सुप्रीम कोर्ट पहुंचा महाराष्ट्र SIR प्रकरण, वोटर लिस्ट में बड़ी कटौती पर केंद्र, राज्य सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस
दिव्य हिमाचल ब्यूरो— नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग, केंद्र सरकार, राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा है। यह नोटिस उस याचिका पर आया है, जिसमें महाराष्ट्र में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के दौरान बड़ी संख्या में वोटरों के नाम काटने को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि इस प्रक्रिया से कई असली वोटरों के नाम गलत तरीके से हटा दिए गए हैं और इसे तुरंत रोकने के लिए अंतरिम आदेश दिया जाए। सीजेआई सूर्यकांत की अगवाई वाली तीन जजों की बेंच ने इस मामले की अगली सुनवाई पांच नवंबर को तय की है। यह तारीख खास मायने रखती है क्योंकि चुनाव आयोग के अनुसार फाइनल स्टेट इलेक्टोरल रोल यानी अंतिम वोटर लिस्ट 6 नवंबर को प्रकाशित होने वाली है। याचिकाकर्ता अरुण आनंदगिरी (चार्टर्ड अकाउंटेंट और पत्रकार) की तरफ से सीनियर वकील अरविंद दातार पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि महाराष्ट्र की स्थिति बाकी राज्यों से अलग और जटिल है।
दातार ने कहा कि मुंबई में करीब 3500 रिडिवेलपमेंट प्रोजेक्ट चल रहे हैं और पुणे में लगभग 1500 प्रोजेक्ट हैं। इन प्रोजेक्टों में रहने वाले लोगों को नए फ्लैट मिलने तक दूसरी जगह शिफ्ट किया गया है। एसआईआर के दौरान जब उनके पुराने पते पर चेक किया गया तो उन्हें ‘नहीं मिला’ दिखाया गया और इसी आधार पर उनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए। उन्होंने दावा किया कि इस तरह पूरे राज्य में लगभग 3 करोड़ लोगों के नाम काट दिए गए हैं। कोर्ट ने इस दलील को गंभीरता से लिया। जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना वाली बेंच ने दातार से कहा कि आप चिंता मत कीजिए। आप एक व्हिसलब्लोअर की भूमिका निभा रहे हैं और आप हमारे सामने हैं। जरूरत पडऩे पर हम उचित आदेश पास करेंगे, लेकिन पहले चुनाव आयोग और राज्य सरकार की तरफ से जवाब सुनना जरूरी है।
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