विरोध करने से जेन-जी देशद्रोही नहीं बन जाते, RSS प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान

By: Aug 7th, 2026 12:01 am

भागवत बोले, छात्रों के आंदोलन ने सरकार को दिखाया आईना

एजेंसियां — मुंबई

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गुरुवार को जेन-जी को लेकर अपने विचार साझा किए और केंद्र की एनडीए सरकार को छात्रों के आंदोलन को लेकर आईना भी दिखाया। उन्होंने कहा कि यह पीढ़ी (जेन जी) पिछली पीढ़ी जैसी नहीं है, जो बड़ों से सवाल नहीं करती थी। यह पीढ़ी आज तार्किक जवाब चाहती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नई पीढिय़ां जेन जी और जेन अल्फा, पुरानी पीढिय़ों से भी ज्यादा देशभक्त और ईमानदार हैं। हमें उनकी बातों को सुनना चाहिए। केवल विरोध करने से वे देश विरोधी नहीं हो जाते। वे अपने ही लोग हैं। जैसे उन्हें हमारी बात समझनी चाहिए, ठीक वैसे ही हमें भी उनकी बात समझनी चाहिए। मुंबई के नीता अंबानी कल्चरल सेंटर में एक कार्यक्रम में अपनी बात रख रहे आरएसएस प्रमुख ने जोर देकर कहा कि जेन जी अगर आंदोलन कर रही है, तो हमें उनकी बात को सुनना होगा। उनके साथ बातचीत में कमी थी, इसलिए जंतर मंतर पर आंदोलन हुआ है। संघ प्रमुख ने लोकतंत्र में आंदोलन को लेकर बात करते हुए कहा कि यह संवाद का तरीका है।

अगर आगे बढऩा है, तो हमें सभी को साथ लेकर चलना होगा। बंटवारे के साथ हम कुछ नहीं कर सकते। जहां तक जेन-जी की बात है, तो शिक्षा में सुधार की जरूरत है। इसलिए संवाद बेहद जरूरी है। मेरा अनुभव है कि जब हम इस उम्र में थे, तब हमारा स्वभाव सवाल न करने का था, लेकिन जेन जी हर बात का तार्किक जवाब चाहती है। उसे सिर्फ जबाव ही नहीं, बल्कि अपनापन और स्नेह भी चाहिए। उन्होंने जेन जी आंदोलन पर कहा कि आंदोलन किसी व्यक्ति या समूह के खिलाफ नहीं होना चाहिए। बल्कि इसे सिस्टम में सुधार के तौर पर देखना चाहिए। अगर जेन-जी से संवाद की कमी न होती, तो आंदोलन की नौबत ही न आती। खबरों में आया है कि कुछ उपद्रवी भी उस आंदोलन में घुस आए थे, लेकिन अगर मैं किसी पर आंखें बंद करके भरोसा कर सकता हूं, तो वह जेन-जी ही हैं।

सरकार पहले ही बात कर लेती, तो नहीं होता आंदोलन

संघ प्रमुख ने कहा कि आंदोलन तब होता है, जब बातचीत नाकाम हो जाती है। अगर सरकार ने पहले ही बात कर ली होती, तो आंदोलन की जरूरत नहीं होती। आंदोलन भी बातचीत का एक तरीका है। हमें भी देखना होगा कि अगर जेन जी चिल्ला रही है, तो कोई तकलीफ है, तभी चिल्ला रही है।

देश के बजट का छह फीसदी शिक्षा पर खर्च हो

्रमोहन भागवत ने कहा कि हम एजुकेशन बजट बढ़ाने का समर्थन करते हैं। यह कुल बजट के छह फीसदी तक होना चाहिए। उन्होंने साथ ही कहा कि ऐसा किसी ने नहीं कहा कि सरकार ही पूरी शिक्षा चलाए। हमें भी सहयोग करना होगा। नई पीढ़ी के बारे में हमें चिंता होनी चाहिए।

रिजर्वेशन पर नहीं होनी चाहिए राजनीति

शिक्षा और नौकरी में रिजर्वेशन और जनरल कैटेगरी के बच्चों के साथ कथित भेदभाव के सवाल पर संघ प्रमुख ने कहा कि इस बारे में मैं सीधा जवाब नहीं दूंगा। हमें अंबेडकर जी की सोच को फॉलो करना होगा। सामाजिक भेदभाव चलता रहेगा, जब तक रिजर्वेशन रहेगा। इसमें राजनीति नहीं होनी चाहिए। इससे समाज में भेदभाव बनता है, इससे एकता नहीं आती।


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