आध्यात्मिक ज्ञान से युवा पीढ़ी को मिलेगी नई दिशा, अध्यात्म से होगा वैश्विक बुराइयों का समाधान : स्वामी श्री निवासाचार्य

By: May 8th, 2026 7:32 pm

आध्यात्मिक जीवन से 

शिमला : आज के आधुनिक और भागदौड़ भरे दौर में मनुष्य खासकर युवा पीढ़ी को अध्यात्म से जोड़ने और उन्हें नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखने के उद्देश्य से श्रीमद्भागवत ज्ञानयज्ञ एवं आध्यात्मिक अनुष्ठान के साप्ताहिक आयोजन शुभारंभ शुक्रवार को संस्कृत गुरुकुल पंचकूला के परम श्रद्धेय स्वामी श्री निवासाचार्य जी के सानिध्य में शिमला विश्वविद्यालय (एपीजी) में मंदिर परिसर में हुआ। मंदिर परिसर में पहुंचे स्वामी निवासाचार्य का विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से स्वागत किया गया। श्रीमद भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के प्रथम दिन व्यास गद्दी को अलंकृत कर व्यासपीठ से स्वामी निवासाचार्य ने अपनी ओजस्वी वाणी से प्रतिभागी श्रद्धालुओं, स्थानीय लोगों, एपीजी, विश्वविद्यालय के छात्रों, शिक्षकों को संबोधित करते हुए श्रीमद भागवत महापुराण की महिमा व आध्यात्मिक ज्ञान का व्याख्यान किया। स्वामी श्री निवासाचार्य ने कहा कि आज विश्व में युवा ही नहीं बल्कि हर व्यक्ति जिस तरह मानसिक तनाव और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं, उसमें आध्यात्मिक ज्ञान एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है। इस तरह के धार्मिक प्रसंगों के आयोजनों का मुख्य उद्देश्य युवाओं को यह समझाना है कि अध्यात्म ज्ञान के माध्यम से व्यक्ति जीवन की आपाधापी और भागदौड़ के बीच भी शांत रहना सीखता है। आध्यात्मिक ज्ञान युवाओं को नशे की गर्त में जाने से रोकता और उन्हें एक सात्विक जीवन जीने की प्रेरणा भी देता है। वर्तमान समय की चुनौतियों का सामना करने के लिए आत्मबल और आध्यात्मिक ज्ञान की सीख अनिवार्य है।

इस दिशा में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत एक युगांतकारी पहल करते हुए ‘भारतीय ज्ञान परंपरा’ को उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल किया है। इस निर्णय का मूल उद्देश्य भारतीय समाज, और विशेषकर युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति, गौरवशाली इतिहास और पूर्वजों की बौद्धिक विरासत से रूबरू कराना है। इस नए पाठ्यक्रम के माध्यम से छात्र अब केवल किताबी सिद्धांतों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे हमारे महान ऋषि-मुनियों और गुरुओं की शिक्षाओं को गहराई से समझेंगे। पाठ्यक्रम में उन धार्मिक ग्रंथों और प्रसंगों को विशेष स्थान दिया गया है, जो न केवल अध्यात्म का मार्ग दिखाते हैं, बल्कि एक सफल और संतुलित जीवन जीने का व्यावहारिक सूत्र भी प्रदान करते हैं। स्वामी श्री निवासाचार्य ने कहा कि आध्यात्मिक जीवन से वैश्विक बुराइयों का समाधान किया जा सकता है। युवाओं को इस तरह तैयार किया जाना चाहिए कि वे केवल व्यक्तिगत सफलता के पीछे न भागकर मानवहित के लिए कार्य करें। प्राचीन स्वास्थ्य विज्ञान (आयुर्वेद और योग) और नीति शास्त्र को अपनाकर युवा एक स्वस्थ मानसिकता के साथ राष्ट्र को तरक्की की राह पर ले जाएंगे।

भारतीय मूल्यों के समावेश से युवा पीढ़ी में वह सामर्थ्य विकसित होगा, जिससे वे विश्व में बढ़ती अनैतिकता और द्वेष का समाधान अपनी समृद्ध सांस्कृतिक जड़ों में ढूंढ सकें। जब युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ेगी तो उनमें आत्म-सम्मान की भावना जागृत होगी। धर्म ग्रंथों, पुराणों, ऋग्वेदों में सुझाए गए प्रसंगों से प्रेरणा लेकर युवा न केवल तकनीकी रूप से सक्षम बनेंगे, बल्कि नैतिक रूप से भी इतने सुदृढ़ होंगे कि वे एक समृद्ध और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभा सकें। आधुनिक शिक्षा को आध्यात्मिक ज्ञान व संस्कारों से जोड़कर भारत को पुनः ‘विश्व गुरु’ के पद पर आसीन करने की दिशा में एक बड़ा संकल्प माना जा रहा है। आज विदेशों में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक ज्ञान परंपरा को अपनाया जा रहा है और भारत में युवा पीढ़ी इस समृद्ध संस्कृति, वेदों और पुराणिक आध्यात्मिक ज्ञान से दूर रहकर पश्चिमी देशों की संस्कृति को अपना रही है। स्वामी श्री निवासाचार्य ने कहा कि यह श्रीमद भागवत ज्ञानयज्ञ एक सप्ताह तक चलता रहेगा, जिसमें प्रतिदिन विभिन्न भागवत कथा प्रसंगों के माध्यम से जीवन प्रबंधन के सूत्र सिखाए जाएंगे। स्वामी जी ने आह्वान किया कि अभिभावक अपने बच्चों को इन आध्यात्मिक आयोजनों में जरूर लाएं ताकि वे अपनी जड़ों और संस्कृति से परिचित हो सकें। अध्यात्म केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। यदि युवा वर्ग भागवत एवं आध्यात्म के सिद्धांतों को अपना ले, तो वह नशे और अवसाद जैसी बीमारियों से मुक्त होकर एक सफल जीवन जी सकता है। स्वामी निवासाचार्य ने कहा किकोविड महामारी के दौरान जब विश्व में चारों तरफ डर, मौत और अनिश्चितता थी, तो गीता के दो कर्मण्येवाधिकारस्ते और समत्वं योग उच्यते सूत्र भारत के लोगों को संभाले रहे। महामारी ने सिखाया कि हालात काबू में नहीं होते, पर मन का रिएक्शन काबू में है। गीता का भी यही उपदेश है — कर्म कर, चिंता छोड़, बैलेंस रख। संस्कृत गुरुकुल पंचकुला के प्रख्यात विद्वान और ओजस्वी वक्ता परम श्रद्धेय स्वामी श्री निवासाचार्य जी व्यास गद्दी से अपनी अमृतवाणी द्वारा भागवत कथा का रसपान करवा रहे हैं। उनकी ज्ञानमयी व्याख्या और भक्तिपूर्ण शैली श्रोताओं, श्रद्धालुओं को साक्षात गोकुल-मथुरा की


Keep watching our YouTube Channel ‘Divya Himachal TV’. Also,  Download our Android App or iOS App