पश्चिम बंगाल में भी मिलेगी हिमालयन गोल्डन महाशीर; भेजी फिंगरलिंग्स की खेप, जानें क्यों है इतनी खास?

By: Nov 5th, 2026 11:32 pm

राज्य ने पहली बार भेजा मत्स्य बीज, 2000 फिंगरलिंग्स की पहली खेप रवाना

सफल परीक्षण के बाद भेजी जाएंगी 10 हजार अंगुलिकाएं

कार्यालय संवाददाता — बिलासपुर

हिमाचल प्रदेश मत्स्य बीज उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और कदम बढ़ाने जा रहा है। मत्स्य विभाग ने पहली बार राज्य की प्रमुख स्वदेशी मछली प्रजाति गोल्डन माहशीर की 2000 मत्स्य बीज अंगुलिकाओं (फिंगरलिंग्स) की पश्चिम बंगाल को अंतरराज्यीय आपूर्ति की है। इससे प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उत्पादन के साथ-साथ इसके लिए नए बाजार विकसित होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। इन मत्स्य बीज अंगुलिकाओं का उत्पादन जिला मंडी के राष्ट्रीय माहशीर फार्म मच्छियाल में किया गया है। विभाग ने यह खेप पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर निवासी युवा मत्स्य उद्यमी सुब्रत मंडल को बेची है। पहले चरण में भेजी गई 2000 फिंगरलिंग्स की खेप को पायलट परीक्षण के तौर पर लिया गया है। इसके तहत परिवहन के दौरान मछलियों की जीवित रहने की दर और पश्चिम बंगाल की जलवायु एवं पर्यावरणीय परिस्थितियों में उनके अनुकूलन का आकलन किया जाएगा। परीक्षण के परिणाम संतोषजनक रहने पर दूसरे चरण में 10000 गोल्डन माहशीर फिंगरलिंग्स की अगली खेप भेजने की योजना है। गोल्डन माहशीर हिमाचल प्रदेश की राज्य मछली है और हिमालयी नदी तंत्र की महत्त्वपूर्ण स्वदेशी प्रजातियों में शामिल है।

अपने सुनहरे रंग और विशिष्ट शारीरिक क्षमता के कारण इसकी विशेष पहचान है। पारिस्थितिक एवं आर्थिक महत्व रखने वाली यह मछली पौंग और गोबिंदसागर जैसे जलाशयों के मत्स्य संसाधनों में भी योगदान देती है। हालांकि इसे आईयूसीएन की रेड लिस्ट में लुप्तप्राय श्रेणी में रखा गया है। ऐसे में इसका वैज्ञानिक प्रजनन और संरक्षण बेहद महत्त्वपूर्ण है। निदेशक मत्स्य हिमाचल प्रदेश ओम कांत ठाकुर ने कहा कि गोल्डन माहशीर की मत्स्य बीज अंगुलिकाओं की पश्चिम बंगाल को पहली अंतरराज्यीय आपूर्ति विभाग की तकनीकी एवं संस्थागत क्षमता को दर्शाती है। हिमाचल प्रदेश में शीतजल मत्स्य पालन और स्वदेशी मछली प्रजातियों के वैज्ञानिक प्रजनन की अपार संभावनाएं हैं। विभाग गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उत्पादन, संरक्षण और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है।


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