया कि वीरवार का कार्यक्रम भाजपा का अधिकृत कार्यक्रम नहीं है तथा पूर्व विधायक के निजी सचिव कार्यकर्ताओं को उद्घाटन समारोह में आने के लिए कह रहे हैं। इस संदेश के वायरल होते ही मामला तूल पकड़ गया और प्रशासन सतर्क हो गया। बताया जाता है कि मामला शिमला तक पहुंचने के बाद सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई। वहीं इस दौरान ऐसा लग रहा था कि छावनी बन गई हो।
कुछ देर तक सारा माहौल हुआ तनावपूर्ण
चुरुडू। चुरुडू-लोहारली पुल का उदघाटन भले ही विकास की नई कहानी लिखने जा रहा हो, लेकिन उद्घाटन से पहले ही पुल सियासी टकराव का केंद्र बन गया। गुरुवार को गगरेट के पूर्व विधायक राजेश ठाकुर अपने समर्थकों के साथ पुल पर पहुंचे, लेकिन पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें बैरिकेडिंग पर ही रोक दिया। इसके बाद मौके पर भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जबकि समर्थकों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कुछ देर तक पुल के दोनों ओर तनावपूर्ण माहौल बना रहा। समर्थकों ने आरोप लगाया कि सरकार पुल के उद्घाटन का पूरा श्रेय खुद लेने के लिए विपक्षी नेताओं को जानबूझकर कार्यक्रम से दूर रख रही है। विरोध के बीच राजेश ठाकुर समर्थकों के साथ सडक़ पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। पूर्व विधायक राजेश ठाकुर ने कहा कि चुरुडू-लोहारली पुल किसी एक दल की नहीं, बल्कि क्षेत्र की जनता की वर्षों पुरानी मांग का परिणाम है।
जिन्होंने किया दान, उनको किया सलाम
विरोध प्रदर्शन के बाद राजेश ठाकुर ने पुल और संपर्क सडक़ के निर्माण के लिए भूमि दान करने वाले परिवारों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि इन परिवारों के त्याग और सहयोग के बिना यह परियोजना साकार नहीं हो सकती थी। उन्होंने भूमि दाताओं को क्षेत्र के विकास का वास्तविक नायक बताते हुए उनका आभार व्यक्त किया। स्वां नदी पर बने इस बहुप्रतीक्षित पुल के उदघाटन से पहले ही सियासत गरमा गई है। पुल के निर्माण का श्रेय किसे मिले, इसे लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इसी मुद्दे की चर्चा है। गुरुवार का घटनाक्रम इस सियासी मुकाबले को और तेज कर गया।
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