महाराजा संसार चंद ने मां की स्मृति में बनवाया था मुरली मनोहर मंदिर, ऐसे पड़ा ‘एक लाखा मंदिर’ नाम
हिमाचल प्रदेश की ऐतिहासिक नगरी सुजानपुर की पहचान यहां मौजूद प्राचीन मंदिरों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ी हुई है। इन्हीं ऐतिहासिक धरोहरों में एक महत्त्वपूर्ण नाम है मुरली मनोहर मंदिर। भगवान श्री राधा-कृष्ण को समर्पित यह प्राचीन मंदिर आज भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मंदिर की धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ इसका इतिहास भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। मुरली मनोहर मंदिर का संबंध कांगड़ा के प्रसिद्ध शासक महाराजा संसार चंद के समय से बताया जाता है। मान्यता के अनुसार महाराजा संसार चंद ने अपनी माता प्रसन्न देवी की स्मृति में इस मंदिर का निर्माण करवाया था। उस समय मंदिर के निर्माण पर करीब एक लाख रुपए खर्च किए गए थे। इसी कारण इसे ‘एक लाखा मंदिर’ के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर की वास्तुकला और यहां मौजूद प्राचीन प्रतिमाएं इसकी ऐतिहासिक महत्ता को और बढ़ाती हैं। मंदिर परिसर में भगवान श्री राधा-कृष्ण की सुंदर प्रतिमाओं के साथ-साथ अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। मंदिर परिसर में सूर्य मंदिर भी स्थापित है, जहां श्रद्धालु धार्मिक आस्था के साथ दर्शन करते हैं। मुरली मनोहर मंदिर के इतिहास में वर्ष 1905 का भूकंप भी एक महत्त्वपूर्ण अध्याय है। उस समय आए विनाशकारी भूकंप ने हिमाचल के कई क्षेत्रों में भारी नुकसान पहुंचाया था।
इसके बावजूद मंदिर के गर्भगृह में स्थापित प्राचीन प्रतिमाएं और कई विशाल पाषाण पिलर सुरक्षित रहे। आज भी मंदिर में मौजूद ये पिलर उस दौर की मजबूत निर्माण कला और ऐतिहासिक विरासत की गवाही देते नजर आते हैं। मंदिर से जुड़ी एक अनोखी धार्मिक मान्यता भी श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय रहती है। कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण की प्राण प्रतिष्ठा के समय उनकी बांसुरी की दिशा उलट गई थी। श्रद्धालु इस घटना को भगवान श्रीकृष्ण की विशेष लीला से जोडक़र देखते हैं। यही मान्यता मंदिर को अन्य धार्मिक स्थलों से अलग पहचान भी देती है। मंदिर की एक और खासियत यहां दिखाई देने वाली प्राचीन कलाकृतियां और देवी-देवताओं की प्रतिमाएं हैं। मंदिर की दीवारों और परिसर में मौजूद शिल्प उस समय की कला और धार्मिक संस्कृति की झलक प्रस्तुत करते हैं। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु जहां पूजा-अर्चना करते हैं, वहीं इतिहास में रुचि रखने वाले लोग मंदिर की वास्तुकला और प्राचीन संरचना को भी करीब से देखते हैं। मुरली मनोहर मंदिर सुजानपुर की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान का अहम हिस्सा है। यह मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि महाराजा संसार चंद के गौरवशाली इतिहास, प्राचीन कला और सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं का जीवंत प्रतीक है। बदलते समय के बावजूद यहां चली आ रही परंपराएं लोगों को अपनी संस्कृति और इतिहास से जोड़ रही हैं। -बिंदिया ठाकुर
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