ईरान ने मार गिराया अमरीकी विमान, बंधक बनाया पायलट, ईरानी मीडिया का दावा… पढ़ें पूरी खबर

By: Apr 4th, 2026 12:08 am

ईरानी मीडिया का दावा, पायलट को बचाने आए हेलिकॉप्टर्स और हरक्यूलिस विमान रहे असफल

एजेंसियां — तेहरान, तेल अवीव

अमरीका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग के 35वें दिन ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्र्स (आईआरजीसी) ने बड़ा दावा करते हुए अमरीका के उन्नत लड़ाकू विमान एफ-15ई को मार गिराने की बात कही और मारे गए जहाज के मलबे की तस्वीरें भी शेयर कीं। आईआरजीसी ने कहा है कि उन्होंने फारस की खाड़ी में केश्म द्वीप के दक्षिण में अमरीका के एक उन्नत लड़ाकू विमान एफ-15ई को मार गिराया है। आईआरजीसी के एयर डिफेंस सिस्टम ने सेंट्रल ईरान में इस घटना को अंजाम दिया। इसी बीच ईरानी मीडिया ने बताया कि नष्ट किए जहाज के पायलट ने इजेक्ट किया और सुरक्षा बलों ने उसे हिरासत में ले लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ संकेतों से लगता है कि अमरीका को विश्वास था कि पायलट जीवित हो सकता है, इसलिए उन्होंने उसे ईरान की सीमा से निकालने का प्रयास किया। ईरान की न्यूज एजेंसी तस्नीम ने कहा है कि अमरीकी सेना ने पायलट को वापस लाने के प्रयास में ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टरों और एक हरक्यूलिस सी-130 विमान का उपयोग करके एक तलाशी अभियान चलाया, लेकिन यह अभियान असफल रहा। हालांकि ईरान ने अमरीकी पायलट को बंदी बनाने की पुष्टि नहीं की है। ईरान ने कहा है कि पायलट की जानकारी देने वाले पायलट की जानकारी पर उचित इनाम दिया जाएगा। अमरीका ने भी अपने विमान के गिरने और पायलट को बंदी बनाए जाने के दावों का झूठा बता है। उधर, इजरायल और अमरीका ने शुक्रवार को ईरान के केशम द्वीप के पोर्ट पर हमला किया है।

सेटेलाइट तस्वीरों में ईरान के केशम बंदरगाह से धुआं उठता हुआ देखा गया है। यह हमला ईरान के लिए रणनीतिक और आर्थिक तौर पर बड़ा झटका है। यह पोर्ट ईरान के होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण के लिए महत्त्वपूर्ण है। ईरान की होर्मुज में टोल वसूलने जैसे व्यवस्था के लिए इस द्वीप का बहुत महत्त्व है। केशम फ्री जोन के अधिकारियों ने बताया कि ईरान के केशम द्वीप पर स्थित बहमन कॉमर्शियल बंदरगाह और दोहा मछली पकडऩे के घाट के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा है। बहमन पूरी तरह से एक कॉमर्शियल बंदरगाह है। इस तरह से पोर्ट पर हमला करना अंतरराष्ट्रीय नियमों का सीधा उल्लंघन है। उधर, ईरान ने इजरायल के हाई-टेक डिफेंस हब पर एक बार फिर सटीक बैलिस्टिक मिसाइल हमला किया है। इस बार निशाना था पेताह टिकवा शहर में स्थित इजरायली कंपनी एयरोसोल की ड्रोन फैक्टरी। मिसाइल सीधे फैक्टरी पर गिरी और काफी नुकसान पहुंचाया। इस हमले से फैक्टरी में ड्रोन प्लेटफॉर्म और पाट््र्स की मैन्युफैक्चरिंग रुक जाएगी। एयरोसोल के ड्रोन आईडीएफ की आंख और कान हैं।

ईरान पर नजर रखने, मिसाइल ठिकानों को ट्रैक करने और सटीक हमले करने में ये ड्रोन अहम भूमिका निभाते हैं। फैक्टरी के नुकसान से इजरायल को पुराने स्टॉक पर निर्भर रहना पड़ेगा या विदेश से जल्दी आयात करना पड़ेगा। इसी बीच अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर थोड़ा और समय मिला, तो अमरीका आसानी से होर्मुज स्ट्रेट को खोल सकता है। उन्होंने कहा कि इससे तेल की सप्लाई शुरू होगी और दुनिया को बड़ा फायदा होगा, साथ ही इससे काफी पैसा भी कमाया जा सकता है। उधर, ईरान की सेना ने कहा है कि अगर अमरीका और इजरायल ने उसके इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले बढ़ाए, तो वह पूरे मिडल ईस्ट में उनके ठिकानों को निशाना बनाएगा। ईरानी सेना के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फाघरी ने कहा कि अगर हमारे पुल, बिजली घर या ऊर्जा ढांचे को छुआ, तो हम आपके पूरे क्षेत्र के ठिकाने खत्म कर देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जिन देशों में अमरीकी सैन्य ठिकाने हैं, उन्हें भी नुकसान झेलना पड़ सकता है।

अभी भी ईरान के आधे मिसाइल लांचर सुरक्षित

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, अमरीका की खुफिया एजेंसियों का कहना है कि लगातार हमलों के बावजूद ईरान के अब भी आधे मिसाइल लांचर सुरक्षित हैं। इसके अलावा ईरान के पास हजारों ड्रोन भी हैं, जिनमें से करीब 50 फीसदी अभी इस्तेमाल के लिए तैयार हैं। यह रिपोर्ट अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे से अलग है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान की सैन्य ताकत काफी हद तक खत्म हो चुकी है।

ईरान से तेल लेकर भारत आ रहा जहाज अचानक रास्ता बदल चीन की तरफ मुड़ा

अहमदाबाद। पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से मची हलचल के बीच ईरानी तेल लेकर भारत आ रहे जहाज ने रास्ता बदल लिया है और अब वह चीन की ओर जा रहा है। अमरीकी प्रतिबंधों के दायरे में आने वाला ईरानी कच्चे तेल की यह खेप भारत पहुंचती, तो 2019 के बाद पहली बार भारत द्वारा ईरानी कच्चे तेल की खरीद होती। गौरतलब है कि हाल ही में अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील के बाद भारतीय रिफाइनर मौजूद ईरानी तेल की कुछ खेप खरीदने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। जहाज ट्रैकिंग कंपनी केप्लर के मुताबिक पिंग शुन नाम का अफ्रामैक्स टैंकर गुजरात के वाडिनार के बजाय अब अपना गंतव्य चीन के दोंगयिंग को बता रहा है। इस टैंकर को 2002 में बनाया गया था, जिसे 2025 में अमरीका ने प्रतिबंधित कर दिया था। हालांकि जहाज के ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (एआईएस) में दर्ज गंतव्य अंतिम हो, यह जरूरी नहीं है और यात्रा के दौरान इसमें बदलाव भी हो सकता है।


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