टीबी जांच में शिमला ने मारी बाजी, लक्ष्य से 115 फीसदी आगे
जनवरी से अगस्त तक 28,008 लोगों की जांच, 1,393 मरीज नोटिफाई
स्टाफ रिपोर्टर-शिमला
टीबी मुक्त अभियान के तहत शिमला जिला में क्षय रोग की पहचान, जांच और उपचार के क्षेत्र में बेहतर प्रगति दर्ज की गई है। जिला स्तरीय टीबी मुक्त अभियान समिति की बैठक शुक्रवार को उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में जनवरी से अगस्त 2026 तक की उपलब्धियों की समीक्षा की गई। आंकड़ों के अनुसार प्रिजम्प्टिव टीबी जांच के लिए 24,408 के लक्ष्य के मुकाबले 28,008 लोगों की जांच की गई, जो 115 प्रतिशत उपलब्धि है। टीबी केस नोटिफिकेशन में 1,387 के लक्ष्य के मुकाबले 1,393 मरीजों को नोटिफाई किया गया। टीबी मरीजों के एचआईवी और ब्लड शुगर स्टेटस की जांच में 98 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की गई, जबकि यूडीएसटी जांच में 96 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया गया। टीबी उपचार सफलता दर 92 प्रतिशत रही। निक्षय पोषण योजना के तहत 1,012 लाभार्थियों के लक्ष्य के मुकाबले 766 लाभार्थियों को भुगतान किया गया। डीआरटीबी उपचार शुरू करने में 95 प्रतिशत और टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट में 90 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की गई।
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि नए पंचायत प्रतिनिधियों को टीबी मुक्त अभियान का प्रशिक्षण दिया जाएगा। एनसीसी और एनएसएस के विद्यार्थियों को भी अभियान से जोडक़र आमजन को जागरूक किया जाएगा। उन्होंने जिले में अधिक से अधिक लोगों की टीबी जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अप्रैल से अगस्त के दौरान जिले में 674 टीबी मरीजों में से 28 मरीजों की मृत्यु दर्ज की गई। वहीं, वर्ष 2025 में जिले की 412 ग्राम पंचायतों में से 141 को टीबी मुक्त घोषित किया गया है। इनमें 23 पंचायतें गोल्ड, 34 सिल्वर और 84 ब्रॉन्ज श्रेणी में शामिल हैं। रोहड़ू विकासखंड टीबी मुक्त पंचायतों की संख्या में सबसे आगे रहा। बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशपाल रांटा, डॉ. विनीत लखनपाल, जिला कार्यक्रम अधिकारी ममता पाल सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
अप्रैल से अगस्त तक 28 टीबी मरीजों की मौत
अप्रैल से अगस्त के दौरान शिमला जिला में टीबी के 674 मरीजों में से 28 की मृत्यु दर्ज की गई है। इस अवधि में मृत्यु दर 4 प्रतिशत रही। शिमला शहरी क्षेत्र में 145 मरीजों में सर्वाधिक 11 मौतें हुईं। मशोबरा में पांच, रामपुर में चार और मतियाना में तीन मरीजों की मृत्यु दर्ज की गई। चिडग़ांव, जुब्बल-कोटखाई, कुमारसैन, ननखड़ी और नेरवा में एक-एक मरीज की मौत हुई। वहीं, सुन्नी और टिक्कर में किसी टीबी मरीज की मृत्यु दर्ज नहीं हुई। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से टीबी के लक्षण दिखने पर समय रहते जांच करवाने और उपचार का पूरा कोर्स करने की अपील की है।
जिला में 141 ग्राम पंचायतें हुईं टीबी मुक्त घोषित
अप्रैल से अगस्त के दौरान शिमला जिला में टीबी के 674 मरीजों में से 28 की मृत्यु दर्ज की गई है। इस अवधि में मृत्यु दर 4 प्रतिशत रही। शिमला शहरी क्षेत्र में 145 मरीजों में सर्वाधिक 11 मौतें हुईं। मशोबरा में पांच, रामपुर में चार और मतियाना में तीन मरीजों की मृत्यु दर्ज की गई। चिडग़ांव, जुब्बल-कोटखाई, कुमारसैन, ननखड़ी और नेरवा में एक-एक मरीज की मौत हुई। वहीं, सुन्नी और टिक्कर में किसी टीबी मरीज की मृत्यु दर्ज नहीं हुई। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से टीबी के लक्षण दिखने पर समय रहते जांच करवाने और उपचार का पूरा कोर्स करने की अपील की है।
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