देवरथ पर सवार होकर निकले भगवान नरसिंह, ढालपुर में उमड़ा आस्था का सैलाब, ढोल-नगाड़ों की धुन पर थिरके लोग
दशहरा उत्सव के छठे दिन ढालपुर में उमड़ा आस्था का सैलाब, ढोल-नगाड़ों की धुन पर थिरके लोग
जिला संवाददाता — कुल्लू
ढालपुर के ऐतिहासिक मैदान में सोमवार को अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा के छठे दिन देव आस्था, राजसी वैभव और सदियों पुरानी परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। भगवान नरसिंह की जलेब यात्रा शाही अंदाज में निकली, तो ढोल-नगाड़ों, करनाल और शहनाई की गूंज के बीच पूरा ढालपुर देवमय हो उठा। सजे-धजे देव रथों के साथ कदमताल करते देवलुओं का उत्साह देखते ही बना। महाराजा और सैंज घाटी के देवताओं ने जलेब यात्रा में भाग लिया। जलेब के दर्शनों के लिए मैदान के चारों ओर लोगों की भीड़ जुटी रही और श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य को अपने कैमरों में कैद करते नजर आए। भगवान नरसिंह की जलेब कुल्लू दशहरा की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है। कुल्लू दशहरे में प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश-दुनिया की विभिन्न संस्कृतियों की झलक भी दिखाई देती है।
सोने के गहनों से सजे देवरथ बने आकर्षण
जलेब यात्रा में शामिल देवी-देवताओं के रथ पारंपरिक आभूषणों और आकर्षक सजावट से सजे नजर आए। स्थानीय लोगों के साथ बाहरी राज्यों से आए पर्यटक भी इस देव परंपरा के साक्षी बने।
परंपरा और आस्था का जीवंत प्रतीक है जलेब
कुल्लू दशहरा केवल सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि यहां की देव परंपराओं, लोक आस्थाओं और सामुदायिक एकता का प्रतीक भी है। भगवान नरसिंह की जलेब इसी विरासत को आगे बढ़ाती है। छठे दिन निकली भव्य यात्रा ने एक बार फिर साबित किया कि देवभूमि कुल्लू में दशहरा केवल मनाया नहीं जाता, बल्कि यहां की संस्कृति और जनजीवन में रचा-बसा है।
आज लंका पर चढ़ाई करेंगे देवी-देवता
कुल्लू दशहरा उत्सव के अंतिम दिन लंका दहन के बाद लौटेंगे ‘घर’
दिव्य हिमाचल ब्यूरो-कुल्लू
विश्व का सबसे बड़ा देव महाकुंभ यानि अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव सातवें दिन मंगलवार को लंका दहन के साथ संपन्न होगा। देवभूमि कुल्लू के अराध्य देवी-देवता लंका पर चढ़ाई करेंगे। वहीं, भगवान रघुनाथ जी की भव्य शोभायात्रा लंका दहन पर निकलेगी। लंका दहन के बाद भगवान रघुनाथ जी सहित देवता-देवता अपने देवालय लौटेंगे। विधिवत पूजा-अर्चना के बाद बुधवार को लंका दहन के लिए माता हिडिंबा की अगवाई में लंकादहन होगा।
इसके बाद भगवान रघुनाथ पालकी में सवार होकर रघुनाथपुर अपने मंदिर लौटेंगे। खास बात यह है कि पूरे देश में एकमात्र कुल्लू दशहरा उत्सव में रावण का पुतला नहीं जलाए जाते हैं। यहां लंका दहन की प्राचीन परंपरा का निर्वहन किया जाता है। देव परंपरानुसार ब्यास नदी के किनारे लंका वेकर में जाकर बावड़ी के पास सभी प्राचीन रिवायतें निभाई जाती हैं। बता दें कि देव समागम में मनाली, निरमंड, आनी, बंजार, सैंज, गड़सा, मणिकर्ण, काईस, ऊझी, लगवैली, महाराजा के 300 से अधिक देवी-देवताओं ने भाग लिया। इस बार भी मुआफीदार , गैर मुआफीदार देवतााअ ें के साथ अन्य देवी-देवता बिना निमंत्रण के पहुंचे हैं। इस बार दशहरा उत्सव के इतिहास में सबसे ज्यादा देवी-देवता विराजमान हुए।
मुख्यमंत्री करेंगे समापन
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का समापन मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू करेंगे। मुख्यमंत्री सुक्खू सोमवार को कुल्लू पहुंचे हैं। सीएम सुक्खू मंगलवार को दशहरा उत्सव का समापन करेंगे।
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