गोसदन खाली, सडक़ों पर घूम रहा गोवंश
कांगड़ा जिला में गोसदनों में जगह होने के बाद सडक़ों पर भटक रहे मेवशी आए दिन हो रहे घायल
स्टाफ रिपोर्टर – धर्मशाला
प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में बेसहारा पशुओं की समस्या लगातार बनी हुई है। जिले में करीब 28 गोसदन संचालित होने के बावजूद इनसे दोगुने से अधिक बेसहारा पशु सडक़ों पर घूम रहे हैं। पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में संचालित गोसदनों की कुल क्षमता करीब पांच हजार पशुओं की है, जबकि इनमें वर्तमान में लगभग तीन हजार पशु ही रखे गए हैं। इसके विपरीत करीब 6500 बेसहारा पशु सडक़ों पर हैं। सडक़ों पर घूम रहे बेसहारा पशु आए दिन दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। इसके अलावा खेतों में पहुंचकर फसलों को नुकसान पहुंचाने की शिकायतें भी सामने आती रहती हैं। विभागीय स्तर पर इन पशुओं को सुरक्षित रूप से गोसदनों तक पहुंचाने के लिए पंचायतों और नगर निकायों को निर्देश दिए गए हैं। विभाग के अनुसार जिले के गोसदनों में अभी करीब दो हजार पशुओं को और रखा जा सकता है।
ऐसे में संयुक्त प्रयास किए जाएं तो सडक़ों पर घूम रहे करीब दो हजार बेसहारा पशुओं को चरणबद्ध तरीके से गोसदनों में पहुंचाया जा सकता है। इसके लिए संबंधित स्थानीय निकायों और विभागों को समन्वय के साथ काम करने की जरूरत है। पशुपालन विभाग के अनुसार नगर निकायों और पंचायतों को सडक़ों पर घूम रहे बेसहारा पशुओं को पकडक़र सुरक्षित रूप से गौसदनों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। स्थानीय निकायों की ओर से पशुओं को गोसदनों में भेजने का अनुरोध मिलने पर उपलब्ध क्षमता के आधार पर विभाग अनुमति प्रदान करता है। इसके बाद पशुओं को गोसदनों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाती है। विभाग ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के संबंधित स्थानीय निकायों को इस दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
पशुपालन अधिकारी डा. सीमा गुलेरिया के बोल
पशुपालन विभाग जिला कांगड़ा की उपनिदेशक डाक्टर सीमा गुलेरिया ने बताया कि जिले में करीब 28 गोसदन संचालित हैं, जिनकी क्षमता लगभग पांच हजार पशुओं की है। इनमें करीब तीन हजार पशु रखे गए हैं। सडक़ों पर घूम रहे बेसहारा पशुओं को गोसदनों तक पहुंचाने के लिए पंचायतों और नगर निकायों को निर्देश दिए गए हैं। उपलब्ध क्षमता के अनुसार पशुओं को गोसदनों में भेजने की अनुमति दी जाती है।
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