चार साल में 100 अरब डालर तक पहुंचाएंगे आपसी कारोबार, दोनों देशों में दोस्ती का नया चैप्टर शुरू

By: Sep 12th, 2026 12:01 am

प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन की द्विपक्षीय बैठक से दोनों देशों में दोस्ती का नया चैप्टर शुरू

दिव्य हिमाचल ब्यूरो — नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच शुक्रवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में करीब 45 मिनट तक चली द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करने पर खास जोर रहा। दोनों देशों के बीच 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डालर तक पहुंचाने का लक्ष्य सबसे अहम मुद्दों में रहा। इसके अलावा औद्योगिक सहयोग, परमाणु ऊर्जा, कुशल भारतीय कामगार, क्रिटिकल मिनरल्स और खाद की सप्लाई जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। भारत और रूस के बीच इस समय करीब 60 अरब डालर का सालाना कारोबार होता है। इसमें रूस से भारत को होने वाला कच्चे तेल का आयात बड़ी भूमिका निभाता है। अब दोनों देश अगले चार साल में व्यापार को 40 अरब डालर और बढ़ाकर 2030 तक 100 अरब डालर तक ले जाना चाहते हैं। इसके लिए भारत और रूस नए कारोबारी क्षेत्रों की पहचान करने, बाजार तक पहुंच बढ़ाने और भारतीय उत्पादों की रूस में बिक्री बढ़ाने पर काम कर सकते हैं।

दोनों देश सिविल न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में भी सहयोग मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। इसमें परमाणु ईंधन से लेकर न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स को लंबे समय तक तकनीकी और दूसरी तरह का सपोर्ट देने तक सहयोग शामिल हो सकता है। बैठक में भारतीय कुशल कामगारों के रूस जाने का मुद्दा भी अहम रहा। दोनों देश ऐसा सिस्टम बनाने पर विचार कर रहे हैं, जिससे ज्यादा भारतीय स्किल्ड वर्कर्स रूस जा सकें। इससे भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए रोजगार के नए अवसर खुल सकते हैं और रूस की जरूरत भी पूरी हो सकती है। क्रिटिकल मिनरल्स आज दुनिया की बड़ी रणनीतिक जरूरत बन चुके हैं। इलेक्ट्रिक व्हीकल, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरी हाईटेक इंडस्ट्री में इनकी जरूरत होती है। ऐसे में भारत और रूस ने इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की है। इसका मकसद रणनीतिक उद्योगों के लिए जरूरी सप्लाई चेन को मजबूत करना है।

ईरानी राष्ट्रपति बोले, अपनी करेंसी में कारोबार बढ़ाएं

ब्रिक्स बिजनेस फोरम में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा कि ब्रिक्स देशों को आपसी कारोबार में अपनी-अपनी करेंसी का इस्तेमाल बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था कुछ गिनी-चुनी करेंसी पर ज्यादा निर्भर है, इसलिए यह राजनीतिक संकट से प्रभावित हो सकती है। दुनिया इस समय बहुत मुश्किल दौर से गुजर रही है। आर्थिक दबाव के जरिए दूसरे देशों पर राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है। इससे कारोबार का माहौल मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की असली ताकत सिर्फ बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में नहीं है। ताकत तब दिखेगी, जब सदस्य देश आपस में व्यापार और निवेश बढ़ाएं और मिलकर आर्थिक परियोजनाओं में पैसा लगाएं।

पुतिन का तंज, ब्रिक्स अमरीका-यूरोप से बहुत आगे निकला

नई दिल्ली। ब्रिक्स बिजनेस फोरम में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे प्रतिस्पर्धा में आगे रहने के लिए व्यापार में खुलेआम अनुचित तरीके अपना रहे हैं। इसके तहत पाइपलाइनों को ध्वस्त किया जा रहा है, अंतरराष्ट्रीय परिवहन और कॉरिडोर बंद किये जा रहे हैं, वाणिज्यिक जहाज जब्त किए जा रहे हैं और अवैध प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। पुतिन ने पश्चिमी देशों पर तंज कसते हुए कहा कि समझ नहीं आता कि कुछ कमजोर हो चुके पश्चिमी देश अब भी खुद को जी-7 क्यों कहते हैं। पुतिन ने कहा कि ब्रिक्स आर्थिक ताकत के मामले में जी-7 से काफी आगे निकल चुका है। दुनिया की अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव हो रहे हैं और अब नए देश विकास को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की अर्थव्यवस्था का आकार लगातार बढ़ रहा है। वहीं, पश्चिमी देशों का दबदबा पहले जैसा नहीं रहा। ब्रिक्स के लिए आगे बढऩे का यह बेहतरीन मौका है।


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