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हिमाचल में फिर बिगड़े हालात, कहीं लैंडस्लाइड, कहीं सड़कें बंद, लाखों की फसल तबाह, अब आगे क्या

By: Sep 28th, 2026 9:00 pm

सितंबर का महीना खत्म होने को है… लेकिन हिमाचल में मानसून मानो जाने का नाम ही नहीं ले रहा। पहाड़ों पर बारिश के साथ बर्फबारी हो रही है, कहीं पहाड़ दरक रहे हैं, कहीं सड़कों पर मलबा आ रहा है और कहीं खेत-बागीचों में तैयार फसल तबाही की भेंट चढ़ रही है। महज दो-तीन दिन की बारिश ने प्रदेश के कई हिस्सों में फिर से मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सबसे ज्यादा असर किन्नौर और लाहुल-स्पीति में नजर आ रहा है, जहां बारिश के साथ बर्फबारी और लैंडस्लाइड ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सवाल ये है कि सितंबर के आखिरी दिनों में मौसम का ये बदला मिजाज आखिर कितनी और मुश्किलें बढ़ाएगा?

किन्नौर में बारिश और बर्फबारी ने जनजीवन अस्त वयस्त कर दिया है। बीते रोज भी प्रसिद्ध पर्यटन स्थल छितकुल के आगे रानी कांडा मार्ग पर ग्लेशियर से भारी हिमस्खलन हुआ, जिसके चलते सड़क पूरी तरह बाधित हो गई। इस दौरान कुछ यात्री भी यहां फंस गए, जिन्हें प्रशासन ने मुश्किल से रेस्क्यू किया। इसके अलावा जिले में कई जगह पहाड़ियों से लगातार मलबा और पत्थर गिरने का सिलसिला जारी है। वहीं दूसरी ओर किन्नौर के कल्पा ब्लॉक के रक्छम गांव में लगातार हो रही बर्फबारी ने बागवानों को भी बड़ा झटका दिया है। रक्छम गांव के पूर्व ग्राम पंचायत प्रधान टिकम सिंह नेगी के मुताबिक पुर्तुंग, सिरिंग, डॉन डांसी और छितकुल में खेतों में सेब के साथ ओगला और फाफरा की लाखों-करोड़ों रुपये की फसल बर्बाद हो गई। पेड़ों पर लगी फसल तो खराब हुई ही, साथ ही 20 से 25 साल पुराने सेब के पौधे भी टूट गए हैं। यानी जिस फसल से बागवानों को कमाई की उम्मीद थी, वही इस बारिश में खत्म हो चुकी है, यहां टापरी स्थित पागल नाला के पास भी लगातार पत्थर गिर रहे हैं। ऐसे में यहां आवाजाही करने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के बीच कमजोर हो चुकी ढलानों से खतरा और बढ़ गया है।

उधर, शिमला जिले के रोहड़ू उपमंडल के चिड़गांव में भी उस समय हड़कंप मच गया, जब देखते ही देखते पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा दरक गया। जांगलिख पुल के पास अचानक पहाड़ी का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आ गिरा। मलबे और चट्टानों के गिरने से सड़क पूरी तरह बाधित हो गई। गनीमत रही कि इस दौरान किसी व्यक्ति को नुकसान नहीं पहुंचा। मौके पर मौजूद लोगों ने भागकर अपनी जान बचाई। बताया जा रहा है कि लैंडस्लाइड के कारण यहां मौजूद खड्ड का बहाव भी कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और संवेदनशील क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी है। अगर इस पूरे मानसून सीजन में हुए नुकसान पर नजर डालें तो हिमाचल में तबाही का आंकड़ा 3500 करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच चुका है। साढ़े 300 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। कहीं लोगों के आशियाने उजड़ गए, कहीं सड़कें और पुल तबाह हुए और कहीं जमीन का बड़ा हिस्सा मलबे में बदल गया। प्रदेश अब भी इस नुकसान से उबरने की कोशिश कर रहा है, इसी नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्र सरकार की अंतर-मंत्रालय केंद्रीय टीम हिमाचल पहुंची है। सोमवार को टीम ने कांगड़ा के शाहपुर में बरसात से हुए नुकसान का जायजा लिया। अब टीम प्रदेश के अलग-अलग प्रभावित इलाकों में जाकर नुकसान का आकलन करेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर केंद्र से हिमाचल को राहत राशि मिलने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

नुकसान का हिसाब तो हो रहा है… लेकिन मौसम की मार थमी नहीं है मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर 29 30 को भी जारी रह सकता है। बिलासपुर, ऊना, शिमला, कांगड़ा, किन्नौर, मंडी, सोलन, हमीरपुर और कुल्लू में भारी बारिश और आंधी को लेकर चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। ऊंची चोटियों पर हो रही बर्फबारी के कारण प्रदेश में ठंड का एहसास भी बढ़ने वाला है। आने वाले दिनों में यही बर्फबारी हिमाचल के पर्यटन कारोबार के लिए राहत की खबर बन सकती है। पहाड़ों पर बर्फ की सफेद चादर पर्यटकों को आकर्षित कर सकती है और टूरिज्म को बूस्ट मिल सकता है। लेकिन इस वक्त सबसे बड़ी चिंता किसान और बागवानों की हैं। खेतों में तैयार फसल और बागीचों में पेड़ों पर लदा फल बारिश और बर्फबारी की मार झेल रहा है। जिन किसानों-बागवानों ने पूरे साल मेहनत की, उनके सामने अब तैयार फसल को बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। सितंबर खत्म होने को है… लेकिन हिमाचल मौसम का मिजाज अभी भी साफ नहीं हुआ है। ऐसे में प्रशासन भी लोगों से अपील कर रहा है कि नदी-नालों से दूरी बनाए रखें, लैंडस्लाइड संभावित क्षेत्रों में जाने से बचें और मौसम की हर चेतावनी को गंभीरता से लें। क्योंकि पहाड़ों में मौसम कब करवट ले ले… इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।


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