खुशवंत सिंह परिवार में थी असहमति, कसौली में लिटफेस्ट का आगाज, पहले दिन 11 सत्रों में 18 वक्ताओं ने रखे विचार

By: Oct 23rd, 2026 10:50 pm

प्रधान संवाददाता-कसौली

कसौली में 15वें खुशवंत सिंह लिटफेस्ट का आगाज विचारों की असहमति से हो गया है। लिटफेस्ट के पहले दिन कुल 11 सत्र हुए हैं और इनमें 18 वक्ताओं ने अपने विचार असहमति को लेकर सामने रखे हैं। लिटफेस्ट में एमरजेंसी लगाए जाने पर भी चर्चा हुई। एमरजेंसी लगाए जाने के 51 सालों बाद साहित्यकार खुशवंत सिंह के बेटे राहुल सिंह ने खुलासा किया है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के इस फैसले से परिवार खुश नहीं था। इसके ठीक विपरीत एमरजेंसी लगाए जाने का खुशवंत सिंह सर्मथन कर रहे थे।

कसौली में आयोजित हो रहे खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के पहले दिन आयोजक राहुल सिंह ने कहा कि एमरजेंसी के मामले पर घर पर ही असहमति बन गई थी। एक साक्षात्कार में आयोजक राहुल सिंह ने कहा कि इस एमरजेंसी से परिवार की दिक्कतें भी बढ़ी थीं और प्रेस पर लगाई गई पाबंदी से खुशवंत सिंह भी नाराज हो गए थे और उन्होंने भी तत्त्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को दिया सर्मथन वापस ले लिया था। पहले दिन टेरेस, बैडमिंटन हॉल और टेनिस कोर्ट के पीछे बने लॉन में विभिन्न सत्र आयोजित किए गए। टेरेस पर सरबप्रीत सिंह की संगीत प्रस्तुति ए मेलोडियस प्रीफेस से कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। इसके बाद बच्ची करकरिया और राहुल सिंह ने स्वागत सत्र में भाग लिया।

कॉकरोच का भी जिक्र

लिटफेस्ट में कॉकरोच का जिक्र भी हुआ है और देश में बने ताजा हालातों का असर भी दिखाई दिया है। इसमें असहमति की कला से लेकर मिजोरम के इतिहास और महिला अधिकारों तक के विभिन्न विषयों पर हुई चर्चा हुई है।

आज इन विषयों पर चर्चा

लिटफेस्ट के दौरान तीन दिनों में कुल 27 सत्र आयोजित किए जाने हैं। इनमें 45 से अधिक नामचीन हस्तियां शामिल होंगी। शनिवार को ग्रीन हीरोज, किशोरों से जुड़े मुद्दों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सामान्य ज्ञान जैसे विषयों पर चर्चा होगी। वर्ष 2012 में शुरू हुआ यह महोत्सव खुशवंत सिंह की स्मृति में आयोजित किया जाता है और साहित्य, कला व विचारों के माध्यम से संवाद को बढ़ावा देने का मंच प्रदान करता है।

आपातकाल से बड़ी दिक्कतें, केश तक कटवाने पड़े

खुशवंत सिंह ने शुरू में इंदिरा गांधी और संजय गांधी के कदमों का समर्थन किया था। उन्होंने इसे देश में बढ़ते अराजकता के माहौल में आवश्यक माना था और वाही आई स्पॉटेड द एमरजेंसी जैसी रचनाओं में अपने दृष्टिकोण को व्यक्त किया। आपातकाल समाप्त होने के बाद खुशवंत सिंह ने भी इसके कुछ पहलुओं, विशेषकर प्रेस की आजादी पर लगे प्रतिबंधों को लेकर अपनी राय बदली। उन्होंने बाद में कहा कि जब प्रेस की स्वतंत्रता कुचली गई तो उन्होंने समर्थन वापस ले लिया। राहुल सिंह के अनुसार, आपातकाल के बाद पैदा हुए हालातों में उनके पिता को भी अपने केश कटवाने पड़े थे। यह खुलासा लिटफेस्ट के मौजूदा संस्करण के दौरान आया है।

पदम भूषण लौटाया

खुशवंत सिंह (1915-2014) भारतीय साहित्य और पत्रकारिता के प्रमुख नाम थे। ट्रेन टू पाकिस्तान, द हिस्ट्री ऑफ सिख्स और विद मेलिस टूवॉर्ड्स वन एंड ऑल जैसी रचनाओं के लिए विख्यात। वह इंदिरा गांधी के करीबी माने जाते थे और आपातकाल के दौरान एस्टैब्लिशमेंट लिबरल कहलाए। इसके बाद उन्होंने 1984 के सिख-विरोधी दंगों के विरोध में पद्म भूषण तक लौटा दिया था।

इन्होंने रखे विचार

मिहिरा सूद ने गर्ल्स जस्ट वांट फंडामेंटल राइट्स विषय पर चर्चा की, जबकि लेखक संजॉय हजारीका ने पुस्तक मिजोरम फ्रॉम बैटलफील्ड टू बैलेट बॉक्स के माध्यम से मिजोरम के इतिहास और राजनीतिक बदलावों पर विचार साझा किए। राहुल और प्रतीक ने भोजन और स्वाद से जुड़े विषय पर चर्चा की। उपासना ने नोबेल पुरस्कार से संबंधित विषय पर विचार रखे। रूपिंदर और कमला कपूर ने द गुरु एंड द गुरुद्वारा सत्र में चर्चा की। नारायणी गणेश और निष्ठा लांबा ने युवा पीढ़ी के विचारों और असंतोष से जुड़े पहलुओं पर बात की। जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (सेवानिवृत्त) के साथ केएसएलएफ फॉरएवर यंग पहल का शुभारंभ भी दिन के प्रमुख कार्यक्रमों में शामिल रहा। बैडमिंटन हॉल में गुरवीन चड्ढा और नेहा राज ने लेखन एवं पुस्तक प्रकाशन से जुड़ी कार्यशाला आयोजित की।


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