सब-स्टैंडर्ड दवा बनाने वाले उद्योग होंगे बंद, दवाइयों के सैंपल फेल होने से सुक्खू सरकार खफा, कैबिनेट में होगी चर्चा,

By: Oct 27th, 2026 12:06 am

दवाइयों के सैंपल फेल होने से सुक्खू सरकार खफा; कैबिनेट में होगी चर्चा, और सख्त होगा कानून

प्रधान संवाददाता — सोलन

प्रदेश में सब-स्टैंडर्ड दवा बनाने वाले उद्योग बंद किए जाएंगे। दवाइयों के लगातार फेल होते सैंपल से सुक्खू सरकार खफा हो गई है। इन दवा उद्योगों पर शिकंजा कसने के लिए सुक्खू कैबिनेट में चर्चा होगी और कानून को पहले से ज्यादा सख्त किया जाएगा। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री धनी राम शांडिल ने सोलन में खुलासा किया है कि घटिया दवाई बनाने वाले सभी उद्योगों को हिमाचल से विदा किया जाएगा। ऐसे उद्योगपति फिर से कोई दूसरा नया उद्योग न लगा सके, इसका प्रावधान भी किया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि घटिया दवाई बनाने वाले कारखाने नहीं चलने दिए जाएंगे। ड्रग कंट्रोलर प्रदेश में बढिय़ा काम कर रहे हैं और इसी कारण घटिया दवाइयों का पता चल पा रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री ने दावा किया है कि घटिया दवाई बनाने वाले सारे उद्योग हिमाचल में बंद किए जाएंगे। इसके लिए कैबिनेट में चर्चा कर नए नियम कायदे तय किए जाएंगे। उन्होंने कहा है कि राज्य में दवा के नाम पर पाप करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और किसी भी सूरत में घटिया दवाई के सहारे तिजोरी भरने में लगे उद्योग नहीं चलने दिए जाएंगे।

सैंपल फेल होने पर कार्रवाई

हिमाचल प्रदेश में दवाई के सेंपल फेल होते ही ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। इसके तहत प्रभावित दवाई का बैच का स्टॉक रिकॉल किया जाता है। राज्य औषधि नियंत्रक द्वारा नोटिस जारी, स्वतंत्र जांच की जाती है। इसके अलावा कई मामलों में उत्पादन रोकने के आदेश और लाइसेंस निलंबन सहित रद्द करने की प्रक्रिया अपनाई जाती है।

यूं फेल होते रहे दवाइयों के सेंपल

एनएसक्यू के मुताबिक इसी साल देश भर में बनी दवाइयों के लगभग 330 सैंपल फेल हो चुके हैं। इनमें से हिमाचल में निर्मित दवाइयों के ही 93 सैंपल शामिल हैं। इन दवाई उद्योगों का सबंध सोलन जिला से भी है। बीते अगस्त माह में ही हिमाचल में बनी दवाइयों के करीब 62 सैंपल फेल बताए गए थे। साल 2025-2026 में हिमाचल में बनी दवाई के 82 सैंपल फेल हुए थे। स्वास्थ्य विभाग द्वारा खुलासा किया गया है कि मार्च, 2025 तक ही पिछले दो वर्षों में 1471 सैंपल फेल हुए थे।

बच्चों का सिरप भी पास नहीं कर पाया टेस्ट

हिमाचल प्रदेश में बन रही दवाइयों के फेल होते सैंपल में बच्चों के सिरप तक शामिल रहे हैं। इसके अलावा बुखार, दर्द, खांसी, एसिडिटी, एंटीबायोटिक, एनीमिया, एलर्जी, उच्च रक्तचाप, हृदय संबंधी, सूजन, मलेरिया, थायरॉइड और कुछ इंजेक्शन सहित विटामिन के सैंपल भी फेल हुए हैं।


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